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संघ प्रमुख के समक्ष अफसरशाही के हावी होने का उठा मुद्दा, जनदबाव बनाने पर जोर
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जम्मू। संघ प्रमुख मोहन भागवत के सामने जम्मू-कश्मीर में अफसरशाही के हावी होने और जम्मू के साथ भेदभाव का मुद्दा उठा। तालिबानी राज के बाद घाटी के हालात और 370 को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को भी उठाया गया। केशव भवन में संघ की रविवार को हुई समन्वय बैठक में भाजपा समेत सभी आनुषांगिक संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी शामिल हुए।
विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि बैठक में संगठनों की ओर से कहा गया है कि प्रदेश में अफसरशाही हावी है। लोगों की बातें नहीं सुनी जा रही हैं। इससे लोगों में आक्रोश भी है। संघ प्रमुख ने साफ शब्दों में संगठनों को कहा कि चाहे सरकार किसी की भी हो जनदबाव जरूर बनाया जाना चाहिए। अपनी बात को प्रमुखता से रखना चाहिए। जिस किसी भी संगठन से जुड़ा मुद्दा हो उसे आवाज बुलंद करनी चाहिए। यह परवाह नहीं करनी चाहिए कि सरकार कौन सी है। बैठक में घाटी के हालात पर भी लोगों ने विचार रखे। कहा कि 370 हटने के बाद लोगों की मानसिकता बदली। कुछ ने राष्ट्रवाद का साथ दिया, कुछ परिस्थितियों के कारण जुड़े लेकिन कट्टर लोग कभी भी विचारधारा से नहीं जुड़ेंगे। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। यह भी कहा गया कि अफगानिस्तान में तालिबान राज के बाद स्थितियां बदली हैं। देशविरोधी ताकतों के फिर से सिर उठाने का खतरा बढ़ा है, जो चिंता का विषय है।
बैठक में कहा गया कि 370 हटने के बाद जम्मू के लोगों के साथ भेदभाव का राग अलापकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। इस पर संघ प्रमुख ने कहा कि ऐसा नहीं है कि 370 हटने का फायदा नहीं हुआ। कुछ लोग छोटे-छोटे विषयों को लेकर उठ खड़े होंगे। कोर टीम को इसकी काट खोजते हुए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी। ऐसे लोग न हमारे और न आपके और न ही 370 के शुभचिंतक हैं। इनसे समाज को सचेत करना होगा।
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लद्दाख में धर्म परिवर्तन, शिक्षा जगत में वीसी की नियुक्ति का मामला भी आया
लद्दाख में एलएसी से सटे इलाकों में धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर चिंता जताई गई। कहा गया कि यह खतरे की घंटी है। इससे निपटने के लिए संघ परिवार को आगे आने को कहा गया। शैक्षिक संस्थानों में उप कुलपति की नियुक्ति में देरी के साथ ही नई शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी चर्चा हुई।
कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी पर भी जोर
समन्वय बैठक में घाटी में कश्मीरी पंडितों की ससम्मान वापसी का मुद्दा भी उठा। कहा गया कि ऐसे वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए कि पंडितों को लगे कि यह उनकी अपनी माटी ही है। पर्याप्त सुरक्षा के साथ उन्हें आजीविका की भी गारंटी मिलनी चाहिए।
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विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि बैठक में संगठनों की ओर से कहा गया है कि प्रदेश में अफसरशाही हावी है। लोगों की बातें नहीं सुनी जा रही हैं। इससे लोगों में आक्रोश भी है। संघ प्रमुख ने साफ शब्दों में संगठनों को कहा कि चाहे सरकार किसी की भी हो जनदबाव जरूर बनाया जाना चाहिए। अपनी बात को प्रमुखता से रखना चाहिए। जिस किसी भी संगठन से जुड़ा मुद्दा हो उसे आवाज बुलंद करनी चाहिए। यह परवाह नहीं करनी चाहिए कि सरकार कौन सी है। बैठक में घाटी के हालात पर भी लोगों ने विचार रखे। कहा कि 370 हटने के बाद लोगों की मानसिकता बदली। कुछ ने राष्ट्रवाद का साथ दिया, कुछ परिस्थितियों के कारण जुड़े लेकिन कट्टर लोग कभी भी विचारधारा से नहीं जुड़ेंगे। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। यह भी कहा गया कि अफगानिस्तान में तालिबान राज के बाद स्थितियां बदली हैं। देशविरोधी ताकतों के फिर से सिर उठाने का खतरा बढ़ा है, जो चिंता का विषय है।
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बैठक में कहा गया कि 370 हटने के बाद जम्मू के लोगों के साथ भेदभाव का राग अलापकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। इस पर संघ प्रमुख ने कहा कि ऐसा नहीं है कि 370 हटने का फायदा नहीं हुआ। कुछ लोग छोटे-छोटे विषयों को लेकर उठ खड़े होंगे। कोर टीम को इसकी काट खोजते हुए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी। ऐसे लोग न हमारे और न आपके और न ही 370 के शुभचिंतक हैं। इनसे समाज को सचेत करना होगा।
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लद्दाख में धर्म परिवर्तन, शिक्षा जगत में वीसी की नियुक्ति का मामला भी आया
लद्दाख में एलएसी से सटे इलाकों में धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर चिंता जताई गई। कहा गया कि यह खतरे की घंटी है। इससे निपटने के लिए संघ परिवार को आगे आने को कहा गया। शैक्षिक संस्थानों में उप कुलपति की नियुक्ति में देरी के साथ ही नई शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी चर्चा हुई।
कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी पर भी जोर
समन्वय बैठक में घाटी में कश्मीरी पंडितों की ससम्मान वापसी का मुद्दा भी उठा। कहा गया कि ऐसे वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए कि पंडितों को लगे कि यह उनकी अपनी माटी ही है। पर्याप्त सुरक्षा के साथ उन्हें आजीविका की भी गारंटी मिलनी चाहिए।