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गंगा और पाकिस्तानी डाल्फिन एक नहीं, दोनों की प्रजातियां अलग

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जम्मू। दो दशक के लंबे शोध के बाद वैज्ञानिकों को गंगा तथा पाकिस्तानी (इंडस) डाल्फिन की प्रजातियों के अलग-अलग होने की खोज करने में सफलता हाथ लगी है। शोध के अनुसार दोनों प्रजातियों के दांत, मुंह तथा आनुवांशिक विशेषताओं में अंतर है। इस वजह से दोनों देशों के डाल्फिन के एक प्रजाति के होने का भ्रम अब समाप्त हो गया है। शोध भारत, अमेरिका, इंग्लैंड व पाकिस्तान के विज्ञानियों ने संयुक्त रूप से किया है।
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डाल्फिन सिन्हा के नाम से मशहूर श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय कटड़ा के वाइस चांसलर पद्मश्री प्रो. रवींद्र कुमार सिन्हा शोध करने वाले विज्ञानियों में शामिल हैं। उनका कहना है कि शोध में यह पता चला है कि इंडस नदी तथा गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी में पाई जाने वाली डाल्फिन की कई विशेषताएं एक-दूसरे से अलग हैं, जिसके आधार पर दोनों नदियों में पाई जाने वाली डाल्फिन अलग-अलग प्रजातियों की है। शोध में दोनों प्रजातियों की डाल्फिन की दांतों की संख्या, विकास प्रक्रिया के साथ-साथ आनुवांशिक अंतर पाया गया है। कहा कि यह शोध इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों प्रजातियों की डाल्फिन की संख्या कुछ हजार तक ही सीमित रह गई है। दोनों स्तनधारियों के लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। इस वजह से इस शोध के बाद इन प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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नदियों में बन रहे बांध तथा प्रदूषण से अस्तित्व को खतरा
प्रो. सिन्हा ने बताया कि इंडस तथा गंगा नदी की डाल्फिन को अकसर अंधी मछली कहा जाता है क्योंकि वे मिट्टी युक्त नदियों में रहती हैं। इसकी वजह से उनकी आंख की रोशनी खत्म हो जाती है। कई बार तो वे इकोलोकेशन सिस्टम का भी पालन नहीं कर पाती हैं। इससे उनके दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा रहता है। नदियों पर बन रहे बांध तथा प्रदूषण से भी उनके अस्तित्व को खतरा है।
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डाल्फिन की संख्या चार हजार
प्रो. सिन्हा ने बताया कि गंगा नदी में डाल्फिन की संख्या 4000 के आस-पास है। इसमें भारतीय क्षेत्र में गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी में इनकी संख्या 3500 है। नेपाल में 50 और शेष बांग्लादेश में है। पाकिस्तान में 2000 के लगभग डाल्फिन हैं। पंजाब की नदियों में भी कुछ डाल्फिन हैं। इस वजह से पंजाब सरकार ने 2019 में इसे राज्य पशु घोषित किया। हालांकि, इंडस नदी में पाई जाने वाली 80 प्रतिशत डाल्फिन पाकिस्तान में है।

गंग नदी और पाकिस्तान में पाई जाने वाली डाल्फिन की अलग-अलग प्रजातियों के शोध से दोनों प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा सकेगा। 1990 से दक्षिण एशिया में पाई जाने वाली डाल्फिन को एक ही प्रजाति का माना जाता था। अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका मैरिन मैमल साइंस ने इस शोध को 23 मार्च 2021 को प्रकाशित भी किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 15 अगस्त 2020 को गंगा नदी तथा समुद्री डाल्फिन को बचाने के लिए प्रोजेक्ट डाल्फिन की घोषणा की है।
-पद्मश्री प्रो. रवींद्र कुमार सिन्हा, वाइस चांसलर, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय
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