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Jammu News: 11 साल पुराने एनडीपीएस मामले में दो आरोपी बरी
Wed, 03 Jun 2026 02:12 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Wed, 03 Jun 2026 02:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा अरविंद शर्मा की अदालत ने वर्ष 2015 में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस जांच में गंभीर खामियां और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन सामने आया जिस कारण अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 12 मार्च 2015 को विजयपुर के स्वांखा मोड़ पर जांच के दौरान जम्मू से सांबा जा रही एक कार को रोका गया था। पुलिस ने दावा किया था कि चालक सुखजिंदर सिंह और उसके साथ बैठे रौनक सिंह के कब्जे से एक-एक किलोग्राम भुक्की (चूरा पोस्त) बरामद हुई थी। नमूनों की एफएसएल जांच में मॉर्फिन मिलने की पुष्टि हुई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस गवाहों के बयानों में बरामदगी को लेकर कई विरोधाभास हैं। कुछ गवाहों ने कहा कि भुक्की आरोपियों की जैकेट से मिली जबकि नाका प्रभारी ने जिरह में बताया कि एक पॉलीथिन वाहन की सीट के नीचे से बरामद हुई थी। वहीं जांच अधिकारी ने दावा किया कि बरामदगी आरोपियों के व्यक्तिगत कब्जे से हुई थी।
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अदालत ने यह भी माना कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का पालन नहीं किया गया। आरोपियों को यह अधिकार नहीं बताया गया कि वे किसी गजटेड अधिकारी या मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तलाशी की मांग कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा कि कथित मादक पदार्थ वास्तव में आरोपियों के कब्जे से बरामद हुआ था।
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा अरविंद शर्मा की अदालत ने वर्ष 2015 में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस जांच में गंभीर खामियां और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन सामने आया जिस कारण अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 12 मार्च 2015 को विजयपुर के स्वांखा मोड़ पर जांच के दौरान जम्मू से सांबा जा रही एक कार को रोका गया था। पुलिस ने दावा किया था कि चालक सुखजिंदर सिंह और उसके साथ बैठे रौनक सिंह के कब्जे से एक-एक किलोग्राम भुक्की (चूरा पोस्त) बरामद हुई थी। नमूनों की एफएसएल जांच में मॉर्फिन मिलने की पुष्टि हुई थी।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस गवाहों के बयानों में बरामदगी को लेकर कई विरोधाभास हैं। कुछ गवाहों ने कहा कि भुक्की आरोपियों की जैकेट से मिली जबकि नाका प्रभारी ने जिरह में बताया कि एक पॉलीथिन वाहन की सीट के नीचे से बरामद हुई थी। वहीं जांच अधिकारी ने दावा किया कि बरामदगी आरोपियों के व्यक्तिगत कब्जे से हुई थी।
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अदालत ने यह भी माना कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का पालन नहीं किया गया। आरोपियों को यह अधिकार नहीं बताया गया कि वे किसी गजटेड अधिकारी या मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तलाशी की मांग कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा कि कथित मादक पदार्थ वास्तव में आरोपियों के कब्जे से बरामद हुआ था।