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बदले जा सकते हैं जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल, आईबी के पूर्व निदेशक को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 07 Dec 2018 06:12 PM IST
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गवर्नर सत्यपाल मालिक
- फोटो : फाइल
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जम्मू-कश्मीर में इस पूरे साल सियासी घमासान मचा रहा। सबसे पहले सरकार गिरी, उसके बाद राज्यपाल बदले, नए राज्यपाल आए तो विधानसभा भंग हो गई और अब कुछ महीने बीतने के बाद फिर राज्यपाल बदले जाने की चर्चा तेज हो गई है। बुधवार को अचानक राज्यपाल के दिल्ली जाने से इन आशंकाओं को बल मिला है।
बुधवार को राज्यपाल को शेर-ए-कश्मीर मेडिकल साइंसेज कॉलेज के स्थापना दिवस समारोह में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था। वह जम्मू से निकलने के बाद श्रीनगर न जाकर दिल्ली चले गए। इस पूरे घटनाक्रम से इन आशंकाओं को और बल मिला है।
हाल में राज्यपाल द्वारा लिए गए कुछ नीतिगत निर्णयों से केंद्र खुश नहीं था। इसके अलावा राज्यपाल ने भी हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि नौकरी नहीं जाएगी लेकिन तबादला कभी भी हो सकता है। उनके इस बयान को भी अब ताजा घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
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उस कार्यक्रम में मालिक ने यह भी कहा था कि इस राज्य का गवर्नर किसी रिटायर्ड सैन्य अधिकारी को ही बनाया जाना चाहिए। वहीं, लंबे समय से केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा को नई जिम्मेदारी मिलने की अटकले तेज हो गई हैं। मालिक के जिम्मेदारी संभालने से पहले भी दिनेश्वर शर्मा का नाम पूर्व राज्यपाल एनएन.वोहरा के उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में सामने आया था।
लेकिन हमेशा की तरह केंद्र सरकार ने एक चौकाने वाला निर्णय लेते हुए बिहार के राज्यपाल रहे सत्यपाल मालिक को जम्मू-कश्मीर की कमान सौप दी थी।
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बुधवार को राज्यपाल को शेर-ए-कश्मीर मेडिकल साइंसेज कॉलेज के स्थापना दिवस समारोह में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था। वह जम्मू से निकलने के बाद श्रीनगर न जाकर दिल्ली चले गए। इस पूरे घटनाक्रम से इन आशंकाओं को और बल मिला है।
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हाल में राज्यपाल द्वारा लिए गए कुछ नीतिगत निर्णयों से केंद्र खुश नहीं था। इसके अलावा राज्यपाल ने भी हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि नौकरी नहीं जाएगी लेकिन तबादला कभी भी हो सकता है। उनके इस बयान को भी अब ताजा घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
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उस कार्यक्रम में मालिक ने यह भी कहा था कि इस राज्य का गवर्नर किसी रिटायर्ड सैन्य अधिकारी को ही बनाया जाना चाहिए। वहीं, लंबे समय से केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा को नई जिम्मेदारी मिलने की अटकले तेज हो गई हैं। मालिक के जिम्मेदारी संभालने से पहले भी दिनेश्वर शर्मा का नाम पूर्व राज्यपाल एनएन.वोहरा के उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में सामने आया था।
लेकिन हमेशा की तरह केंद्र सरकार ने एक चौकाने वाला निर्णय लेते हुए बिहार के राज्यपाल रहे सत्यपाल मालिक को जम्मू-कश्मीर की कमान सौप दी थी।
जानिए कौन हैं केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा
केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा
- फोटो : फाइल
केन्द्र सरकार ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर दिनेश्वर शर्मा को जम्मू-कश्मीर में शांति प्रक्रिया के लिए सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त कर रखा है। खुफिया ब्यूरो (आईबी) से दिनेश्वर शर्मा 2008 से लगातार जुड़े रहे। 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी दिनेश्वर शर्मा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ भी काम कर चुके हैं। 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी डोभाल की ही तरह शर्मा भी केरल कैडर से हैं।
बिहार की राजधानी पटना के पास पाली गांव में पैदा हुए शर्मा ने गांव से ही प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद गया से ग्रेजुएशन किया। परिवार में तीसरी पीढ़ी के पुलिस अधिकारी शर्मा ने पहले इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के लिए क्वालीफाई किया और बाद में आईपीएस की परीक्षा पास की।
शर्मा को अलगाववाद और उग्रवाद से लेकर घरेलू और क्षेत्रीय राजनीति तक की समस्याओं से निपटने का व्यापक एवं दीर्घ अनुभव है। वे पुलिस, अर्धसैनिक बलों और खुफिया एजेंसियों में विभिन्न शीर्ष पदों पर काम कर चुके हैं।
केरल के अलप्पुझा जिले में डीएसपी का कार्यभार संभाल चुके शर्मा राज्य के कोल्लम और त्रिचूर जिले के एसपी भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे केरल खुफिया ब्यूरो के एसएसपी की भी जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। यही नहीं, सरदार बल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के प्रमुख के रूप में उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी महारत हासिल की।
वर्ष 1999-2003 तक सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी रहे शर्मा वर्ष 2003-05 के बीच खुफिया ब्यूरो से ज्वाइंट डाइरेक्टर का पद भी संभाल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने ब्यूरो में इस्लामिक आतंकवाद डेस्क का कामकाज संभाला।
इसके बाद उन्हें सीआरपीएफ का आईजी बनाया गया। इस दौरान वे जम्मू-कश्मीर के प्रभारी रहे। जम्मू-कश्मीर के अलावा वे नगालैंड, राजस्थान और गुजरात में पुलिस, सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों में कई पदों पर रहे हैं। अपने कैरियर के दौरान उन्हें पूर्वी जर्मनी, पोलैंड, इस्राइल और दक्षिण कोरिया में जासूसी का प्रशिक्षण लेने का भी मौका मिला।
बिहार की राजधानी पटना के पास पाली गांव में पैदा हुए शर्मा ने गांव से ही प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद गया से ग्रेजुएशन किया। परिवार में तीसरी पीढ़ी के पुलिस अधिकारी शर्मा ने पहले इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के लिए क्वालीफाई किया और बाद में आईपीएस की परीक्षा पास की।
शर्मा को अलगाववाद और उग्रवाद से लेकर घरेलू और क्षेत्रीय राजनीति तक की समस्याओं से निपटने का व्यापक एवं दीर्घ अनुभव है। वे पुलिस, अर्धसैनिक बलों और खुफिया एजेंसियों में विभिन्न शीर्ष पदों पर काम कर चुके हैं।
केरल के अलप्पुझा जिले में डीएसपी का कार्यभार संभाल चुके शर्मा राज्य के कोल्लम और त्रिचूर जिले के एसपी भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे केरल खुफिया ब्यूरो के एसएसपी की भी जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। यही नहीं, सरदार बल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के प्रमुख के रूप में उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी महारत हासिल की।
वर्ष 1999-2003 तक सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी रहे शर्मा वर्ष 2003-05 के बीच खुफिया ब्यूरो से ज्वाइंट डाइरेक्टर का पद भी संभाल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने ब्यूरो में इस्लामिक आतंकवाद डेस्क का कामकाज संभाला।
इसके बाद उन्हें सीआरपीएफ का आईजी बनाया गया। इस दौरान वे जम्मू-कश्मीर के प्रभारी रहे। जम्मू-कश्मीर के अलावा वे नगालैंड, राजस्थान और गुजरात में पुलिस, सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों में कई पदों पर रहे हैं। अपने कैरियर के दौरान उन्हें पूर्वी जर्मनी, पोलैंड, इस्राइल और दक्षिण कोरिया में जासूसी का प्रशिक्षण लेने का भी मौका मिला।