Maharaja Hari Singh Jayanti: अनुच्छेद 370 की बेड़ियों से जम्मू-कश्मीर आजाद, महाराजा हरि सिंह को भी मिला सम्मान
महाराजा हरि सिंह के बेटे डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि लंबे समय से डोगरा समाज छुट्टी की मांग कर रहा था। लंबे संघर्ष का प्रतिफल मिला है और डोगरों के स्वाभिमान और आकांक्षाओं की पूर्ति हुई है। यह सुखद है। उन्होंने नौ सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सरकारी अवकाश देने की अपील की थी।
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जम्मू-कश्मीर तीन साल पहले अनुच्छेद 370 और 35ए की बेड़ियों से आजाद हुआ तो उसने कई मायने में प्रदेश में बदलाव लाए। विकास को गति मिली। पश्चिम पाकिस्तान रिफ्यूजी, डोगरा व वाल्मीकि समुदाय के लोगों को उनका वास्तविक हक मिला। इन सबके साथ ही सरकार ने शेख अब्दुल्ला जयंती की छुट्टी रद्द कर विलय दिवस की छुट्टी घोषित कर डोगरों की मांग को तो पूरा किया, लेकिन महाराजा हरि सिंह के जन्मदिन पर अवकाश की मांग अधूरी रही।
75 साल बाद यह मांग भी पूरी हुई
धीरे-धीरे आंदोलन जोर पकड़ने लगा और 75 साल बाद यह मांग भी पूरी हुई। डोगरों का मानना है कि 370 हटने के बाद कश्मीरी हुक्मरानों से आजादी मिलते ही सबसे बड़ा बदलाव यह आया कि महाराजा हरि सिंह जो अंतिम डोगरा शासक थे, उनके जन्मदिवस पर छुट्टी के लिए पिछले 75 साल से चल रहे संघर्ष ने आकार लिया। डोगरा समाज को उसका हक मिला, उसकी आकांक्षाएं पूरी हुईं और महाराजा को सम्मान मिला। डोगरा विरोधी प्रचार तंत्र को भी विराम लगा।
रियासत के विलय के बाद से डोगरा विरोधी प्रचार
महाराजा हरि सिंह के पौत्र विक्रमादित्य सिंह का कहना है कि रियासत के विलय के बाद से डोगरा विरोधी प्रचार शुरू हो गया। महाराजा के विषय में तमाम तरह की बातें की जाने लगीं। 2019 में जब 370 हटा तो धारणा बदलने लगी। कश्मीरी हुक्मरानों की आवाज लगभग धुंधली पड़ गई। ऐसा नहीं है कि छुट्टी घोषित होने से केवल डोगरे ही खुश हैं, बल्कि कश्मीरियों में भी उत्साह है। महाराजा अब भी कश्मीरियों के बीच प्रिय हैं। उनके पास कश्मीर के अलावा डोडा, किश्तवाड़ से भी बधाई के संदेश आए हैं। कुछ बाध्यताएं हो सकती हैं जिसकी वजह से वे खुलकर प्रसन्नता नहीं जाहिर कर पा रहे हैं।
लंबे संघर्ष का प्रतिफल सुखद रहा : कर्ण सिंह
महाराजा हरि सिंह के बेटे डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि लंबे समय से डोगरा समाज छुट्टी की मांग कर रहा था। लंबे संघर्ष का प्रतिफल मिला है और डोगरों के स्वाभिमान और आकांक्षाओं की पूर्ति हुई है। यह सुखद है। उन्होंने नौ सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सरकारी अवकाश देने की अपील की थी।
छुट्टी पर सहमति जताना सकारात्मक कदम
उनकी अपील के छह दिन बाद 15 सितंबर को छुट्टी पर सहमति जताना सकारात्मक कदम है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के प्रति आभारी हैं। कहा कि उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह ने एमएलसी रहते हुए विधान परिषद में आवाज उठाई थी, लेकिन उसे दबा दिया गया। धीरे-धीरे यह मांग आंदोलन बन गया और अंतत: सरकार को जम्मू के लोगों की आवाज को सुनकर उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना पड़ा।
विलय संबंधी योगदान के अलावा दूसरे पक्ष भी जाने जनता: विक्रमादित्य
डॉ. कर्ण सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह का कहना है कि महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी घोषित कर उनका सम्मान करने करने का मौका मिला है। यह लंबी लड़ाई के बाद संभव हो सका है और इसका सबसे अधिक श्रेय जम्मू की युवा पीढ़ी को है। पूरा डोगरा समाज इसके लिए लंबे समय से आंदोलनरत था।
उन्होंने तमाम सामाजिक सुधार किए
दरअसल महाराजा को केवल जम्मू-कश्मीर का विलय करने के लिए याद किया जाता है, जबकि उन्होंने तमाम सामाजिक सुधार किए हैं। जिसकी चर्चा भी नहीं होती है। विकास से जुड़े पक्षों को भी याद किया जाना चाहिए। विलय के साथ ही महाराजा के शासनकाल के दूसरे पक्ष को भी आम लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए। स्कूलों में महाराजा के योगदान पढ़ाया जाना चाहिए।
समाज सुधार की दिशा में महाराजा के प्रमुख कदम
- जम्मू कश्मीर में बाल विवाह प्रथा को समाप्त किया
- सभी के लिए प्राइमरी शिक्षा अनिवार्य की
- विधवाओं को दूसरी शादी का अधिकार दिया
- सभी वर्ग के लोगों को एक कुएं से पानी लेने का अधिकार
- जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की नींव रखी
- जम्मू कश्मीर बैंक शुरू किया
- भारत के साथ जम्मू कश्मीर का विलय
- मुस्लिम छात्रों के लिए छात्रवृत्ति शुरू की