फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu kashmir news

Jammu News: हाईकोर्ट ने केयू को लगाई फटकार, कहा ''''हायर एंड फायर'''' नीति स्वीकार्य नहीं

विज्ञापन
jammu kashmir news
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) को निर्देश दिया है कि वह विधि विभाग में कोर फैकल्टी की नियुक्ति होने तक संविदा के साथ-साथ शैक्षणिक व्यवस्था पर लगे फैकल्टी सदस्यों को भी काम पर रखने की अनुमति दे।
विज्ञापन

जस्टिस संजय धर की पीठ ने शैक्षणिक व्यवस्था के आधार पर नियुक्त लोगों द्वारा दायर कई याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा, जहां तक संविदा के आधार पर या शैक्षणिक व्यवस्था के आधार पर लगे शिक्षण संकाय को समान व्यवस्था से बदलने की अनुमति के संबंध में कानूनी स्थिति का सवाल है, तो यह किसी भी तरह के संदेह से परे है, क्योंकि किसी संस्थान के लिए हायर एंड फायर नीति का सहारा लेना और संविदा/अस्थायी व्यवस्था को समान व्यवस्था से बदलना स्वीकार्य नहीं है।
विज्ञापन

अदालत ने कहा, प्रतिस्थापन केवल नियमित रूप से नियुक्त कर्मचारियों/शिक्षण संकाय के माध्यम से ही किया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न विज्ञापन नोटिसों को चुनौती दी थी, जिसके तहत विश्वविद्यालय ने सत्र 2023 और 2024 के लिए शैक्षणिक व्यवस्था के आधार पर संविदा व्याख्याताओं की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत ने कहा, प्रतिवादियों (केयू अधिकारियों) द्वारा याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को समाप्त करने और उन्हें विजिटिंग लेक्चरर और गेस्ट लेक्चरर जैसी तदर्थ व्यवस्थाओं द्वारा प्रतिस्थापित करने की कार्रवाई सत्ता के दुर्भावनापूर्ण प्रयोग के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने आगे कहा, ऐसा करके, प्रतिवादी विश्वविद्यालय याचिकाकर्ताओं के सेवा अनुबंधों को समाप्त करने का इरादा रखता है, लेकिन इस प्रक्रिया में, वे छात्र समुदाय के साथ भी बहुत बड़ा अन्याय कर रहे हैं, जिन्हें बिना किसी निरंतरता के गेस्ट/विजिटिंग लेक्चरर की दया पर छोड़ दिया जा रहा है। अदालत ने कहा कि कानूनी शिक्षा नियम 2008 के नियम 17 के तहत परिकल्पित कोर संकाय बनाने के बजाय, ऐसा लगता है कि विश्वविद्यालय, हायर एंड फायर की नीति का सहारा ले रहा है, जो न केवल याचिकाकर्ताओं के हितों के लिए बल्कि छात्र समुदाय के व्यापक हितों के लिए भी हानिकारक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed