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जम्मू-कश्मीर: कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की हड़ताल 310 दिन बाद स्थगित, छह को बर्खास्तगी का नोटिस

Sun, 05 Mar 2023 10:41 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Sun, 05 Mar 2023 10:41 AM IST
सार

ऑल माइग्रेंट डिस्प्लेस्ड इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारियों की बैठक हुई। इसमें कर्मचारियों ने हड़ताल को स्थगित करने का फैसला लिया। कर्मचारियों ने एलजी प्रशासन पर उनकी सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। 

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Jammu Kashmir: Kashmiri Pandit employees strike postponed after 310 days, notice of dismissal to six
जम्मू में प्रदर्शन करते कश्मीरी पंडित कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीरी पंडित कर्मचारी राहुल भट की 13 मई 2022 में तहसील कार्यालय में लक्षित हत्या के बाद पीएम पैकेज कर्मचारियों की ओर शुरू की गई कामछोड़ हड़ताल शनिवार को 310 दिन बाद स्थगित कर दी गई है। यह फैसला ऑल माइग्रेंट डिस्प्लेस्ड इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले हुई बैठक में लिया गया है।

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इसमें एलजी शासन पर सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। वहीं, 10 माह से वेतन बंद होने से उत्पन्न आर्थिक तंगी के कारण फैसला लिया है। हालांकि अभी तक घाटी में ड्यूटी ज्वाइन करने के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है। ऑल माइग्रेंट डिस्प्लेस्ड इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारियों की बैठक हुई।
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इसमें कर्मचारियों ने हड़ताल को स्थगित करने का फैसला लिया। कर्मचारियों ने एलजी प्रशासन पर उनकी सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने कहा कि 310 दिन तक संघर्ष किया, लेकिन सरकार ने सुनवाई करने की बजाए वित्तीय संकट खड़ा कर दिया।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश रैना ने कहा कि 32 साल पहले भी कश्मीरी पंडितों ने खुद को सरकार के सहारे छोड़ा था आज फिर से वहीं किया है। सरकार ने सुरक्षा का आश्वासन दिया है और हमारे पास उसके आश्वासन पर विश्वास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

आर्थिक संकट खड़ा है। कर्मचारियों से सात से दस महीने का वेतन नहीं मिला है। बिना पैसे के परिवार का पालन करना और हड़ताल को जारी रखना चुनौती था। जम्मू के लिए स्थानांतरण करना हमारी मांग थी, जो पूरा नहीं हुई। सरकार से बातचीत भी चल रही है।


उम्मीद है कुछ सकारात्मक होगा। कर्मचारी का ड्यूटी ज्वाइन करना उसका व्यक्तिगत फैसला होगा। महिला कर्मचारी नेहा ने कहा कि हम अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन हमारी सुनवाई नहीं हुई इस लिए हमने ये फैसला लेना पड़ा।

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