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टारगेट किलिंग रोकने को बनी रणनीति, चार-पांच दिन पंडितों को मूवमेंट न करने को कहा

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jammu kashmir news
जम्मू। कश्मीर में एक महीने से भी कम समय में लगातार हो रही रही टारगेट किलिंग और सात मई से अब तक नौ लोगों को निशाना बनाए जाने से फैली दहशत से आम लोगों में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए प्रशासन ने कमर कसी है। टारगेट किलिंग को रोकने की रणनीति बनाते हुए घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडितों तथा पीएम पैकेज के कर्मचारियों को चार-पांच दिनों तक मूवमेंट न करने को कहा गया है। साथ ही हिंदू कर्मचारियों को भी घर पर ही रहने को कहा गया है। उन्हें दफ्तर न जाने की हिदायत दी गई है। घाटी के सभी जिलों के विभिन्न थानों से फोन कर मुलाजिमों तथा कश्मीरी पंडितों को हिदायत दी गई है। कुछ थानों ने बनाए गए व्हाट्सए ग्रुप पर भी यह मैसेज शेयर किया है।
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घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें थाने से पांच दिनों तक मूवमेंट न करने को कहा गया है। यदि मूवमेंट बहुत जरूरी हो तो बिना स्थानीय पुलिस को सूचित किए ऐसा न किया जाए। पीएम पैकेज से जुड़े कर्मचारियों ने बताया कि यों तो वे 12 मई को राहुल भट की हत्या के बाद से ही दफ्तर नहीं जा रहे हैं, लेकिन उन्हें भी फोन कर यह हिदायत दी गई है कि वे फिलहाल कार्यालय न जाए। हिंदू कर्मचारियों को भी घर पर ही रहने की हिदायत दी गई है। इन सबों का कहना है कि आखिर क्या है कि पांच दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने को कहा जा रहा है। कश्मीर पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने बताया कि कश्मीरी पंडितों तथा कर्मचारियों को पांच दिनों तक मूवमेंट न करने का स्थानीय थाने से मैसेज भेजा गया है। उनका कहना है कि यह टारगेट किलिंग को रोकने की रणनीति भी है। साथ ही सुरक्षा बलों को कोई इनपुट भी मिला हो सकता है, जिसकी वजह से अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
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स्थानीय हैंडलरों की तलाश
सुरक्षा बलों का मानना है कि टारगेट किलिंग में स्थानीय हैंडलरों का भी हाथ है। बिना इनके सहयोग के साफ्ट टारगेट को निशाना नहीं बनाया जा सकता है। साफ्ट टारगेट की रैकी से लेकर उनके घर से बाहर निकलने, उनके मूवमेंट तक की आतंकियों को पूरी जानकारी होती है। सूत्रों ने बताया कि श्रीनगर में अपनी बेटी को ट्यूशन के लिए छोड़ने जा रहे पुलिसकर्मी को तब निशाना बनाया गया जब वह घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे की रेंज से बाहर आ गए। यह सब स्थानीय हैंडलर के बिना संभव नहीं है। सुरक्षा बलों के सूत्रों के अनुसार ऐसे हैंडलर घाटी के लगभग सभी जिले में सक्रिय हैं। इनका पता लगाया जा रहा है ताकि इसे जड़ से ही खत्म किया जा सके।
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प्रवासी मजदूरों के रिहायशी इलाकों की सुरक्षा बढ़ाई
बडगाम में वीरवार की रात ईंट भट्ठा पर दो मजदूरों को गोली मारने की घटना के बाद कश्मीर के सभी 10 जिलों में रहने वाले प्रवासी लगभग एक लाख मजदूरों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पुलवामा में औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से सबसे अधिक प्रवासी मजदूर रहते हैं। इनके रिहायशी इलाकों तथा कार्यस्थल के आसपास सुरक्षा घेरा सख्त किया गया है। बारामुला, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, बडगाम, गांदरबल, श्रीनगर, अनंतनाग, शोपियां तथा कुलगाम में जहां कहीं भी प्रवासी मजदूर रहते हैं, सभी थानों को अलर्ट किया गया है कि उनके मूवमेंट को ट्रैक किया जाए। उनके आवासीय परिसरों के आसपास सुरक्षा घेरा सख्त रखा जाए। हालांकि, सूत्र बताते हैं कि प्रवासी मजदूरों में दहशत का माहौल न बने, इसका ख्याल भी रखना है। साथ ही उनकी सुरक्षा भी मुकम्मल हो इसे भी फोकस करते हुए इंतजाम करने हैं।
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