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बिजली दरें बढ़ने से उद्योग हो जाएंगे बंद, हजारों लोग होंगे बेरोजगार
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जम्मू। प्रदेश में बिजली दरों में औसतन 18 फीसदी की प्रस्तावित बढ़ोतरी संबंधी बिजली विभाग की याचिका पर संयुक्त राज्य विद्युत नियामक आयोग ने जम्मू में जन सुनवाई की। इस दौरान उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष प्रस्तावित बढ़ोतरी पर कड़ी आपत्ति जताई और बिजली विभाग के प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की। कहा-बिजली दरों में बढ़ोतरी से उद्योग बंद हो जाएंगे और हजारों लोग बेरोजगार होंगे।
उद्योग क्षेत्र की तरफ से ललित सूरी ने कहा कि जम्मू पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की प्रस्तावित बिजली दरों मे बढ़ोतरी न्यायसंगत नहीं है। खासतौर से उद्योगों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा, कारपोरेशन बिजली की बर्बादी को रोकने में कामयाब नहीं हुआ है। अगर बिजली की बर्बादी को रोका जाए तो दरों में बढ़ोतरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजेश जैन ने कहा कि जम्मू कश्मीर में एक तरफ सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करती है तो दूसरी तरफ बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी की जा रही है। इससे कई उद्योग बंद हो जाएंगे। उमेश गुप्ता ने कहा कि उद्योग बंद हुए तो हजारों लोग भी बेरोजगार होंगे।
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इस अवसर पर जम्मू पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के प्रबंधक निदेशक शिव अनंत तयाल ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर की वजह से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी रही है। बिजली ढांचे के रखरखाव व कर्मचारियों के वेतन में भी भारी खर्च हो रहा है। ऐसे में बिजली दरों में बढ़ोतरी के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में भी जम्मू कश्मीर से ज्यादी महंगी बिजली है।
घरेलू उपभोक्ता नहीं पहुंचे पक्ष रखने
जन सुनवाई के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं का पक्ष अनसुना ही रह गया। जन सुनवाई में केवल उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने ही अपने क्षेत्र के हितों की बात की।
अंतिम फैसला लेने में दो माह लगेंगे: लोकेश झा
संयुक्त राज्य विद्युत नियामक आयोग जम्मू कश्मीर और लद्दाख के चेयरमैन लोकेश झा ने कहा कि जम्मू में जन सुनवाई के बाद चार जून को वह कश्मीर में उपभोक्ताओं का पक्ष सुनेंगे। इसके बाद लद्दाख के उपभोक्ताओं का पक्ष भी आयोग सुनेगा। उसके बाद ही प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। लोकेश झा ने कहा कि अंतिम फैसला लेने में करीब दो माह लग सकते हैं।
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उद्योग क्षेत्र की तरफ से ललित सूरी ने कहा कि जम्मू पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की प्रस्तावित बिजली दरों मे बढ़ोतरी न्यायसंगत नहीं है। खासतौर से उद्योगों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा, कारपोरेशन बिजली की बर्बादी को रोकने में कामयाब नहीं हुआ है। अगर बिजली की बर्बादी को रोका जाए तो दरों में बढ़ोतरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
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फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजेश जैन ने कहा कि जम्मू कश्मीर में एक तरफ सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करती है तो दूसरी तरफ बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी की जा रही है। इससे कई उद्योग बंद हो जाएंगे। उमेश गुप्ता ने कहा कि उद्योग बंद हुए तो हजारों लोग भी बेरोजगार होंगे।
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इस अवसर पर जम्मू पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन के प्रबंधक निदेशक शिव अनंत तयाल ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर की वजह से महंगी बिजली खरीदनी पड़ी रही है। बिजली ढांचे के रखरखाव व कर्मचारियों के वेतन में भी भारी खर्च हो रहा है। ऐसे में बिजली दरों में बढ़ोतरी के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में भी जम्मू कश्मीर से ज्यादी महंगी बिजली है।
घरेलू उपभोक्ता नहीं पहुंचे पक्ष रखने
जन सुनवाई के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं का पक्ष अनसुना ही रह गया। जन सुनवाई में केवल उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने ही अपने क्षेत्र के हितों की बात की।
अंतिम फैसला लेने में दो माह लगेंगे: लोकेश झा
संयुक्त राज्य विद्युत नियामक आयोग जम्मू कश्मीर और लद्दाख के चेयरमैन लोकेश झा ने कहा कि जम्मू में जन सुनवाई के बाद चार जून को वह कश्मीर में उपभोक्ताओं का पक्ष सुनेंगे। इसके बाद लद्दाख के उपभोक्ताओं का पक्ष भी आयोग सुनेगा। उसके बाद ही प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। लोकेश झा ने कहा कि अंतिम फैसला लेने में करीब दो माह लग सकते हैं।