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मां वैष्णो देवी में मची भगदड़ मामले में जवाब के लिए सरकार को एक महीने का समय
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जम्मू। माता वैष्णो देवी दरबार में साल के पहले दिन एक जनवरी को मची भगदड़ में 12 श्रद्धालुओं की मौत की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने संबंधी पीआईएल में जम्मू कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने सरकार को एक महीने में सरकार को जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति सिंधू शर्मा की पीठ ने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, उप राज्यपाल के प्रमुख सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह तथा एडीजीपी जम्मू को यह निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता शेख शकील, डिवकॉम जम्मू, रियासी के एसएसपी तथा एसडीपीओ व एसएचओ भवन से भी जवाब दाखिल करने को कहा है। अधिवक्ता की ओर से दाखिल पीआईएल में अधिवक्ताओं की दलीलें सुनी गई। सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) रमन शर्मा ने दिशा निर्देश प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इस आधार पर कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए एएजी को एक महीने का समय दिया। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता एवी गुप्ता व एचए सिद्दीकी ने कहा कि पीआईएल लोक महत्व का है जिसमें कहा गया है कि श्राइन बोर्ड के अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से 12 श्रद्धालुओं की जान चली गई। अधिकारी अपनी ड्यूटी को पूरा करने में विफल रहे। दुर्भाग्य से अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई। उप राज्यपाल तथा श्राइन बोर्ड के चेयरमैन ने घटना के कारणों की जांच करने तथा लापरवाही तय करने के लिए प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में एक जनवरी को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।
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मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति सिंधू शर्मा की पीठ ने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, उप राज्यपाल के प्रमुख सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह तथा एडीजीपी जम्मू को यह निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता शेख शकील, डिवकॉम जम्मू, रियासी के एसएसपी तथा एसडीपीओ व एसएचओ भवन से भी जवाब दाखिल करने को कहा है। अधिवक्ता की ओर से दाखिल पीआईएल में अधिवक्ताओं की दलीलें सुनी गई। सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) रमन शर्मा ने दिशा निर्देश प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इस आधार पर कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए एएजी को एक महीने का समय दिया। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता एवी गुप्ता व एचए सिद्दीकी ने कहा कि पीआईएल लोक महत्व का है जिसमें कहा गया है कि श्राइन बोर्ड के अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से 12 श्रद्धालुओं की जान चली गई। अधिकारी अपनी ड्यूटी को पूरा करने में विफल रहे। दुर्भाग्य से अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई। उप राज्यपाल तथा श्राइन बोर्ड के चेयरमैन ने घटना के कारणों की जांच करने तथा लापरवाही तय करने के लिए प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में एक जनवरी को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।
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