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जम्मू-कश्मीर : पहले रोज होते थे बम धमाके, अब एलओसी के पास पुंछ के गांवों में सुनाई देने लगी शहनाई
Wed, 14 Apr 2021 01:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, पुंछ
अमर उजाला नेटवर्क, पुंछ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 14 Apr 2021 01:10 AM IST
सार
- संघर्षविराम के चलते अब बरसों बाद पाकिस्तानी चौकियों के सामने धूमधाम से आयोजित हो रहे हैं वैवाहिक समारोह
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- फोटो : istock
विस्तार
भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के पास गांव में जहां वर्षों से अक्सर पाकिस्तानी सेना की तरफ से की जाने वाली गोलाबारी के चलते दिन रात बम धमाके सुनाई देते थे, अब उन गांव में ढोल और शहनाई की धुनें सुनाई देने लगी हैं।
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नियंत्रण रेखा पर शांति का माहौल बहाल होने से गांव गगड़िया निवासी मुंबई में पले बढ़े परवेज अहमद एवं तरन्नुम के परिवारवाले शादी के लिए विशेष तौर पर पैतृक गांव लौटे और सोमवार को धूमधाम से ढोल बाजों के साथ डेढ़ सौ लोगों की बरात लेकर परवेज अहमद तरन्नुम के घर पहुंचे। अपने रीति रिवाज के साथ निकाह के बाद तरन्नुम को डोली में बिठा कर घर लाए।
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मुंबई से विशेष तौर पर गांव में शादी करने पहुंचे इस जोड़े का कहना है कि हम लोग मुंबई से अकसर गांव आया करते थे, लेकिन यहां हर समय होने वाली गोलाबारी के कारण घुटन महसूस होती थी। कुछ समय पहले हमें पता चला कि नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम होने के बाद गांव में शांति है। इस पर घर वालों और हमने गांव में शादी का आयोजन करने का फैसला किया। आज हम काफी खुश हैं।
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समारोह के दौरान की जाती थी गोलाबारी
ग्रामीण बशीर अहमद, नजीर बट्ट, गुलाम अहमद बट्ट ने कहा कि सावजियां, गगड़ियां, छूल और गली मैदान जैसे गांव में कई वर्षों से लोग घरों में शादी ब्याह सहित कोई बड़ा आयोजन नहीं कर पा रहे थे। इन गांवों में किसी भी तरह के आयोजन पर पाकिस्तानी सेना की तरफ से गोलाबारी शुरू कर दी जाती थी। इसके चलते जहां कुछ लोग घरों के अंदर ही सादगी से दस बीस रिश्तेदारों के सामने बच्चों के निकाह पढ़वा कर शादियां कर लिया करते थे।
जिन लोगों की आर्थिक स्थित अच्छी थी, वह गांव से बाहर सुरक्षित स्थान वाले गांव में रिश्तेदारों के यहां बच्चों के शाही समारोह आयोजित कर लिया करते थे। गांव में शाही ब्याह में ढोल बाजे शहनाइयां बजाना तो दूर की बात है। लोगों द्वारा अपनी घास एवं फसलों की कटाई के समय ढोल बजाने की परंपरा तक को छोड़ दिया था। अब इन गांव में दशकों बाद फिर से पहले की तरह लोग घरों में बच्चों के शादी समारोह आयोजित करने लगे हैं। यहां रात के समय भी सैकड़ों लोग एकत्र होकर ढोल, बाजों एवं शहनाई की धुन पर नाचते हुए मौजमस्ती करते और दावतें करते हैं। अभी पांच दिन पहले भी गांव सावजियां में गुलाम अहमद बट्ट के बेटे की शादी हुई।
गौरतलब है कि नियंत्रण रेखा पर बगयालदरा के कलसां गांव में सात वर्ष पूर्व एक विवाह समारोह के दौरान पाकिस्तानी सेना की तरफ से की गई गोलाबारी में 21 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी। इसके बाद जिले में नियंत्रण रेखा के करीबी गांव में लोगों की तरफ से शादी ब्याह सहित सभी प्रकार के समारोह आयोजित करने बंद कर दिए थे। अब नियंत्रण संघर्ष विराम को सही प्रकार लागू किया जाने से नियंत्रण रेखा के गांव में फिर से पुराने दिन लौटने लगे हैं।