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सेना, पुलिस से नहीं लोगों के दिल जीतने से आएगा अमन
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जम्मू। पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर में सेना और पुलिस के बल पर शांति बहाल नहीं होगी। इसके लिए तमाम सियासी दलों से बात कर घाटी को इस हालात से बाहर लाना होगा। लोगों के दिल जीतने होंगे। उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह करते हुए कहा कि कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक कर्मियों की सुरक्षा के साथ ही अमरनाथ यात्रा को महफूज बनाना होगा। यदि यात्रा को लेकर एक भी घटना होती है तो इसका न सिर्फ जम्मू-कश्मीर बल्कि देश भर में असर होगा।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर के हालात चिंताजनक हैं। एक दशक से कश्मीर में तैनात शिक्षक रजनी बाला को शहीद कर दिया गया। यहां हिंदू भी मारे जा रहे हैं और मुस्लिम भी निशाना बनाए गए हैं। यह दर्शाता है कश्मीर में हालात कैसे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को लेकर संकट की स्थिति है। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार तमाम सियासी दलों को बुलाए। हालात से निपटने के लिए ऐसा रास्ता खोजे, जो कारगर हो। लोगाें के दिल जीतने से बात बनेगी।
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हर परिवार पहले चाहता है सुरक्षा
खीर भवानी यात्रा रद्द करने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का पहलू सबसे बड़ा है। हर परिवार अपने लिए सबसे पहले सुरक्षा चाहता है। वर्तमान हालात में यहां अब किसी तरह की सुरक्षा नहीं है। जम्मू से जो लोग कश्मीर घाटी के गांवों में पढ़ाने के लिए गए हैं, उनकी सुरक्षा कहीं नहीं दिखाई देती।
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फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर के हालात चिंताजनक हैं। एक दशक से कश्मीर में तैनात शिक्षक रजनी बाला को शहीद कर दिया गया। यहां हिंदू भी मारे जा रहे हैं और मुस्लिम भी निशाना बनाए गए हैं। यह दर्शाता है कश्मीर में हालात कैसे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को लेकर संकट की स्थिति है। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार तमाम सियासी दलों को बुलाए। हालात से निपटने के लिए ऐसा रास्ता खोजे, जो कारगर हो। लोगाें के दिल जीतने से बात बनेगी।
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हर परिवार पहले चाहता है सुरक्षा
खीर भवानी यात्रा रद्द करने के सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का पहलू सबसे बड़ा है। हर परिवार अपने लिए सबसे पहले सुरक्षा चाहता है। वर्तमान हालात में यहां अब किसी तरह की सुरक्षा नहीं है। जम्मू से जो लोग कश्मीर घाटी के गांवों में पढ़ाने के लिए गए हैं, उनकी सुरक्षा कहीं नहीं दिखाई देती।
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