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वाणिज्यिक विवादों के निपटान के लिए प्रभाग का गठन हो : हाईकोर्ट
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के उच्च न्यायालय ने वाणिज्यिक विवादों से संबंधित मध्यस्थता कार्यवाहियों के निपटान के लिए अदालत के वाणिज्यिक प्रभाग के गठन का समर्थन किया है। यह दिशा-निर्देश न्यायमूर्ति संजय धर की एक पीठ द्वारा दिए गए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि संविधान (जम्मू और कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश, 2019 के अनुसार संविधान की निष्क्रियता के बाद भी उच्च न्यायालय में मौलिक नागरिक अधिकार क्षेत्र बरकरार है।
न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक विवादों के मामलों को बिना वाणिज्यिक प्रभाग के गठन के नहीं सुना जा सकता है। इसके बाद न्यायालय ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष विचार के लिए रखा जाए ताकि वाणिज्यिक प्रभाग के गठन पर उचित निर्णय लिया जा सके।
न्यायालय ने यह भी सुझाव दिया कि सामान्य मौलिक नागरिक अधिकार क्षेत्र में वाणिज्यिक विवादों के निपटान के लिए अलग उच्च विशेष मूल्य निर्धारित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। उच्च न्यायालय में वाणिज्यिक विवादों से संबंधित कई मध्यस्थता कार्यवाहियां लंबित हैं और वाणिज्यिक प्रभाग के अभाव में इनका निपटान संभव नहीं है। इसलिए रजिस्ट्रार जनरल से अनुरोध किया गया है कि इस मामले में तत्काल कदम उठाए जाएं।
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न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक विवादों के मामलों को बिना वाणिज्यिक प्रभाग के गठन के नहीं सुना जा सकता है। इसके बाद न्यायालय ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष विचार के लिए रखा जाए ताकि वाणिज्यिक प्रभाग के गठन पर उचित निर्णय लिया जा सके।
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न्यायालय ने यह भी सुझाव दिया कि सामान्य मौलिक नागरिक अधिकार क्षेत्र में वाणिज्यिक विवादों के निपटान के लिए अलग उच्च विशेष मूल्य निर्धारित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। उच्च न्यायालय में वाणिज्यिक विवादों से संबंधित कई मध्यस्थता कार्यवाहियां लंबित हैं और वाणिज्यिक प्रभाग के अभाव में इनका निपटान संभव नहीं है। इसलिए रजिस्ट्रार जनरल से अनुरोध किया गया है कि इस मामले में तत्काल कदम उठाए जाएं।
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