परिहार बंधुओं की हत्या मामला: आतंकी संगठन हिजबुल के चार आतंकियों पर आरोप तय
एक नवंबर 2018 को किश्तवाड़ में दोनों भाइयों की अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। इसके बाद जब मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि आतंकियों ने हत्या की है, ताकि किश्तवाड़ में एक विशेष समुदाय में दहशत पैदा की जाए।
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जम्मू संभाग के किश्तवाड़ में भाजपा नेता अनिल परिहार और उनके भाई अजीत परिहार की हत्या मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के चार आतंकियों पर आरोप तय कर दिए हैं। इन आतंकियों में निसार अहमद शेख, आजाद हुसैन, निसार भट्ट और रुस्तम अली शामिल हैं। बुधवार को एनआईए कोर्ट के जज सुनीत गुप्ता ने एनआईए की तरफ से पीपी बलदेव सिंह और आरोपियों के वकील दीपिका रजावत और आईएच भट्ट की दलीलें सुनीं। निसार अहमद शेख के खिलाफ धारा 302, 120 बी यूए (पी) अधिनियम की धारा 18/19/39 के तहत आरोप तय किया किया गया। जबकि यूए (पी) अधिनियम की धारा 13/19/39 के तहत निसार भट्ट , आजाद हुसैन और रुस्तम अली के खिलाफ आरोप तय किए गए।
जांच में यह सामने आया था कि इस हमले की साजिश आतंकी ओसामा बिन जावेद और जाहिद हुसैन ने रची थी। जिसमें उक्त आतंकियों ने इनका साथ दिया। ओसामा और जाहिद अलग अलग मुठभेड़ में बाद में मारे गए, जबकि एक अन्य आतंकी हारून अब्बास भी बाद में मारा गया, जो इन लोगों के साथ साजिश में शामिल था।
नौकरी के अंत में जन्मतीथि नहीं बदलेगी
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी नौकरी के अंत में जन्मतिथि को बदलने या फिर उसमें बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती। केएएस अधिकारी मोहम्मद मेहराज उद दिन की एक याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस संजय डार वाली खंडपीठ ने बुधवार को सुनवाई की। मोहम्मद मेहराज ने सीएटी की जजमेंट को चुनौती दी थी। सीएटी ने भी ऐसा ही आदेश दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने बरकार रखा है।
दिव्यांगों को वैक्सिनेशन पर स्वास्थ्य विभाग से मांगा जवाब
प्रदेश में दिव्यांगों को कोरोना वैक्सीनेशन लगाने को लेकर हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि विभाग हलफनामा दायर करके बताए कि इसको सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। अगली सुनवाई तक ऐसा होना चाहिए। एक संस्था की ओर से कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि दिव्यांगों के लिए विशेष अभियान चलाकर वैक्सीनेशन कराई जाए। जस्टिस अली मोहम्मद मागरे ने दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद उक्त आदेश दिया।