Jammu Kashmir: पहाड़ों से निर्मल निकली तवी नदी, जम्मू पहुंचते ही प्रदूषित होने लगी, खतरे में जलीय जीव-जंतु
अध्ययन के दौरान पाया गया कि शहरीकरण और बढ़ते उद्योगों के कारण तवी नदी का पानी दूषित हो रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि अगर इस पानी को बचाया जाए तो शहर पेयजल किल्लत दूर हो सकती है।
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भद्रवाह के कैलाश कुंड से निकलते वक्त तवी का पानी स्वच्छ और पीने लायक होता है, लेकिन जम्मू में पहुंचते ही दूषित हो जाता है। इसकी पुष्टि जम्मू विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने की है। उन्होंने अध्ययन के बाद तवी बेसन पर शोध पत्र भी प्रकाशित किया है।
अध्ययन के दौरान पाया गया कि शहरीकरण और बढ़ते उद्योगों के कारण तवी नदी का पानी दूषित हो रहा है। लेकिन इसे अब भी पीने लायक बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का दावा है कि अगर इस पानी को बचाया जाए तो शहर पेयजल किल्लत दूर हो सकती है।
जम्मू के गुज्जर नगर से लेकर भगवती नगर तक जांच के लिए पानी के नमूने लिए गए थे। इसमें बायोकार्बोनेट, क्लोराइड, कैल्शियम, मैग्निशियम, सोडियम, और पोटाशियम की जांच की गई है। शोध में पाया गया है कि तवी नदी में 25 नालों का पानी मिलता है। इससे यह दूषित हो रहा है।
इन नालों का पानी बिना जांच के ही तवी में डाल दिया जा रहा है। इसके लिए कोई पावर प्यूरिफिकेशन प्लांट की व्यवस्था नहीं है। जल जनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। जलीय जीवों पर भी असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार शोध में पाया गया है कि गुज्जर नगर में पानी की पीएच वैल्यु अधिक मात्रा में है। भगवती नगर में सोडियम अधिक मात्रा में पाया गया है। हालांकि, तवी के पानी को पीने के लिए प्रयोग में नहीं लाया जाता, लेकिन अन्य कई कामों में इस दूषित पानी का प्रयोग किया जा रहा है।
बिक्रम चौक में पानी का एचसीओ-थ्री 220 मिमी लीटर पहुंचा
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय मानक ब्यूरो की रिपोर्ट में मानदंड तय किया है कि 6.5 से 8.5 तक पानी की मात्रा होगी तो इसे दूषित होने से बचाया जा सकता है। तवी का पानी अभी पूरी तरह से दूषित नहीं हुआ है।
बिक्रम चौक के पास नदी में पानी का एचसीओ-थ्री 220 मिलिमीटर प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि यह 600 से तक हो सकता है। भगवती नगर दूसरे स्थान पर है, जहां बायोकार्बोनेट 6.7 ग्राम पाया गया है।
इसके अलावा बाग-ए बाहू और शिथली लिफ्ट कैनाल से पानी की आपूर्ति भी की जाती है। इसमें भी कैल्शियम पाया गया है।
सर्फ और साबुन का मिश्रण भी पानी को करता दूषित
विशेषज्ञों के अनुसार बरसात में पानी ज्यादा दूषित हो रहा है। नगरोटा से लेकर भगवती नगर तक पानी ज्यादा दूषित हो रहा है। कचरा, पॉलिथीन फेंका जा रहा है। सर्फ और साबुन के मिश्रण से भी नदी का पानी दूषित हो रहा है। इसका प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है। जलीय जीव-जंतु भी खतरे में हैं।
बीमारियों से बचना है तो नदी-नालों के पानी को बचाएं, डॉ. सरफराज
जम्मू विवि के भूगोल विभाग के विशेषज्ञ डॉ. सरफराज असगर ने कहा कि घरों से निकलने वाले कचरे को नदी नालों में न फेंके। इसका उचित निस्तारण करें। प्लास्टिक कचरे को अलग करें। उन्होंने कहा, अगर नदी-नालों के पानी को साफ रखा जाएगा तो मलेरिया सहित अन्य कई रोगों से बच सकते हैं।