फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu kashmir news

हमले में मिलिट्री ड्रोन के इस्तेमाल का शक

विज्ञापन
jammu kashmir news
जम्मू। एयरफोर्स स्टेशन पर हमले में मिलिट्री डोन के इस्तेमाल का शक है। व्यावसायिक ड्रोन से इस प्रकार के हमले नहीं किए जा सकते हैं। पाकिस्तान के पास उपलब्ध बुराक ड्रोन का इसमें इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। पाकिस्तान में आर्मी स्कूल पर हुए हमले के दौरान दहशतगर्दों का सफाया करने के लिए 2014-15 में जनजातीय क्षेत्र में इसी तरह के ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इस ड्रोन की खास बात यह है कि इसका रात मेंभी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह रडार की रेंज में नहीं आता। इसकी गति 200 किलोमीटर प्रति घंटा होती है, जिससे वह लक्ष्य पर हमला कर आसानी से वापस हो जाता है। यह मानना है जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का।
विज्ञापन

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने सीमा पार आतंकवाद के लिए अपनाए जा रहे हथकंडों में बदलाव किया गया है। अब सेना के उपकरणों में बदलाव कर उन्हें आतंकियों को सौंपा जा रहा है। बुराक ड्रोन इस्राइल, अमेरिका, ब्रिटेन के साथ पाकिस्तान के पास है। इसका नियंत्रण पाकिस्तानी एयरफोर्स के साथ ही आईएसआई के पास है। यह ड्रोन 2009 से ही पाकिस्तान के पास है जिसका इस्तेमाल घनी आबादी वाले इलाकों में भी आसानी से किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ड्रोन फाइबर का बना होता है जो 200 से 500 किमी का सफर और आठ हजार फुट की ऊंचाई पर भी उड़ सकता है। इस कांबैट ड्रोन की आवाज कम होती है और पांच किलो तक वजन आसानी से उठा सकता है।
विज्ञापन

जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जे जगन्नाथन का कहना है कि आतंकवाद को प्रश्रय देने में पाकिस्तान का हर मंच पर नाम आता रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के मामले में कार्रवाई की है। इस किरकिरी से बचने के लिए वह ड्रोन हमले का प्रयोग कर सकता है। ड्रोन से हमले के सबूत मिलने में काफी मुश्किलें आएंगी, जबकि अन्य हमलों में पाकिस्तान के खिलाफ भारत डोजियर तैयार कर लेता है। इस वजह से उसने अपनी रणनीति बदलते हुए आतंकियों को ड्रोन हमले के लिए तैयार किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

---
पाकिस्तानी सेना ने लश्कर को ड्रोन का दिया प्रशिक्षण
डॉ. जगन्नाथन का कहना है कि हमले में लश्कर का हाथ हो सकता है, क्योंकि 2008 में यह बात साबित हो चुकी है कि पाकिस्तानी सेना ने लश्कर आतंकियों को नेवल ट्रेनिंग भी दी थी। इसलिए बदली रणनीति के तहत और विश्व समुदाय की नजरों से बचने के लिए ड्रोन हमले के बारे में भी प्रशिक्षण देने की बात को बल मिलता है।
---
सुरंग तकनीक के पकड़ में आने से नया प्रयोग
उनका कहना है कि पाकिस्तान की सुरंग की तकनीक अब धीरे-धीरे पकड़ में आ गई है। एक सुरंग को तैयार करने में साल तक का समय लगता है क्योंकि इसे खुरपी की सहायता से तैयार किया जाता है। बॉर्डर पर सतर्कता की वजह से भी पाकिस्तान ने ड्रोन हमले की साजिश रची। उन्होंने बताया कि टनल को खोजने के लिए सुरक्षा बलों को व्यापक तकनीक उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि जमीन के नीचे मानव और अन्य किसी प्रकार की गतिविधियों का आसानी से पता लगाया जा सके।

---
स्थानीय स्तर पर हमले की संभावनाएं बहुत कम
डॉ. जगन्नाथन के अनुसार स्थानीय स्तर पर ड्रोन हमले करने की संभावनाएं बहुत कम हैं क्योंकि इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण की जरूरत है। व्यावसायिक ड्रोन में आईईडी या अन्य विस्फोटक फिट कर हमले करने की गुंजाइश नहीं लगती। व्यावसायिक ड्रोन में आवाज बहुत होती है। ड्रोन को लक्ष्य पर निशाना साधने और विस्फोटक के साथ लक्ष्य भेदने के लिए उच्च स्तर का प्रशिक्षण जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed