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चिंताजनक: साल में 200 से ज्यादा बच्चों का एंबुलेंस में जन्म, सबसे ज्यादा मामले उधमपुर से

Wed, 26 Jun 2024 06:00 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमित कुमार, जम्मू
अमित कुमार, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 26 Jun 2024 06:00 PM IST
सार

पिछले चार साल में प्रदेश के बीस जिलों में माताएं आपात 108 एंबुलेंस में 869 (मई 2024 तक) बच्चों को जन्म दे चुकी हैं, यानी हर साल औसतन 200 से अधिक ऐसे मामले हो रहे हैं।

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jammu kashmir : More than 200 babies born in ambulances in a year most cases are from Udhampur
आपातकालीन सेवा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू कश्मीर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 100 प्रतिशत सुरक्षित प्रसव और मातृ मृत्युदर में कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन चिंताजनक पहलु यह भी है कि आज भी माताएं एंबुलेंस में बच्चों को जन्म देने को मजबूर हैं। पिछले चार साल में प्रदेश के बीस जिलों में माताएं आपात 108 एंबुलेंस में 869 (मई 2024 तक) बच्चों को जन्म दे चुकी हैं, यानी हर साल औसतन 200 से अधिक ऐसे मामले हो रहे हैं।

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ये अधिकांश मामले वे थे, जिन्हें संबंधित चिकित्सा केंद्रों से रेफर करके जिला अस्पतालों में भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही प्रसव पीड़ा के कारण उन्हें एंबुलेंस में प्रसव करवाना पड़ा। इनमें सर्वाधिक 200 से अधिक मामले उधमपुर से आए हैं। इसके अलावा जिला डोडा, जम्मू, कठुआ, किश्तवाड़, राजोरी, रामबन और रियासी में भी 50 से अधिक मामलों में एंबुलेंस में प्रसव किए गए हैं। कश्मीर की तुलना में जम्मू संभाग में एंबुलेंस में कम बच्चों ने जन्म लिया है।
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गत दिनों उधमपुर जिला अस्पताल से जम्मू के लिए रेफर किए गए एक मामले में महिला को नगरोटा जम्मू 108 एंबुलेंस में ही प्रसव करवाना पड़ा था। इस मामले में महिला के पति प्रीतम सिंह निवासी रामबन का आरोप था कि वह पहले गर्भवती महिला को रामबन चिकित्सा केंद्र लेकर गए थे, लेकिन वहां से उन्हें जिला अस्पताल उधमपुर में भेज दिया गया। मगर वहां डाक्टरों द्वारा मरीज को देखे बिना उसे जम्मू रेफर कर दिया गया।

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नगरोटा में पहुंचने पर प्रसव पीड़ा अधिक होने के कारण एंबुलेंस में ही प्रसव करवाना पड़ा। उनका आरोप है कि जिला अस्पतालों में खासतौर पर दोपहर बाद अधिकांश प्रसव मामलों को जम्मू रेफर कर दिया जाता है। जिसमें मरीज के साथ तीमारदारों को असुविधा होती है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत बाकायदा 100 प्रतिशत सुरक्षित प्रसव और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए व्यापक स्तर पर एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है। लेकिन आज भी रेफर मामलों में एंबुलेंस में हो रहे प्रसव मामलों से व्यवस्था पर कई सवाल उठते हैं।

अगर एक इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन जो डाक्टर भी नहीं है, वे 108 एंबुलेंस में सुरक्षित प्रसव करवा सकता है तो स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस जिला अस्पतालों में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती है। प्रदेश में 203, 108 एंबुलेंस चल रही हैं, जिनमें जम्मू संभाग में 108 और कश्मीर संभाग में 95 एंबुलेंस हैं। एक एंबुलेंस में एक पायलट चालक और एक इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन रहता है। जिसमें गंभीर मामलों में चौबीस घंटे लाइन पर रहने वाले चार डाक्टरों से संपर्क करके पीड़ित को उचित उपचार देने के प्रयास किए जाते हैं।

रेफर सिस्टम से शहरी अस्पतालों में प्रसव मामलों का लोड

पहले से ही मरीजों का लोड झेल रहे शहरी अस्पतालों में रेफर मामलों से हालात और गंभीर बन जाते हैं। जम्मू के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस की बात करें तो यहां चौबीस घंटे में 50 से 60 प्रसव के मामले हो रहे हैं। इनमें दैनिक आधार पर 5 से 10 रेफर मामले पहुंच रहे हैं। अस्पताल में बिस्तरों की कमी के कारण अधिकांश समय हालत यह रहती है कि प्रसव के बाद एक ही बिस्तर पर दो या तीन मरीज रखने पड़ते हैं। हालांकि अस्पताल में 250 बिस्तर वाला लेबर रूम ब्लाक निर्माणाधीन है, लेकिन इसके पूरा होने पर ही मरीजों को राहत मिलेगी। अस्पताल के लेबर रूम में गत मई माह में 650 के करीब सामान्य और 620 से अधिक सीजिरियन प्रसव के मामले किए गए थे।

पिछले चार साल में 108 एंबुलेंस में जन्मे बच्चे

उधमपुर 219 (रेफर मामले) 32 (वो मामले जिसमें घर से मरीज लाया)

कठुआ        62             27
राजोरी       68             14
रामबन       65             21
जम्मू          62             31
डोडा         54             19
पुंछ           11             1
रियासी         52             13
सांबा            31             8
किश्तवाड़    60             10

--------------कश्मीर संभाग-----------

अनंतनाग            9             2
बांदीपोरा           32             5
बारामुला            11             5
बड़गाम             12             9
गांदरबल             24           10
कुलगाम             20             1
कुपवाड़ा             24            10
पुलवामा             3               4
शोपियां             11             5
श्रीनगर             7               2
 

नगरोटा एंबुलेंस में प्रसव मामले की जांच जारी- निदेशक

स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. राकेश मगोत्रा के अनुसार हाल ही में नगरोटा में एंबुलेंस में हुए प्रसव मामले में जांच चल रही है। मरीज को किन परिस्थितियों में जिला अस्पताल उधमपुर से रेफर किया गया इसके कारणों का पता लगाया जा रहा है। उधमपुर में मेडिकल कालेज भी स्थापित है, जिसमें कालेज प्रशासन से बात की जा रही है कि सामान्य मामलों को रेफर न किया जाए। इसके लिए सभी जिला स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों को जरूरी दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।

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