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जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव से पहले लागू हो 73वां संशोधन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 20 Jul 2018 10:04 PM IST
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राज्य में पंचायती चुनाव की घोषणा से पूर्व संविधान के 73वें संशोधन को जम्मू कश्मीर में पूरी तरह से लागू करने की मांग की गई है। यह मांग पूर्व सरपंचों, पंचों के संगठन आल जेएंडके पंचायत कांफ्रेंस ने की है।
कांफ्रेंस के प्रधान अनिल शर्मा ने कहा कि केवल पंचायती चुनाव कराने की औपचारिकता निभाने से गांवों का विकास नहीं हो पाएगा। इसके लिए जरूरी है कि देश के अन्य राज्यों की तरह जम्मू कश्मीर में भी 73वां संशोधन लागू किया जाए। इसमें पंचायतों के लिए अलग चुनाव आयोग के अलावा वित्त आयोग का प्रावधान है। ऐसे में चुने गए सरपंच सरकार के रहम पर निर्भर नहीं रहेंगे और तय व्यवस्था के तहत जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत होगा और गांवों का विकास बेहतर तरीके से हो पाएगा।
73वां संशोधन अभी तक राज्य में लागू न होने के चलते पंचायतों के चुनाव वर्षों से लटके रहते हैं। राज्य सरकार अपनी मर्जी से पंचायतों को प्रयोग में लाती रही है। जबकि देश के अन्य हिस्सों में ऐसा नहीं है। राज्यपाल एनएन वोहरा ने पूर्ववर्ती सरकार के सरपंचों के सीधे चुनाव न कराने के फैसले को पलट कर गांवों में नया उत्साह पैदा किया है। राज्यपाल अगर जम्मू कश्मीर में 73वां संशोधन पूरी तरह से लागू करते हैं तो पंचायती चुनाव ऐतिहासिक बन सकते हैं।
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कांफ्रेंस के प्रधान अनिल शर्मा ने कहा कि केवल पंचायती चुनाव कराने की औपचारिकता निभाने से गांवों का विकास नहीं हो पाएगा। इसके लिए जरूरी है कि देश के अन्य राज्यों की तरह जम्मू कश्मीर में भी 73वां संशोधन लागू किया जाए। इसमें पंचायतों के लिए अलग चुनाव आयोग के अलावा वित्त आयोग का प्रावधान है। ऐसे में चुने गए सरपंच सरकार के रहम पर निर्भर नहीं रहेंगे और तय व्यवस्था के तहत जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत होगा और गांवों का विकास बेहतर तरीके से हो पाएगा।
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73वां संशोधन अभी तक राज्य में लागू न होने के चलते पंचायतों के चुनाव वर्षों से लटके रहते हैं। राज्य सरकार अपनी मर्जी से पंचायतों को प्रयोग में लाती रही है। जबकि देश के अन्य हिस्सों में ऐसा नहीं है। राज्यपाल एनएन वोहरा ने पूर्ववर्ती सरकार के सरपंचों के सीधे चुनाव न कराने के फैसले को पलट कर गांवों में नया उत्साह पैदा किया है। राज्यपाल अगर जम्मू कश्मीर में 73वां संशोधन पूरी तरह से लागू करते हैं तो पंचायती चुनाव ऐतिहासिक बन सकते हैं।
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