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Jammu News: एनसीबी की हिरासत में लिए बीएसएफ जवान की माैत पर आक्रोश, प्रदर्शन
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बीएसएफ के जवान के परिजन व ग्रामीण मार्ग बंद कर विरोध प्रदर्शन करते हुए
- फोटो : rs pura news
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आरएस पुरा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की हिरासत में पूछताछ के लिए पंजाब के अमृतसर ले जाए गए बीएसएफ काॅन्टेबल जसविंदर सिंह (34 वर्ष) की संदिग्ध हालात में माैत के बाद उनका शव शनिवार की रात करीब ढाई बजे गांव लाया गया। शव की हालत देखकर उनके परिवार और गांव के लोगों का सब्र टूट गया। रविवार सुबह सैकड़ों लोगों ने आरएस पुरा के दलजीत चाैक पर शव रखकर धरना-प्रदर्शन किया। देर रात मीरां साहिब पुलिस थाने में एनसीबी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
आरएस पुरा के न्यू दीवानगढ़ गांव के रहने वाले जसविंदर सिंह बीएसएफ की 42 बटालियन में तैनात थे और त्रिपुरा में ड्यूटी कर रहे थे। वे 5 फरवरी को एक महीने की छुट्टी पर अपने घर आए थे। तीन मार्च को एनसीबी ने जम्मू से घर जाते उन्हें मीरां साहिब इलाके से एक मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया था। इसके बाद उन्हें अमृतसर (पंजाब) ले जाया गया। 20 मार्च को परिवार के लोगों को उनकी माैत की सूचना दी गई।
शव गांव में पहुंचने की सूचना मिलते ही सैकड़ों लोग और सिख संगठन के सदस्य आरएस पुरा पहुंच गए। उन्होंने दलजीत चौक में शव को रखकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और एनसीबी के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि एनसीबी ने जसविंदर के साथ बर्बरता की हद पार की है। जवान के साथ थर्ड डिग्री का प्रयोग किया गया जिसकी पीड़ा न सहते हुए उनकी माैत हो गई।
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परिवार के लोगों ने शव पर लगे चोट के निशान भी दिखाए गए। उन्होंने कहा कि इतनी बर्बरता एनसीबी की जांच टीम बीएसएफ के जवान के साथ कैसे कर सकती है? प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि एनसीबी की जांच टीम को किसने अधिकार दिया कि वह एक जवान के साथ ऐसी बर्बरता करें कि उसकी जान चली जाए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने आरएस पुरा-जम्मू मार्ग पर जाम लगा दिया।
परिवार का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था। वह कई बार जम्मू में एनएसबी के कार्यालय में गए पर बात नहीं हो पाई । 20 मार्च की रात्रि परिजनों को एनसीबी की तरफ से फोन आया कि जसविंदर सिंह बीमार का बीपी लो है और उसे अमृतसर हॉस्पिटल में दाखिल करवाया गया है। बाद में पंचायत की पूर्व सरपंच रजनी चौधरी को फोन कॉल कर बताया गया कि जवान की इलाज के दौरान मौत हो गई है।
प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए एसडीएम आरएस पुरा अनुराधा ठाकुर, एसपी साउथ जम्मू अजय शर्मा और एसडीपीओ आरएस पुरा गुरमीत सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे परिजन व सिख सगठनों से बात कर इस मामले में न्याय होने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि मंडलायुक्त या जिला आयुक्त जम्मू से बात करने पर ही प्रदर्शन से हटेंगे और तभी शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। बाद में एडीसी जम्मू आरएस पुरा पहुंचीं।
अमृतसर में जान कैसे गई...पंजाब के जज की देखरेख में जांच भरोसा मिलने पर हुआ अंतिम संस्कार
स्थिति संभलती नहीं देख जम्मू की एडीसी अनुसूइया जम्वाल आरएस पुरा में पहुंची। उन्होंने प्रभावित परिवार को विश्वास दिलाया कि जो उनकी मांग है कि बीएसएफ काॅन्सटेबल जसविंदर को अगवा किया गया, इस संबंध में जांच कमेटी गठित करवाएंगे। दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। इस आश्वासन के बाद परिवार के लोग शांत हुए। अमृतसर में जसविंदर की कैसे जान चली गई, इसके लिए पंजाब के एक जज की देखरेख में जांच की जाएगी। इसके बाद शाम को जसविंदर सिंह का पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
न्यायिक जांच और आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग
परिवार की मांग है कि इस मामले की न्यायिक जांच हो और आरोपी एनसीबी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए।
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अचानक तबीयत बिगड़ने से हुई माैत : पंजाब पुलिस
अमृतसर। पंजाब के अमृतसर में मकबूलपुरा थाना के एसएचओ जगजीत सिंह ने कहा, जसविंदर को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से एक मामले के संबंध में पूछताछ के लिए लाया गया था। पूछताछ के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई जिससे उनकी मौत हो गई। जम्मू के आरएस पुरा के रहने वाले बीएसएफ जवान को नारकोटिक्स की टीम ने हिरासत में लिया था और पूछताछ के लिए अमृतसर लाया गया था। एजेंसी
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मां बोली-खींचकर ले गए मेरे बेटे को, पीट-पीटकर मार डाला
अपने बेटे का शव देख बिलख रही थी जसविंदर की मां गुरमीत
कहा- बेरहमी से पीटा गया, निजी अंगों को करंट दिया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। सड़क पर रखे शव को देख जसविंदर की मां गुरमीर काैर बार-बार बेसुध हो रही थी। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे को एनसीबी वाले तीन मार्च को गाड़ी से खींचकर ले गए। मैंने हाथ जोड़े लेकिन एनसीबी वाले नहीं माने और मुझे धक्का दिया गया। मेरे हाथ में चोट भी आई लेकिन वे नहीं माने। रोते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मेरे बेटे की पीट-पीटकर हत्या की गई है। उसे बेल्ट और जूतों से बेरहमी से पीटा गया जिससे उसकी मौत हो गई।
मां गुरमीत कौर ने बताया, मेरे बेटे का नाम जसविंदर सिंह था। वह बीएसएफ में कॉन्स्टेबल था। वह छुट्टी पर घर आया था। उसे 3 या 4 मार्च को वापस जाना था लेकिन 3 मार्च को नारकोटिक्स विभाग के लोग उसे उठा ले गए। 20 तारीख की रात को हमें फोन आया कि आपके बेटे की मौत हो गई है और हम आकर उसका शव ले जाएं।
कौर का कहना है कि उनके परिवार पर दुखों कर पहाड़ टूट पडा है। इसके लिए एनएसबी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने बेटे का शव देखा तो वह जगह-जगह नीला पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि जसविंदर के निजी अंगों को करंट लगाया गया है। उन्होनें विभाग के एक अधिकारी का नाम लेते कहा कि वह पहले दिन से बेटे पर दबाव बना रहा था, पर सच्चाई पर चलने वाले बेटे की जान ले ली। उन्होनें कहा कि जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलता वह अपना संघर्ष जारी रखेगी। प्रदर्शन में शामिल सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि एनसीबी जसविंदर सिंह के पीछे पड़ी थी।
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मासूम बेटे को देखकर हर शख्स की आंखें नम
धरने बैठे लोगों के बीच जसविंदर के चार साल के मासूम बेटे को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। बहन ने अपील की कि मेरा भाई देश की रक्षा करता था उसे देश के ही सिस्टम ने मार दिया। हमें मुआवजा नहीं इंसाफ चाहिए। पूर्व सैनिकों ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन देते हुए कहा कि यदि एक जवान के साथ ऐसा हो सकता है तो नागरिक अधिकारों का क्या होगा?
पत्नी बोली-मुझे मेरे पति से मिलने तक नहीं दिया
धरना स्थल पर अपने पति का तस्वीर लिए बैठी लवनीत काैर बार-बार दहाड़े मार-मारकर रो रही थी। वे बार-बार कह रही थीं कि हमें इंसाफ चाहिए। मेरे पति की क्या गलती थी। मेरे बेटे की क्या गलती थी। मुझे मेरे पति से मिलने तक नहीं दिया गया। एक इंस्पेक्टर का नाम लेते हुए वे बार-बार कह रही थीं कि मुझे मिलने के लिए बुलाया गया लेकिन मिलने नहीं दिया गया। कोऑपरेट करने के लिए कहा जा रहा था, काैन सा कोऑपरेट की बात कही जा रही थी, पता नहीं। मुझे उल्टे-सीधे सवाल किए गए। मेरा फोन मांगा गया। लवनीत ने कहा कि जिस प्रकार मेरे पति के साथ बर्बरता की गई है उससे दुखी हैं। एनसीबी के दोषी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए ताकि इंसाफ मिले। वह अपने दो वर्ष के बेटे को क्या जवाब देंगी कि देश की सेवा करने वाले पिता को दर्दनाक माैत दी गई।अब मैं इस बच्चे को क्या जवाब दूंगी? यह बड़ा होकर पूछेगा कि पापा कहां गए तो क्या कहूंगी कि उन्हें पुलिस ने मार दिया।
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आरएस पुरा के न्यू दीवानगढ़ गांव के रहने वाले जसविंदर सिंह बीएसएफ की 42 बटालियन में तैनात थे और त्रिपुरा में ड्यूटी कर रहे थे। वे 5 फरवरी को एक महीने की छुट्टी पर अपने घर आए थे। तीन मार्च को एनसीबी ने जम्मू से घर जाते उन्हें मीरां साहिब इलाके से एक मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया था। इसके बाद उन्हें अमृतसर (पंजाब) ले जाया गया। 20 मार्च को परिवार के लोगों को उनकी माैत की सूचना दी गई।
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शव गांव में पहुंचने की सूचना मिलते ही सैकड़ों लोग और सिख संगठन के सदस्य आरएस पुरा पहुंच गए। उन्होंने दलजीत चौक में शव को रखकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और एनसीबी के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि एनसीबी ने जसविंदर के साथ बर्बरता की हद पार की है। जवान के साथ थर्ड डिग्री का प्रयोग किया गया जिसकी पीड़ा न सहते हुए उनकी माैत हो गई।
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परिवार के लोगों ने शव पर लगे चोट के निशान भी दिखाए गए। उन्होंने कहा कि इतनी बर्बरता एनसीबी की जांच टीम बीएसएफ के जवान के साथ कैसे कर सकती है? प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि एनसीबी की जांच टीम को किसने अधिकार दिया कि वह एक जवान के साथ ऐसी बर्बरता करें कि उसकी जान चली जाए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने आरएस पुरा-जम्मू मार्ग पर जाम लगा दिया।
परिवार का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था। वह कई बार जम्मू में एनएसबी के कार्यालय में गए पर बात नहीं हो पाई । 20 मार्च की रात्रि परिजनों को एनसीबी की तरफ से फोन आया कि जसविंदर सिंह बीमार का बीपी लो है और उसे अमृतसर हॉस्पिटल में दाखिल करवाया गया है। बाद में पंचायत की पूर्व सरपंच रजनी चौधरी को फोन कॉल कर बताया गया कि जवान की इलाज के दौरान मौत हो गई है।
प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए एसडीएम आरएस पुरा अनुराधा ठाकुर, एसपी साउथ जम्मू अजय शर्मा और एसडीपीओ आरएस पुरा गुरमीत सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे परिजन व सिख सगठनों से बात कर इस मामले में न्याय होने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि मंडलायुक्त या जिला आयुक्त जम्मू से बात करने पर ही प्रदर्शन से हटेंगे और तभी शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा। बाद में एडीसी जम्मू आरएस पुरा पहुंचीं।
अमृतसर में जान कैसे गई...पंजाब के जज की देखरेख में जांच भरोसा मिलने पर हुआ अंतिम संस्कार
स्थिति संभलती नहीं देख जम्मू की एडीसी अनुसूइया जम्वाल आरएस पुरा में पहुंची। उन्होंने प्रभावित परिवार को विश्वास दिलाया कि जो उनकी मांग है कि बीएसएफ काॅन्सटेबल जसविंदर को अगवा किया गया, इस संबंध में जांच कमेटी गठित करवाएंगे। दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। इस आश्वासन के बाद परिवार के लोग शांत हुए। अमृतसर में जसविंदर की कैसे जान चली गई, इसके लिए पंजाब के एक जज की देखरेख में जांच की जाएगी। इसके बाद शाम को जसविंदर सिंह का पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
न्यायिक जांच और आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग
परिवार की मांग है कि इस मामले की न्यायिक जांच हो और आरोपी एनसीबी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए।
अचानक तबीयत बिगड़ने से हुई माैत : पंजाब पुलिस
अमृतसर। पंजाब के अमृतसर में मकबूलपुरा थाना के एसएचओ जगजीत सिंह ने कहा, जसविंदर को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से एक मामले के संबंध में पूछताछ के लिए लाया गया था। पूछताछ के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई जिससे उनकी मौत हो गई। जम्मू के आरएस पुरा के रहने वाले बीएसएफ जवान को नारकोटिक्स की टीम ने हिरासत में लिया था और पूछताछ के लिए अमृतसर लाया गया था। एजेंसी
मां बोली-खींचकर ले गए मेरे बेटे को, पीट-पीटकर मार डाला
अपने बेटे का शव देख बिलख रही थी जसविंदर की मां गुरमीत
कहा- बेरहमी से पीटा गया, निजी अंगों को करंट दिया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। सड़क पर रखे शव को देख जसविंदर की मां गुरमीर काैर बार-बार बेसुध हो रही थी। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे को एनसीबी वाले तीन मार्च को गाड़ी से खींचकर ले गए। मैंने हाथ जोड़े लेकिन एनसीबी वाले नहीं माने और मुझे धक्का दिया गया। मेरे हाथ में चोट भी आई लेकिन वे नहीं माने। रोते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मेरे बेटे की पीट-पीटकर हत्या की गई है। उसे बेल्ट और जूतों से बेरहमी से पीटा गया जिससे उसकी मौत हो गई।
मां गुरमीत कौर ने बताया, मेरे बेटे का नाम जसविंदर सिंह था। वह बीएसएफ में कॉन्स्टेबल था। वह छुट्टी पर घर आया था। उसे 3 या 4 मार्च को वापस जाना था लेकिन 3 मार्च को नारकोटिक्स विभाग के लोग उसे उठा ले गए। 20 तारीख की रात को हमें फोन आया कि आपके बेटे की मौत हो गई है और हम आकर उसका शव ले जाएं।
कौर का कहना है कि उनके परिवार पर दुखों कर पहाड़ टूट पडा है। इसके लिए एनएसबी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने बेटे का शव देखा तो वह जगह-जगह नीला पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि जसविंदर के निजी अंगों को करंट लगाया गया है। उन्होनें विभाग के एक अधिकारी का नाम लेते कहा कि वह पहले दिन से बेटे पर दबाव बना रहा था, पर सच्चाई पर चलने वाले बेटे की जान ले ली। उन्होनें कहा कि जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलता वह अपना संघर्ष जारी रखेगी। प्रदर्शन में शामिल सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि एनसीबी जसविंदर सिंह के पीछे पड़ी थी।
मासूम बेटे को देखकर हर शख्स की आंखें नम
धरने बैठे लोगों के बीच जसविंदर के चार साल के मासूम बेटे को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। बहन ने अपील की कि मेरा भाई देश की रक्षा करता था उसे देश के ही सिस्टम ने मार दिया। हमें मुआवजा नहीं इंसाफ चाहिए। पूर्व सैनिकों ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन देते हुए कहा कि यदि एक जवान के साथ ऐसा हो सकता है तो नागरिक अधिकारों का क्या होगा?
पत्नी बोली-मुझे मेरे पति से मिलने तक नहीं दिया
धरना स्थल पर अपने पति का तस्वीर लिए बैठी लवनीत काैर बार-बार दहाड़े मार-मारकर रो रही थी। वे बार-बार कह रही थीं कि हमें इंसाफ चाहिए। मेरे पति की क्या गलती थी। मेरे बेटे की क्या गलती थी। मुझे मेरे पति से मिलने तक नहीं दिया गया। एक इंस्पेक्टर का नाम लेते हुए वे बार-बार कह रही थीं कि मुझे मिलने के लिए बुलाया गया लेकिन मिलने नहीं दिया गया। कोऑपरेट करने के लिए कहा जा रहा था, काैन सा कोऑपरेट की बात कही जा रही थी, पता नहीं। मुझे उल्टे-सीधे सवाल किए गए। मेरा फोन मांगा गया। लवनीत ने कहा कि जिस प्रकार मेरे पति के साथ बर्बरता की गई है उससे दुखी हैं। एनसीबी के दोषी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए ताकि इंसाफ मिले। वह अपने दो वर्ष के बेटे को क्या जवाब देंगी कि देश की सेवा करने वाले पिता को दर्दनाक माैत दी गई।अब मैं इस बच्चे को क्या जवाब दूंगी? यह बड़ा होकर पूछेगा कि पापा कहां गए तो क्या कहूंगी कि उन्हें पुलिस ने मार दिया।