जम्मू-कश्मीर: बाग-ए-बाहू में लीजिए ओपन एयर सिनेमा का आनंद, सरस उत्सव में 25 राज्यों के कलाकार लेंगे भाग
जम्मू में पहली बार सरस मेला चार फरवरी से शुरू होगा। इस मेले में देशभर के 25 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो अपने यहां की कला-संस्कृति व उत्सव प्रदर्शित करेंगे।
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जम्मू शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल बाग-ए-बाहू में चार फरवरी को सरस 2023 उत्सव (मेले) का आयोजन किया जा रहा है। जेकेआरएलएम और पर्यटन विभाग के सहयोग से करवाए जा रहे इस उत्सव में देशभर के 25 राज्यों की भागीदारी हो रही है। इस उत्सव के पहले दिन शनिवार से प्रतिष्ठित एक्यूप्लेक्स म्यूजिकल वाटर फाउंटेन के साथ ओपन एयर सिनेमा को शुरू किया जा रहा है।
इसमें 60 बाई40 फीट की स्क्रीन पर फिल्मों को दिखाया जाएगा। इसमें क्षेत्रीय भाषा में डोगरी को तवज्जो दी जाएगी। ओपन एयर सिनेमा में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सूर्यपुत्री तवी नदी के किनारे खुले में पहली बार बड़ी स्क्रीन पर फिल्म देखने का मौका मिलेगा। इसका बुधवार को ट्रायल हुआ।
पर्यटन विभाग की ओर से म्यूजिकल वाटर फाउंटेन पर पर्यटन गतिविधियां बढ़ाने के लिए इसे पीपीपी मॉडल पर दिया गया है। ओपन एयर सिनेमा में करीब एक हजार लोगों के बैठने की क्षमता होगी। इससे पहले म्यूजिकल फाउंटेन में शाम के समय ही सिर्फ दो शो चलाए जा रहे थे। लेकिन अब सुबह 10 बजे से रात तक विभिन्न गतिविधियां की जाएंगी।
ओपन थियेटर के साथ पर्यटकों के लिए स्थानीय व्यंजनों (शाकाहारी) को परोसा जाएगा। पर्यटन विभाग जम्मू के निदेशक विवेकानंद राय ने बताया कि पीपीपी मॉडल पर पर्यटन विभाग की विभिन्न संपत्तियों को किया जा रहा है। इसका उद्देश्य निजी खिलाड़ियों के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में बाग-ए-बाहू में अपनी तरह की पहली विशाल स्क्रीन ओपन एयर थियेटर को शुरू किया जा रहा है। ओपन एयर थियेटर की सुविधा ने स्थानीय स्टार्ट अप, फिल्म निर्माताओं, फिल्म पर्यटन, बॉलीवुड के लिए शूटिंग स्थलों आदि का नया मौका दिया है।
उम्मीद है कि बाग-ए-बाहू में नई गतिविधियां शुरू होने से यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी। इसमें मांग के मुताबिक क्षेत्रीय भाषाओं से अलग बॉलीवुड और हॉलीवुड की फिल्मों को भी दिखाया जा सकता है। यह स्थल उद्घाटन समारोह के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
100 रुपये की होगी टिकट
ओपन एयर थियेटर के लिए सामान्य दरों में प्रति व्यक्ति 100 रुपये की टिकट होगी। इसमें पर्यटकों के लिए एक समर्पित ऐप से टिकट ली जा सकती है, जो क्यूआर आधारित होगी। इसके अलावा सीधे आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को संबंधित काउंटर पर टिकट दी जाएगी।
पर्यटन विभाग की ओर से भविष्य में कई पर्यटन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि देश विदेश के पर्यटकों को जम्मू में रोका जा सके। इसमें पर्यटकों का नाइट स्टे बढ़ाने के लिए रात्रि पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
देश की झलकेगी कला-संस्कृति
जम्मू में पहली बार सरस मेला चार फरवरी से शुरू होगा। इस मेले में देशभर के 25 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो अपने यहां की कला-संस्कृति व उत्सव प्रदर्शित करेंगे। जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन (जेकेआरएलएम) की ओर से आयोजित इस मेले में लोगों को न केवल विभिन्न राज्यों के उत्पाद सुलभ हो सकेंगे बल्कि वहां के खानपान से भी परिचित होंगे।
मिशन निदेशक इंदु कंवल चिब ने बताया कि मेला बाग-ए-बाहु स्थित एक्वाप्लेक्स क्राउन में आयोजित है। कुल 75 स्टॉल लगेंगे। हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, झारखंड समेत 25 राज्यों की ओर से अपनी संस्कृति प्रदर्शित की जाएगी।
यहां आने वाले न केवल सामानों की खरीदारी कर सकेंगे बल्कि फूड कोर्ट में विभिन्न राज्यों के खानपान का भी लुत्फ उठा सकेंगे। बताया कि फूड कोर्ट में जम्मू वासी विभिन्न प्रदेशों के खानपान की समृद्ध परंपरा से रूबरू होंगे। जम्मू संभाग के सभी 10 जिलों के साथ ही कश्मीर के भी व्यंजन लोगों के लिए उपलब्ध होंगे।
श्रीखंड, सत्तू, देशी घी के छोला पनीर, देशी गुड़ के खजूर, मूंग दाल का हलवा, साग आदि उपलब्ध होंगे। बताया कि मेले में आयोजन स्थल को अग्निरोधी बनाया गया है। साथ ही बीमा भी कराया गया है। यह व्यवस्था की गई है कि लोगों को कैशलेस सुविधा मिले।
बताया कि सरस आजीविका मेला भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। ऐसे मंचों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं द्वारा अर्जित आय उन्हें सशक्त बनाएंगी।
अतिरिक्त मिशन निदेशक मृदु सलाथिया ने कहा कि मेला प्रतिभागियों को अपने स्वयं के बने उत्पादों को बेचने और बढ़ावा देने के लिए मंच प्रदान करेगा।
बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश
बच्चों मेला स्थल पर बच्चों के मनोरंजन के लिए स्थान तय किया गया है। बच्चे नानी-दादी के जमाने वाले मनोरंजन से परिचित होंगे। यहां मटके बनाना, ब्लॉक निर्माण, पेंटिंग, हार बनाने समेत विभिन्न प्रकार की कलात्मक चीजों का निर्माण सीख सकेंगे। कोशिश होगी कि चकाचौंध की इस दुनिया में बच्चे अपनी जड़ों से परिचित हो सकें।