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शिक्षा: पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल 2022 का विरोध, अविलंब वापस लेने की उठाई मांग

Tue, 18 Oct 2022 02:56 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 18 Oct 2022 02:56 PM IST
सार

प्रस्तावित संसोधन विश्वविद्यालयों के अकादमिक क्षेत्र का उल्लंघन है और विश्वविद्यालय के मामलों में नौकरशाही के अवांछित हस्तक्षेप को बढ़ाने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। 

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jammu kashmir studenst scholars Oppose to Public University Bill 2022
जम्मू विश्वविद्यालय - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर पब्लिक यूनिवर्सिटी बिल-2022 का कड़ा विरोध किया। प्रस्तावित बिल को लेकर एबीवीपी नेे सोमवार को विद्यार्थी भवन अम्फल्ला में प्रेस वार्ता की। जम्मू-कश्मीर एबीवीपी के राज्य सचिव मुकेश मन्हास ने कहा कि प्रस्तावित संसोधन विश्वविद्यालयों के अकादमिक क्षेत्र का उल्लंघन है और विश्वविद्यालय के मामलों में नौकरशाही के अवांछित हस्तक्षेप को बढ़ाने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। 

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उन्होंने कहा कि विवि स्वायत्त निकाय है। विश्वविद्यालय के कामकाज में सरकारी निकायों के हस्तक्षेप से काम का माहौल खराब हो जाएगा और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता की मूल भावना खत्म हो जाएगी। एवीबीपी ने अविलंब इस बिल को वापस लेने की मांग की।
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मन्हास ने कहा कि यदि प्रस्तावित सार्वजनिक विश्वविद्यालय विधेयक-2022 को वापस नहीं लिया और सहायक प्रोफेसरों के चयन के मानदंड में बदलाव नहीं किया तो एवीबीपी सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेगी। इस दौरान राज्य की संयुक्त सचिव श्वेता शर्मा, केंद्रीय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शुभम रैना और अन्य मौजूद रहे। 
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बता दें कि हाल हीं में एलजी मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाली प्रशासनिक परिषद ने इस बिल को अपनी मंजूरी दी थी। सार्वजनिक विश्वविद्यालय विधेयक-2022 में प्रस्तावित प्रमुख संसोधन में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों, प्रोफेसरों की नियुक्ति जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग (जेकेपीएससी) करेगा न कि यूटी में सार्वजनिक विश्वविद्यालय। इसमें अराजपत्रित पदों के लिए साक्षात्कार को पूरी तरह से समाप्त करने और सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से भर्ती करने का प्रस्ताव किया गया है। 

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