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कायदे-कानून की नसीहत देने वालों का ऐसा है हाल, बेदाग नहीं जम्मू-कश्मीर की खाकी
Mon, 24 Feb 2020 04:31 PM IST
प्रशांत कुमार
सतीश वालिया, जम्मू
सतीश वालिया, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 24 Feb 2020 04:31 PM IST
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जम्मू कश्मीर पुलिस
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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दूसरों को कायदा-कानून की नसीहत देने वाले पुलिस महकमे की अपनी वर्दी भी बेदाग नहीं है। जम्मू-कश्मीर में हर साल औसतन 500 से ज्यादा शिकायतें पुलिस कर्मियों के खिलाफ आती हैं। इनमें से कई मामलों में विभागीय जांच तो दर्जनों एफआईआर दर्ज हो रही हैं। वर्ष 2014 में तो रिकॉर्ड एक हजार से ज्यादा शिकायतें पहुंचीं, जिनमें से 10 में ही एफआईआर दर्ज की गई। ज्यादातर मामलों में पुलिसकर्मी रौब दिखाकर कानून अपने हाथ में लेने और एक पक्ष की तरफदारी करने से जुड़े पाए गए हैं।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा मामलों में शिकायतकर्ता पुलिस की जांच पर ही सवाल उठाते हैं। हर साल पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ औसतन 500 शिकायतें आती हैं। वहीं रौब झाड़ने, अभद्र व्यवहार और ड्यूटी में कोताही जैसे 300 से ज्यादा मामलों में कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई चलती है।
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कार्रवाई पूरी होने के बाद पुलिस थानों में कर्मचारियों के खिलाफ मामले भी दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि कुछ शिकायतें निराधार भी पाई गई हैं। छानबीन के बाद ऐसे मामलों को बंद कर दिया जाता है। पुलिस के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने कहा कि शिकायतें आने पर विभाग द्वारा आरोपों को गंभीरता से लिया जाता है। विभाग भी कानूनी प्रावधानों के प्रति जवाबदेह है।
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इन कारणों के कारण पहुंच रही शिकायतें
कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें आने का कारण समय पर न्याय न मिलना भी है। इसके अलावा विवाद व आपराधिक मामलों में एक पक्ष की तरफदारी, पुलिसकर्मियों द्वारा रौब दिखाना, बिना कारण लोगों से मारपीट करना और वाहन पार्किंग के लिए धमकाने की शिकायतें भी आ रही हैं।
इन मामलों में विभागीय जांच
विभागीय जांच शुरू होने का कारण नौकरी में कोताही बरतना भी रहा है। इसके अलावा ड्यूटी पर न आना, व्यवहार सही न होना, रिश्वत लेने और महिला कांस्टेबल से दुर्व्यवहार की शिकायतों पर विभागीय जांच की जा रही है।
साल शिकायतें विभागीय जांच झूठी मामले दर्ज
2012 423 539 190 46
2013 839 479 2
2014 1209 742 10
2015 821 448 36
2016 500 329 74
2017 624 339 24
2018 421 309 16
2019 589 415 29
कानून सब के लिए एक है। कानूनी दायरे में पुलिस कर्मचारियों के विरुद्ध आने वाली शिकायतों पर छानबीन की जाती है और आरोप तय होने पर एफआईआर दर्ज होती है। कानून तोड़ने पर पुलिस सख्ती से पेश आ रही है। चाहे पुलिस कर्मचारी ही क्यों न हो।- विवेक गुप्ता, डीआईजी, पुलिस विभाग
साल शिकायतें विभागीय जांच झूठी मामले दर्ज
2012 423 539 190 46
2013 839 479 2
2014 1209 742 10
2015 821 448 36
2016 500 329 74
2017 624 339 24
2018 421 309 16
2019 589 415 29
कानून सब के लिए एक है। कानूनी दायरे में पुलिस कर्मचारियों के विरुद्ध आने वाली शिकायतों पर छानबीन की जाती है और आरोप तय होने पर एफआईआर दर्ज होती है। कानून तोड़ने पर पुलिस सख्ती से पेश आ रही है। चाहे पुलिस कर्मचारी ही क्यों न हो।- विवेक गुप्ता, डीआईजी, पुलिस विभाग