जम्मू-कश्मीर: भ्रष्ट अफसरों को अभियोजन स्वीकृति में देरी नहीं लगाएगी सरकार
चार संकलित जानकारियां कोर्ट में पेश की गई। तीसरा संकलन स्थायी विभागीय कार्रवाई है।
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हाईकोर्ट की ओर से मांगी गई जानकारी पर कोर्ट ने संतुष्टि व्यक्त की है। भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कई मामलों की जांच पूरी की गई है, लेकिन अभियोजन स्वीकृति के अभाव में इन मामलों पर कार्रवाई करने में मंजूरी नहीं मिल रही थी।
हाईकोर्ट के एडवोकेट जनरल ने चार तरह की जानकारियां एकत्र कर करके सौंपी है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश जावेद इकबाल वानी वाली खंडपीठ ने मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। एडवोकेट जनरल ने खंडपीठ को अवगत कराया कि चार संकलित जानकारियों में पहला संकलन उन मामलों की तस्वीर बताता है जहां सरकार ने प्रत्येक अधिकारी के पूर्ण विवरण के साथ वर्षवार अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की है।
दूसरा संकलन भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज एफआईआर हैं, जिनकी मंजूरी जीएडी से मिलनी है। तीसरा संकलन स्थायी विभागीय कार्रवाई है। जबकि अंतिम संकलन जीएडी द्वारा विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जारी की गई एडवाइजरी और अलर्ट नेेटिस के संबंध में था।
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खंडपीड ने कहा कि जिस तरह से संकलित किया गया है, इससे साफ है कि सरकार अभियोजन स्वीकृति में देरी के मूड में नहीं। हम उपरोक्त सभी सूचनाओं को कम समय के भीतर एकत्र करने और संकलित करने और इसे न्यायालय के समक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता के कार्यालय द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हैं।