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Jammu News: जम्मू की सरकार बनाने का दांव खाली, भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग लड़खड़ाया
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जम्मू। अनुच्छेद 370 व 35ए की बेड़ियों से जम्मू-कश्मीर को आजादी दिलाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में पहली सरकार बनाने के भाजपा के सपनों को न केवल झटका लगा है, बल्कि अपने बलबूते पहली बार जम्मू की सरकार बनाने का पार्टी का दांव भी खाली चला गया। दस साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला भी लड़खड़ाता दिखा और पार्टी 33 सीटों के अनुमान से पीछे रह गई।
भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत पहली बार जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) को राजनीतिक आरक्षण देते हुए विधानसभा की नौ सीटें आरक्षित कीं। पहले से ही अनुसूचित जाति (एससी) के लिए सात सीटें आरक्षित थीं, जिसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया। पहली बार भाजपा ने पहाड़ी समुदाय के 40 साल के आंदोलन से सरोकार रखते हुए पहाड़ियों को एसटी का दर्जा दिया। पहाड़ियों को आरक्षण मिलने के बाद यह प्रचारित किया गया कि गुज्जरों के आरक्षण पर डाका पड़ जाएगा। उनके हक में कटौती होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सरकार ने विश्वास बहाली के लिए गुज्जर-बकरवालों को मिल रहे 10 फीसदी आरक्षण से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करते हुए पहाड़ी समुदाय को भी इनके बराबर अतिरिक्त 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया। ओबीसी समाज का आरक्षण दोगुना करते हुए चार से आठ फीसदी कर दिया गया। हालांकि, यह समाज इससे नाखुश रहा। उनकी मांग रही कि मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर अन्य राज्यों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए। विधानसभा चुनाव में ओबीसी समाज की यह नाराजगी भी देखने को मिली।
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पहाड़ी आरक्षण के बाद भी भाजपा
को पीर पंजाल में जोरदार झटका
भाजपा को तमाम जतन के बाद भी पीर पंजाल में जोरदार झटका लगा। राजोरी-पुंछ की आठ में एसटी के लिए आरक्षित पांच सीटों पर भी भाजपा करिश्मा नहीं कर सकी। इन दोनों जिलों की सात सीटें पार्टी हार गई, जबकि भाजपा को यहां से चार से पांच सीटों की उम्मीद थी। एकमात्र सीट कालाकोट-सुंदरबनी से ही संतोष करना पड़ा। यहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना को भी करारी हार का सामना करना पड़ा। 2014 में भाजपा को पीर पंजाल से नौशेरा तथा कालाकोट सीट मिली थी, लेकिन इस बार एक सीट का नुकसान उठाना पड़ा। खास बात यह रही कि पहाड़ी समुदाय को पहली बार भाजपा ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया था और उसे उम्मीद थी कि पहाड़ी समुदाय भाजपा का साथ देगा। गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की रैलियां भी काम नहीं आईं।
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चिनाब वैली में पिछला प्रदर्शन बरकरार
चिनाब वैली की आठ सीटों पर पार्टी पिछला प्रदर्शन करने में कामयाब रही। 2014 में पार्टी को डोडा, किश्तवाड़ व रामबन की छह में चार सीटों किश्तवाड़, डोडा, रामबन व भद्रवाह में कामयाबी मिली थी। परिसीमन में डोडा व किश्तवाड़ में एक-एक सीटें बढ़ाई गईं तो यहां आठ सीटें हो गईं। यहां किश्तवाड़ व डोडा जिले की दो-दो सीटें जीतने में पार्टी सफल रही। रामबन की सीट उसे गंवानी पड़ी। रामबन से 2014 में भाजपा के नीलम लंगेह चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार अनारक्षित होने के बाद टिकट बदल दिया गया।
भाजपा के स्टार प्रचारकों ने झोंकी थी ताकत
भाजपा के स्टार प्रचारकों ने तीन चरणों में हुए चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोडा, श्रीनगर, कटड़ा व जम्मू में चार रैलियां की थीं। जम्मू से अबकी बार जम्मू की सरकार का नारा जोरशोर से उछाला गया था। गृहमंत्री अमित शाह ने किश्तवाड़, रामबन, राजोरी, पुंछ, जम्मू, उधमपुर, कठुआ में रैलियां कर हुंकार भरी। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी गुरेज, रामबन, राजोरी, पुंछ, कठुआ, जम्मू में रैलियां कीं। इसी प्रकार पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रोड शो किया तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी व अनुराग ठाकुर, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव व तरुण चुघ, चुनाव प्रभारी जी किशन रेड्डी आदि ने पार्टी को जीत दिलाने के लिए कमर कसी।
एससी सीटों पर कायम रहा जादू
एससी सीटों पर भाजपा का जादू कायम रहा। सभी सात सीटों उधमपुर के रामनगर, सांबा के रामगढ़, जम्मू के बिश्नाह, सुचेतगढ़, मढ़, अखनूर, कठुआ पर भाजपा को जीत मिली और अनुसूचित जाति के बीच पार्टी की मजबूत पकड़ बनी रही। 2014 के चुनाव में भी पार्टी ने सभी सात सीटें जीती थीं। हालांकि, परिसीमन में पिछली आरक्षित सीटों पर रोटेशन हुआ और नई सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गईं। भाजपा के लिए यह सभी सात सीटें महत्वपूर्ण साबित हुईं।
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श्री माता वैष्णो देवी प्रतिष्ठापरक सीट पर बची साख
परिसीमन में अध्यात्म का केंद्र श्री माता वैष्णो देवी के नाम पर नई सीट बनाई गई थी। यहां टिकट बंटवारे के बाद भाजपा ने टिकट बदल दिया था। इससे बगावत के सुर उठे थे, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने डैमेज कंट्रोल करते हुए स्थिति पर नियंत्रण कर लिया था। पार्टी ने पूर्व विधायक बलदेव राज शर्मा को टिकट दिया और वह भाजपा की झोली में सीट डालने में कामयाब रहे। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की अयोध्या सीट हारने के बाद पार्टी के लिए पहली बार बनी यह सीट जीतना पार्टी के लिए काफी अहम था।
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टिकट बंटवारे से उभरी नाराजगी भी भाजपा को पड़ी भारी
भाजपा की राह में संगठनात्मक चूक भी आड़े आई। टिकट बंटवारे से उपजी नाराजगी भाजपा को भारी पड़ी। पार्टी की ओर से टिकट घोषित करने के बाद जम्मू के जम्मू उत्तर व छंब, रियासी के श्री माता वैष्णो देवी, उधमपुर के रामनगर में विरोध प्रदर्शन हुए। छंब में तो कई दिनों तक प्रदर्शन चलता रहा और अंतत: पार्टी के खिलाफ नरिंदर सिंह भाऊ ने ताल ठोक दी। नतीजा निकला कि पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा। अन्य सीटों पर पार्टी ने डैमेज कंट्रोल कर नाराज नेताओं को मना लिया। उधमपुर में भाजपा के प्रदेश सचिव पवन खजूरिया ने टिकट न मिलने से नाराज होकर न केवल पार्टी छोड़ी, बल्कि पार्टी प्रत्याशी आरएस पठानिया के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए। हालांकि, पठानिया जीतने में कामयाब रहे। रामबन में टिकट न मिलने से नाराज पार्टी के जिला पदाधिकारी सूरज सिंह परिहार ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोकी और यहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
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भाजपा का मत प्रतिशत
वर्ष मत प्रतिशत चुनाव लड़े जीते
1987 5.10 29 02
1996 12.13 53 08
2002 8.57 58 01
2008 12.45 64 11
2014 22.98 75 25
2024 25.73 61 29 (यह आंकड़ा बदलेगा)
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भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत पहली बार जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) को राजनीतिक आरक्षण देते हुए विधानसभा की नौ सीटें आरक्षित कीं। पहले से ही अनुसूचित जाति (एससी) के लिए सात सीटें आरक्षित थीं, जिसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया। पहली बार भाजपा ने पहाड़ी समुदाय के 40 साल के आंदोलन से सरोकार रखते हुए पहाड़ियों को एसटी का दर्जा दिया। पहाड़ियों को आरक्षण मिलने के बाद यह प्रचारित किया गया कि गुज्जरों के आरक्षण पर डाका पड़ जाएगा। उनके हक में कटौती होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। सरकार ने विश्वास बहाली के लिए गुज्जर-बकरवालों को मिल रहे 10 फीसदी आरक्षण से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करते हुए पहाड़ी समुदाय को भी इनके बराबर अतिरिक्त 10 प्रतिशत का आरक्षण दिया। ओबीसी समाज का आरक्षण दोगुना करते हुए चार से आठ फीसदी कर दिया गया। हालांकि, यह समाज इससे नाखुश रहा। उनकी मांग रही कि मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर अन्य राज्यों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए। विधानसभा चुनाव में ओबीसी समाज की यह नाराजगी भी देखने को मिली।
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पहाड़ी आरक्षण के बाद भी भाजपा
को पीर पंजाल में जोरदार झटका
भाजपा को तमाम जतन के बाद भी पीर पंजाल में जोरदार झटका लगा। राजोरी-पुंछ की आठ में एसटी के लिए आरक्षित पांच सीटों पर भी भाजपा करिश्मा नहीं कर सकी। इन दोनों जिलों की सात सीटें पार्टी हार गई, जबकि भाजपा को यहां से चार से पांच सीटों की उम्मीद थी। एकमात्र सीट कालाकोट-सुंदरबनी से ही संतोष करना पड़ा। यहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना को भी करारी हार का सामना करना पड़ा। 2014 में भाजपा को पीर पंजाल से नौशेरा तथा कालाकोट सीट मिली थी, लेकिन इस बार एक सीट का नुकसान उठाना पड़ा। खास बात यह रही कि पहाड़ी समुदाय को पहली बार भाजपा ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया था और उसे उम्मीद थी कि पहाड़ी समुदाय भाजपा का साथ देगा। गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की रैलियां भी काम नहीं आईं।
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चिनाब वैली की आठ सीटों पर पार्टी पिछला प्रदर्शन करने में कामयाब रही। 2014 में पार्टी को डोडा, किश्तवाड़ व रामबन की छह में चार सीटों किश्तवाड़, डोडा, रामबन व भद्रवाह में कामयाबी मिली थी। परिसीमन में डोडा व किश्तवाड़ में एक-एक सीटें बढ़ाई गईं तो यहां आठ सीटें हो गईं। यहां किश्तवाड़ व डोडा जिले की दो-दो सीटें जीतने में पार्टी सफल रही। रामबन की सीट उसे गंवानी पड़ी। रामबन से 2014 में भाजपा के नीलम लंगेह चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार अनारक्षित होने के बाद टिकट बदल दिया गया।
भाजपा के स्टार प्रचारकों ने झोंकी थी ताकत
भाजपा के स्टार प्रचारकों ने तीन चरणों में हुए चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोडा, श्रीनगर, कटड़ा व जम्मू में चार रैलियां की थीं। जम्मू से अबकी बार जम्मू की सरकार का नारा जोरशोर से उछाला गया था। गृहमंत्री अमित शाह ने किश्तवाड़, रामबन, राजोरी, पुंछ, जम्मू, उधमपुर, कठुआ में रैलियां कर हुंकार भरी। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी गुरेज, रामबन, राजोरी, पुंछ, कठुआ, जम्मू में रैलियां कीं। इसी प्रकार पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रोड शो किया तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी व अनुराग ठाकुर, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव व तरुण चुघ, चुनाव प्रभारी जी किशन रेड्डी आदि ने पार्टी को जीत दिलाने के लिए कमर कसी।
एससी सीटों पर कायम रहा जादू
एससी सीटों पर भाजपा का जादू कायम रहा। सभी सात सीटों उधमपुर के रामनगर, सांबा के रामगढ़, जम्मू के बिश्नाह, सुचेतगढ़, मढ़, अखनूर, कठुआ पर भाजपा को जीत मिली और अनुसूचित जाति के बीच पार्टी की मजबूत पकड़ बनी रही। 2014 के चुनाव में भी पार्टी ने सभी सात सीटें जीती थीं। हालांकि, परिसीमन में पिछली आरक्षित सीटों पर रोटेशन हुआ और नई सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गईं। भाजपा के लिए यह सभी सात सीटें महत्वपूर्ण साबित हुईं।
श्री माता वैष्णो देवी प्रतिष्ठापरक सीट पर बची साख
परिसीमन में अध्यात्म का केंद्र श्री माता वैष्णो देवी के नाम पर नई सीट बनाई गई थी। यहां टिकट बंटवारे के बाद भाजपा ने टिकट बदल दिया था। इससे बगावत के सुर उठे थे, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने डैमेज कंट्रोल करते हुए स्थिति पर नियंत्रण कर लिया था। पार्टी ने पूर्व विधायक बलदेव राज शर्मा को टिकट दिया और वह भाजपा की झोली में सीट डालने में कामयाब रहे। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की अयोध्या सीट हारने के बाद पार्टी के लिए पहली बार बनी यह सीट जीतना पार्टी के लिए काफी अहम था।
टिकट बंटवारे से उभरी नाराजगी भी भाजपा को पड़ी भारी
भाजपा की राह में संगठनात्मक चूक भी आड़े आई। टिकट बंटवारे से उपजी नाराजगी भाजपा को भारी पड़ी। पार्टी की ओर से टिकट घोषित करने के बाद जम्मू के जम्मू उत्तर व छंब, रियासी के श्री माता वैष्णो देवी, उधमपुर के रामनगर में विरोध प्रदर्शन हुए। छंब में तो कई दिनों तक प्रदर्शन चलता रहा और अंतत: पार्टी के खिलाफ नरिंदर सिंह भाऊ ने ताल ठोक दी। नतीजा निकला कि पार्टी को यहां हार का सामना करना पड़ा। अन्य सीटों पर पार्टी ने डैमेज कंट्रोल कर नाराज नेताओं को मना लिया। उधमपुर में भाजपा के प्रदेश सचिव पवन खजूरिया ने टिकट न मिलने से नाराज होकर न केवल पार्टी छोड़ी, बल्कि पार्टी प्रत्याशी आरएस पठानिया के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए। हालांकि, पठानिया जीतने में कामयाब रहे। रामबन में टिकट न मिलने से नाराज पार्टी के जिला पदाधिकारी सूरज सिंह परिहार ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ताल ठोकी और यहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा का मत प्रतिशत
वर्ष मत प्रतिशत चुनाव लड़े जीते
1987 5.10 29 02
1996 12.13 53 08
2002 8.57 58 01
2008 12.45 64 11
2014 22.98 75 25
2024 25.73 61 29 (यह आंकड़ा बदलेगा)