फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu kashmir news

Jammu News: गेंदे की जैविक खेती से बिश्नाह के किसान ने दिखाई समृद्धि की राह

विज्ञापन
jammu kashmir news
गेंदे की फसल की देखभाल करते श्याम सिंह। - फोटो : bishnah news
बिश्नाह। सिकंदरपुर के किसान श्याम सिंह ने गेंदे और जैविक सब्जियों की खेती से किसानों को समृद्धि की राह दिखाई है। जहां खेती में अधिकतम पैदावार लेने के लिए फर्टिलाइजर और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग की होड़ लगी है, वहीं श्याम सिंह जैविक खेती के जरिए सेहत और समृद्धि दोनों का संदेश दे रहे हैं।
विज्ञापन

12वीं पास श्याम सिंह को पारंपरिक खेती से हटकर व्यावसायिक खेती करने की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात से मिली। पीएम ने किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर व्यावसायिक खेती की ओर अग्रसर होने की सलाह दी थी। श्याम सिंह बताते हैं कि आम किसानों की तरह वह भी गेहूं, धान की पारंपरिक खेती करते थे लेकिन पीएम के उस उद्बोधन के बाद दो साल पहले प्रयोग के तौर पर गेंदे की व्यावसायिक खेती शुरू की। इसके साथ वर्मीकल्चर का काम शुरू किया। इससे खेती की लागत कम हुई और हमारे पैदावार की अच्छी कीमत भी मिलने लगी। जैविक खाद सब्जियों और अनाज में ज्यादा प्रयोग करते हैं। इससे आर्थिक संकट का दौर खत्म हुआ और खेती लाभप्रद होने लगी है।
विज्ञापन


श्याम सिंह पिछले दो साल से गेंदे की खेती कर रहे हैं। बताते हैं, कृषि विभाग के सहयोग से 2023 में उन्होंने ढाई एकड़ जमीन में गेंदे की खेती शुरू की। पहले साल सारी लागत निकलने के बाद एक लाख रुपये की बचत हुई। इस बदलाव का अनुभव अच्छा था। अब गेंदे की खेती बड़े पैमाने पर शुरू करने का इरादा है। गेंदे के साथ जैविक सब्जियों की खेती से आमदनी का स्रोत निरंतर बना रहता है। गेंदे का सीजन मंदा हुआ तो सब्जी संभाल लेती है और सब्जी मंदी हुई तो गेंदे से कमी पूरी हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

गेंदे की खेती की लागत

गेंदे की खेती के लिए प्रति एकड़ 48000 रुपये लागत आती है। आमदनी एक से सवा लाख रुपये हो जाती है। श्याम सिंह ने बताया कि इस बार भी उन्होंने ढाई एकड़ में गेंदे की खेती की है और उन्हें करीब तीन लाख रुपये फायदा होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती में इतनी आमदनी संभव नहीं है। श्याम सिंह कहते हैं कि गेहूं और धान की फसल एकमुश्त रकम पर आधारित होती है। उचित मूल्य के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। उसमें भी उचित मूल्य मिल ही जाएगा यह निश्चित नहीं होता। ऐसे में आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है। गेंदे की खेती से अब हर दिन उनके पास पैसे का फ्लो बना रहता है।
गेंदे के फूलों की कीमत में उतार-चढ़ाव आता रहता है। वैवाहिक समारोह, त्योहारों पर ये फूल 150 रुपये प्रति किलो तक बिक जाते हैं। सामान्य दिनों में 40 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच कीमत मिल ही जाती है। फूल बेचने के लिए स्थायी तौर पर व्यापारी से भी संपर्क कायम है। फूलों की डिलीवरी देने के साथ ही नकद पैसे मिल जाते हैं। बिश्नाह और जम्मू के व्यापारी इन फूलों के स्थायी ग्राहक हैं।

ऐसे तैयार करते हैं जमीन
श्याम सिंह ने पहले साल के मुकाबले दूसरे साल गेंदे की खेती में और अच्छा सुधार किया है। उन्होंने बताया कि गेंदे की बिजाई करने से पहले चार से पांच बार रोटावेटर से जमीन की जुताई कराई जाती है। पगडंडी की चौड़ाई पहले के मुकाबले कम की है, जिससे पौधों की सिंचाई पर्याप्त रूप से हो जाती है।

पंजाब से मंगवाते हैं बीज

श्याम सिंह गेंदे के बीज जम्मू और पंजाब से मंगवाते हैं। उसके बाद पॉली हाउस में गेंदे की पनीरी (नर्सरी) तैयार करते हैं। पनीरी तैयार होने के बाद खेत में गेंदे की बिजाई की जाती है। साल में दो बार गेंदे की बिजाई करते हैं।


कोट
फूलों की खेती व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने की योजना पर आधारित है। एचएडीपी के तहत किसानों को योजना के साथ जोड़ा जा रहा है। फूलों की पैदावार से लेकर मार्केटिंग तक में किसानों की मदद की जाती है। गेंदे के बीज पर सब्सिडी मुहैया कराई जाती है। व्यापारिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए किसानों को सब्सिडी पर फ्रीजर वाहन उपलब्ध करवाए जाते हैं। गेंदे की खेती से किसान अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।
सुरेंद्र गुप्ता, सबडिविजनल एग्रीकल्चर ऑफिसर, आरएस पुरा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed