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नेकां का प्रभारी घोषित करना पीएजीडी में फूट की ओर इशारा
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जम्मू। नेशनल कांफ्रेंस की ओर से कश्मीर की सभी 47 विधानसभा सीटों पर प्रभारी घोषित करना गुपकार गठबंधन (पीएजीडी) में फूट की ओर संकेत माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि अगला विधानसभा चुनाव गठबंधन के सभी दल अलग-अलग लड़ सकते हैं। पहले भी नेकां उपाध्यक्ष औऱ पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। दूसरा संकेत यह भी माना जा रहा है कि पार्टी ने आगामी चुनाव में घोषित इन प्रभारियों पर ही दांव लगाने का मन बनाया है। पहले भी ज्यादातर सीटों पर प्रभारियों पर ही पार्टी ने दांव आजमाया है। हालांकि, नेकां का कहना है कि टिकट का फैसला संसदीय समिति की बैठक में होता है। प्रभारियों की घोषणा तो मात्र पार्टी को सक्रिय करने की दृष्टि से है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रभारियों की घोषणा के कई मायने हैं। एक तो यह कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। चुनाव की घोषणा होने के साथ ही गठबंधन बखर सकता है। दूसरा यह कि नेकां अभी से चुनाव में अपने संभावित उम्मीदवारों को प्रभारी का दायित्व सौंपकर उन्हें क्षेत्र को मजबूत करने का संकेत दे चुकी है। जानकार यह भी मानते हैं कि नेकां आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर काफी गंभीर है। वह इसी हिसाब से रणनीति भी बना रही है ताकि वोट बैंक में बिखराव न हो। कश्मीर केंद्रित पार्टियां मुस्लिम वोट बैंक को काटने में सफल न हो सकें। गुलाम नबी आजाद की नई पार्टी से मिलने वाली चुनौती से भी निपटने की रणनीति के तहत यह नियुक्ति मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि कश्मीर की 47 सीटों में से ज्यादातर सीटों पर नेकां कब्जा करने के लिए संघर्ष कर रही है क्योंकि जम्मू संभाग में पार्टी का प्रदर्शन कश्मीर की तरह नहीं हो सकता। इसलिए पूरा जोर कश्मीर पर ही है।
नेकां प्रवक्ता का कहना है कि यह सामान्य प्रक्रिया है। पहले भी पार्टी ने विधानसभा चुनाव प्रभारी घोषित किए हैं। चूंकि परिसीमन के बाद कुछ सीटें बढ़ी हैं और इलाके इधर से उधर हुए हैं। इस वजह से नए सिरे से प्रभारी घोषित किए गए हैं। आने वाले दिनों में जम्मू संभाग में भी प्रभारी बनाए जा सकते हैं। इसका चुनाव से कोई लेना देना नहीं है।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रभारियों की घोषणा के कई मायने हैं। एक तो यह कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। चुनाव की घोषणा होने के साथ ही गठबंधन बखर सकता है। दूसरा यह कि नेकां अभी से चुनाव में अपने संभावित उम्मीदवारों को प्रभारी का दायित्व सौंपकर उन्हें क्षेत्र को मजबूत करने का संकेत दे चुकी है। जानकार यह भी मानते हैं कि नेकां आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर काफी गंभीर है। वह इसी हिसाब से रणनीति भी बना रही है ताकि वोट बैंक में बिखराव न हो। कश्मीर केंद्रित पार्टियां मुस्लिम वोट बैंक को काटने में सफल न हो सकें। गुलाम नबी आजाद की नई पार्टी से मिलने वाली चुनौती से भी निपटने की रणनीति के तहत यह नियुक्ति मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि कश्मीर की 47 सीटों में से ज्यादातर सीटों पर नेकां कब्जा करने के लिए संघर्ष कर रही है क्योंकि जम्मू संभाग में पार्टी का प्रदर्शन कश्मीर की तरह नहीं हो सकता। इसलिए पूरा जोर कश्मीर पर ही है।
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नेकां प्रवक्ता का कहना है कि यह सामान्य प्रक्रिया है। पहले भी पार्टी ने विधानसभा चुनाव प्रभारी घोषित किए हैं। चूंकि परिसीमन के बाद कुछ सीटें बढ़ी हैं और इलाके इधर से उधर हुए हैं। इस वजह से नए सिरे से प्रभारी घोषित किए गए हैं। आने वाले दिनों में जम्मू संभाग में भी प्रभारी बनाए जा सकते हैं। इसका चुनाव से कोई लेना देना नहीं है।
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