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Jammu News: आरक्षित सीट किसी भी दल के प्रत्याशी के लिए न हो नामित
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उप राज्यपाल से मिले एसओएस संगठन के सदस्य, सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एसओएस इंटरनेशनल संगठन ने उप राज्यपाल मनोज सिंहा से आरक्षित एकल सीट के लिए किसी राजनीतिक दल के उम्मीदवार को नामित नहीं करने की मांग उठाई है। इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा गया।
इस मौके पर एसओएस इंटरनेशनल के अध्यक्ष राजीव चुन्नी ने कहा कि यहां पर 12 लाख से अधिक शरणार्थी रहते हैं। इसलिए इस सीट के लिए किसी भी राजनीतिक नियुक्ति से पीओजेके विस्थापितों को अपने अधिकारों को खोने का खतरा होगा, जो उन्होंने लगभग तीन दशकों के संघर्ष के बाद आंशिक रूप से हासिल किया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आरक्षित सीट को किसी भी व्यक्ति के लिए राजनीतिक रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इसके बजाय इसे विस्थापित समुदाय के हितों का वास्तविक प्रतिनिधित्व करने के अपने इच्छित उद्देश्य को पूरा करना चाहिए। यदि हम वास्तव में पीओजेके शरणार्थियों की जरूरतों को पूरा करना चाहते हैं, तो एक गैर-राजनीतिक उम्मीदवार पर विचार किया जाना चाहिए।
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कई राजनीतिक हस्तियों ने विधानसभा और उच्च सदन दोनों में इस समुदाय का प्रतिनिधित्व किया है। फिर भी वे सार्थक परिणाम देने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने लगभग तीन दशकों के संघर्ष के दौरान जम्मू-कश्मीर के अंदर और बाहर पीओजेके शरणार्थियों को एकजुट करने के लिए लगातार अभियान चलाया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एसओएस इंटरनेशनल संगठन ने उप राज्यपाल मनोज सिंहा से आरक्षित एकल सीट के लिए किसी राजनीतिक दल के उम्मीदवार को नामित नहीं करने की मांग उठाई है। इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा गया।
इस मौके पर एसओएस इंटरनेशनल के अध्यक्ष राजीव चुन्नी ने कहा कि यहां पर 12 लाख से अधिक शरणार्थी रहते हैं। इसलिए इस सीट के लिए किसी भी राजनीतिक नियुक्ति से पीओजेके विस्थापितों को अपने अधिकारों को खोने का खतरा होगा, जो उन्होंने लगभग तीन दशकों के संघर्ष के बाद आंशिक रूप से हासिल किया है।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आरक्षित सीट को किसी भी व्यक्ति के लिए राजनीतिक रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इसके बजाय इसे विस्थापित समुदाय के हितों का वास्तविक प्रतिनिधित्व करने के अपने इच्छित उद्देश्य को पूरा करना चाहिए। यदि हम वास्तव में पीओजेके शरणार्थियों की जरूरतों को पूरा करना चाहते हैं, तो एक गैर-राजनीतिक उम्मीदवार पर विचार किया जाना चाहिए।
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कई राजनीतिक हस्तियों ने विधानसभा और उच्च सदन दोनों में इस समुदाय का प्रतिनिधित्व किया है। फिर भी वे सार्थक परिणाम देने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने लगभग तीन दशकों के संघर्ष के दौरान जम्मू-कश्मीर के अंदर और बाहर पीओजेके शरणार्थियों को एकजुट करने के लिए लगातार अभियान चलाया है।