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मलबे के पहाड़ में दफन जिंदगियों की तलाश
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रामबन। पहाड़ का हिस्सा टूटकर नीचे गिरा तो उसने मलबे का नया पहाड़ बना दिया। वीरवार देर शाम तक जहां जोर शोर से काम चल रहा था, वहां आज भी चट्टानें तोड़ने वाली बड़ी-बड़ी मशीनों का शोर है। फर्क इतना है कि पहले सुरंग खोदी जा रही थी और अब जिंदगी खोजी जा रही है।
खूनी नाला क्षेत्र में सुरंग खोदते समय पहाड़ दरकने से मची तबाही के निशान हर तरफ नजर आ रहे हैं। पहाड़ के मलबे ने किसी की चीख तक बाहर नहीं आने दी। रेस्क्यू ऑपरेशन में कई टीमें लगी हुई हैं। कई लोग रेस्क्यू दलों का हौसला बढ़ाने पहुंच रहे हैं। उधर, प्रशासन की ओर से उन परिवारों तक सूचना पहुंचाई जा रही है, जिनके अपने मलबे के नीचे दब गए हैं। शुक्रवार शाम को मलबे में दबने वालों के नाम सामने आए। इसके बाद एक-एक कर इन परिवारों को सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हुई। मलबे में दबने वालों के परिवार बहुत दूरी पर हैं। दो लोग स्थानीय हैं, जिनके घर रामबन में ही उच्च पर्वतीय इलाके में हैं। अन्य आठ में पश्चिम बंगाल और नेपाल तक के मजदूर शामिल हैं जो खूनी नाला में सुरंग निर्माण के लिए आए थे। अब मौके पर सैकड़ों की भीड़ जुटी है। मशीनें लगाई गई हैं। फुट दर फुट मलबे में आगे बढ़ने की इस जद्दोजहद के बीच जिंदगियों के बचने की उम्मीद कब पूरी तरह से टूट जाए, कहा नहीं जा सकता। वीरवार देर रात शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन चौबीस घंटे बीतने के बाद भी असहाय नजर आ रहा है।
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सुरंग निर्माण पर सवाल, न्यायिक जांच की मांग
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर रामबन जिले में बन रहीं सुरंगें सबसे चुनौतीपूर्ण हैं। यहां सबसे ज्यादा भूस्खलन होता है। सुरंग निर्माण के दौरान पहाड़ दरकने की घटना पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट अरुण सिंह राजू ने कहा कि संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों में सुरंग के निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि सुरंग निर्माण में लापरवाही को लेकर कई विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, इसके बावजूद कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। खूनी नाला सुरंग निर्माण करने वाली एजेंसी ने निर्धारित मानकों पर अमल किया होता तो पहाड़ भले ही दरकता, एक साथ इतने ज्यादा जिंदगियां दफन न होतीं। उन्होंने पूरी घटना की न्यायिक जांच की मांग उठाई।
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खूनी नाला क्षेत्र में सुरंग खोदते समय पहाड़ दरकने से मची तबाही के निशान हर तरफ नजर आ रहे हैं। पहाड़ के मलबे ने किसी की चीख तक बाहर नहीं आने दी। रेस्क्यू ऑपरेशन में कई टीमें लगी हुई हैं। कई लोग रेस्क्यू दलों का हौसला बढ़ाने पहुंच रहे हैं। उधर, प्रशासन की ओर से उन परिवारों तक सूचना पहुंचाई जा रही है, जिनके अपने मलबे के नीचे दब गए हैं। शुक्रवार शाम को मलबे में दबने वालों के नाम सामने आए। इसके बाद एक-एक कर इन परिवारों को सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हुई। मलबे में दबने वालों के परिवार बहुत दूरी पर हैं। दो लोग स्थानीय हैं, जिनके घर रामबन में ही उच्च पर्वतीय इलाके में हैं। अन्य आठ में पश्चिम बंगाल और नेपाल तक के मजदूर शामिल हैं जो खूनी नाला में सुरंग निर्माण के लिए आए थे। अब मौके पर सैकड़ों की भीड़ जुटी है। मशीनें लगाई गई हैं। फुट दर फुट मलबे में आगे बढ़ने की इस जद्दोजहद के बीच जिंदगियों के बचने की उम्मीद कब पूरी तरह से टूट जाए, कहा नहीं जा सकता। वीरवार देर रात शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन चौबीस घंटे बीतने के बाद भी असहाय नजर आ रहा है।
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सुरंग निर्माण पर सवाल, न्यायिक जांच की मांग
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर रामबन जिले में बन रहीं सुरंगें सबसे चुनौतीपूर्ण हैं। यहां सबसे ज्यादा भूस्खलन होता है। सुरंग निर्माण के दौरान पहाड़ दरकने की घटना पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट अरुण सिंह राजू ने कहा कि संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों में सुरंग के निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि सुरंग निर्माण में लापरवाही को लेकर कई विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, इसके बावजूद कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। खूनी नाला सुरंग निर्माण करने वाली एजेंसी ने निर्धारित मानकों पर अमल किया होता तो पहाड़ भले ही दरकता, एक साथ इतने ज्यादा जिंदगियां दफन न होतीं। उन्होंने पूरी घटना की न्यायिक जांच की मांग उठाई।
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