जम्मू-कश्मीर सरोर टोल प्लाजा विवादः बैठाने की बजाय हाथ जोड़कर निकले बस चालक, परेशान हुए यात्री
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कठुआ में सरोर टोल प्लाजा हटाए जाने के समर्थन में ऑल जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट यूनियन के चक्का जाम का जिले में व्यापक असर देखने को मिला। सोमवार से जहां बसें पहले ही बंद थी तो गुरुवार को मिनी बसें भी नहीं चलने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बाजार खुले लेकिन रौनक न के बराबर रही। ऐसा तब जब त्यौहारी सीजन में भीड़ भाड़ रहती है। लखनपुर, हटली मोड़, कालीबड़ी चौक सहित हीरानगर मोड़, दियालाचक और चड़वाल चौक में हाईवे पर यात्री वाहनों का लोग घंटों इंतजार करते रहे।
ट्रांसपोर्ट यूनियन के विरोध के बाद अंतरराज्यीय बसों ने भी सवारियों को नहीं बैठाया जिससे परेशानियां और भी बढ़ गईं। जिला में नाममात्र चलने वाली एसआरटीसी बस सेवा भी निजी यात्री वाहनों की कमी को पूरा नहीं कर पाईं। सरकार की ओर से वैकल्पिक इंतजाम न किए जाने से करवाचौथ पर खासकर महिलाओं को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
ट्रांसपोर्ट यूनियन ने किया प्रदर्शन
मिनी बस यूनियन कठुआ के अध्यक्ष हरमोहिंद्र सिंह ने कहा कि सांबा जिला की मिनी बसों के साथ-साथ जम्मू-कठुआ रूट की बसों को हाईवे टोल टैक्स चुकाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह ट्रांसपोर्टरों पर दोहरी मार है। अन्य ट्रांसपोर्टरों ने रोष जताते कहा कि टोल के रूप में 700 रुपए रोज का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है। गाड़ी पर टोकन टैक्स नौ फीसदी कर दिया है जिसकी वजह से कई वाहन पंजीकृत नहीं हो पा रहे हैं। मांगें नहीं मानी गईं तो गाड़ियां सड़क पर लगाकर प्रदर्शन करेंगे।
4 दिन से बसें बिलावर बस स्टैंड पर खड़ी
सरोर टोल प्लाजा के विरोध में बिलावर से जम्मू और कठुआ की तरफ कोई भी बस नहीं चली जिससे इन जगहों पर जाने वाले मुसाफिर परेशान रहे। पिछले 4 दिनों से जम्मू की तरफ जाने वाली बसें बस स्टैंड बिलावर में खड़ी हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इस महंगाई के दौर में डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, बड़ी मुश्किल से गुजारा होता है लेकिन सरकार ने नया टोल लगाकर अन्याय किया है। उन्होंने टोल प्लाजा बंद करने की मांग करते हुए कहा कि हर दिन जम्मू आने जाने के लिए उनको 350 रुपए भरने पड़ेंगे जो सरासर गलत है।
यही हाल हीरानगर में रहा। हाईवे और संपर्क मार्गों पर सभी छोट-बड़े यात्री वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से ठप रही। इससे लोग को काफी परेशान रहे। जिन्हें इस हड़ताल की सूचना समय पर मिल गई थी वह तो घरों से नहीं निकले। लेकिन जिन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं थी वह सड़कों के किनारे दरबदर होते रहे। बाहरी राज्यों की बसों ने भी सवारियों को नहीं बैठाया।