फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu kashmir news: Shikara Ambulance helping patients in Dal Lake

शिकारा एंबुलेंस : लहरों पर सवार अनोखा मददगार, डल झील में जारी है कोरोना के खिलाफ जंग

Fri, 14 May 2021 02:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 14 May 2021 02:42 AM IST
सार

  • एम्बुलेंस के मालिक तारिक पतलू डल झील में रहने वाले लोगों को कोरोना के प्रति जागरुक करते हैं
  • कहते हैं कि एसओएस कॉल आने पर मैं मदद करने निकल जाता हूं

विज्ञापन
Jammu kashmir news: Shikara Ambulance helping patients in Dal Lake
शिकारा एम्बुलेंस - फोटो : amar ujala

विस्तार

श्रीनगर के बीचोंबीच दबरवन पहाड़ियों के दामन में स्थित डल झील अपने दिलकश नजारों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। वर्ष 2020 के दिसंबर में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी अनोखी शिकारा एंबुलेंस अब डल के पानी पर तैरती नजर आ रही है। एम्बुलेंस के मालिक तारिक पतलू डल झील में रहने वाले लोगों को कोरोना से संबंधित जानकारी देते हैं और जागरुक करते हैं। उनके अनुसार एसओएस कॉल आने पर वह मदद करने भी पहुंचते हैं। 

विज्ञापन


डल झील के रहने वाले तारिक अहमद पतलू ने उनके साथ घटी एक घटना के बाद इस शिकारा एम्बुलेंस को बनाने की ठानी और इसे दिसंबर में एक बाहर के ट्रस्ट की मदद से बनाया। तारिक ने बताया कि वह पहली लहर में कोरोना से संक्रमित हुए थे और कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत वह पहले अपने हाउसबोट में आइसोलेशन में चले गए, लेकिन हालत बिगड़ी तो अस्पताल का रुख करना पड़ा था। अस्पताल से लौटने के बाद डल झील के किनारे शिकारे वालों ने उन्हें उनकी हाउसबोट तक ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने इस शिकारा एम्बुलेंस को बनाने की ठान ली। 
विज्ञापन


अब यह एम्बुलेंस एक स्ट्रेचर, व्हील चेयर और कोविड सम्बंधित कुछ सामान लेकर रोजाना डल झील के अंदरूनी इलाकों का दौरा करती है। तारिक ने बताया कि रमजान के इस पाक महीने में वह रोजाना 2-3 घंटे डल झील में लोगों को जागरूक करने के लिए जाते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि इस दौरान अगर किसी को कोविड संबंधित कोई चीज जैसे पीपीई किट, मास्क, आदि की जरूरत पड़ती है वह देने के लिए भी जाते हैं। इसके अलावा एसओएस कॉल आने मर मरीजों को डल के अंदरूनी इलाकों से लाने और ले जाने का काम भी करते हैं। करीब दो महीने की मेहनत और 12 लाख रुपये की लागत के बाद वह इस शिकारा एंबुलेंस के ढांचे को दिसंबर 2020 में पूरा कर पाए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed