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जम्मू-कश्मीर में बढ़ते नशे पर तीन हफ्तों में सरकार को देना होगा जवाब

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jammu kashmir,order,court
जम्मू। प्रदेश में बढ़ते नशे को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से तीन हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने इसे लेकर कई बार अलग-अलग दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है। नशा तस्करों को कम सजा मिलने और युवाओं के बीच बढ़ते नशे के प्रचलन को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश संजय डार वाली खंडपीठ ने उक्त याचिका पर सुनवाई की।
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इससे पहले 10 अक्तूबर, 2021 को खंडपीठ ने रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था कि 2016 से लेकर अब तक जब्त नशे के कितने मामले डिस्पोज ऑफ किए गए हैं। हाईकोर्ट ने यह महसूस किया है कि नशे की दवाओं के खतरे की जांच के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है और इस उद्देश्य के लिए पुलिस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। लिहाजा एनडीपीएस की धारा 52-ए में निहित प्रावधानों की मदद लेनी चाहिए, ताकि जब्त नशा सामग्री के निस्तारण के संबंध में कार्रवाई की जा सके। जिन क्षेत्रों में छात्र वर्ग की लगातार मूवमेंट रहती है, उन क्षेत्रों पर नियमित निगरानी की जरूरत है, ताकि युवा पीढ़ी नशीली दवाओं की लत में न पड़े और ऐसा करने से उन्हें उत्पीड़न न होना पड़े। जेएनएफ
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छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने
के लिए सरकार से जवाब तलब
जम्मू। छात्र-शिक्षक अनुपात को बनाए रखने के लिए नीति बनाने की मांग पर हाईकोर्ट ने सरकार से इस मामले में ताजा रिपोर्ट मांगी है। जम्मू-कश्मीर लद्दाख शिक्षक फेडरेशन की ओर से इसे लेकर याचिका दायर की गई थी। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश संजय डार वाली वाली खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। कहा कि जो रिपोर्ट पहले पेश की गई उसमें यह स्पष्ट नहीं है कि क्या वे परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनका रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। अगली रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताएं कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में छात्र-शिक्षक अनुपात में प्रगति को लेकर क्या किया गया है। बता दें कि याचिका में बताया गया कि कई स्कूलों में शिक्षक ज्यादा हैं और छात्र कम। कई स्कूलों में इतने छात्र हैं कि एक शिक्षक से काम चलाना पड़ता है। इसकी वजह से स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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