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Jammu Kashmir Delimitation: जम्मू में आयोग ने की जनसुनवाई, परिसीमन के बाद क्या बदलेगी प्रदेश में राजनीतिक फिजा
Mon, 04 Apr 2022 06:30 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Mon, 04 Apr 2022 06:30 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन के बाद सात सीटें बढ़ने से विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो जाएंगी। इससे जम्मू में 43 और कश्मीर में 47 सीटें हो जाएंगी। सोमवार को आयोग ने अपनी मसौदा रिपोर्ट पर लोगों की अपत्तियों और सुझाव को सुना।
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Delimitation Commission
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जम्मू कश्मीर के लिए बने परिसीमन आयोग ने जम्मू में छह और कश्मीर घाटी में एक विधानसभा सीट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इससे जम्मू में 43 और कश्मीर में 47 सीटें हो जाएंगी। जम्मू-कश्मीर में एसटी के लिए नौ और एससी के लिए सात सीटों का प्रस्ताव है। यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर में एसटी के लिए सीटों को आरक्षित किया जा रहा है। सोमवार को जम्मू कन्वेशन सेंटर में परिसीमन आयोग ने अपनी मसौदा रिपोर्ट पर लोगों की अपत्तियां और सुझाव लिए।
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केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में परिसीमन के बाद सात सीटें बढ़ने से विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 90 हो जाएंगी, जिसका बड़ा फायदा भारतीय जनता पार्टी को हो सकता है। जबकि यह पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इसकी बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि परिसीमन के बाद जम्मू में जो सीटें बढ़ सकती हैं, वहां भाजपा कुछ सालों से खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
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जिला विकास परिषद के चुनाव में कैसे थे परिणाम
पिछले साल जिला विकास परिषद के चुनाव में भाजपा ने जम्मू इलाके की छह परिषदों पर कब्जा जमाया था, जबकि सात पार्टियों वाली पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन पीएजीडी को नौ परिषदों पर जीत हासिल हुई थी। यानी भाजपा ने छह परिषदों पर अकेले अपने दम पर सीटें जीती थीं।
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2019 के लोकसभा चुनाव में क्या हुआ
जानकारों का कहना है कि जम्मू क्षेत्र में सीटों का बढ़ना भाजपा के लिए काफी महत्व रखता है क्योंकि यहां इसका वोट आधार है। इसी वजह से 2019 के लोकसभा चुनाव में हिंदू बहुल जम्मू डिविजन की दो सीटें जम्मू और उधमपुर भाजपा के खाते में गई थी। राज्य की छह लोकसभा सीटों में से भाजपा और पीडीपी ने तीन-तीन सीटें जीती थी। वहीं 2008 के विधानसभा चुनावों से लेकर 2019 के लोकसभा चुनाव तक जम्मू क्षेत्र में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीती थीं 37 सीटें
2014 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में जम्मू क्षेत्र की 37 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 25 पर जीत हासिल की थी। पांच कांग्रेस और पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस को तीन-तीन सीटें मिली थीं। उधर कश्मीर घाटी की 46 विधानसभा चुनाव क्षेत्रों में से पीडीपी को 28 सीटें मिली थीं जबकि नेशनल कांफ्रेंस ने 15 पर जीत हासिल की थी और कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं। बताया जा रहा है कि चुनावों में भाजपा सीटों के बढ़ने को भी एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बना सकती है, ताकि यह उजागर किया जा सके कि कैसे उसने जम्मू क्षेत्र में सीटों को बढ़ाकर कश्मीर क्षेत्र के वर्चस्व को तोड़ने की कोशिश की।
क्या होता है परिसीमन
विधायी निकाय वाले क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की प्रक्रिया परिसीमन कहलाती है। परिसीमन का काम किसी उच्चाधिकार निकाय को दिया जाता है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद प्रदेश में एक बार फिर परिसीमन के लिए आयोग बनाया गया है। इस बार सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन किया गया है।
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन कब हुआ था
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में हुआ था। उस समय जम्मू-कश्मीर में 12 जिले और 58 तहसीलें हुआ करती थीं। वर्तमान में प्रदेश में 20 जिले हैं और 270 तहसील हैं। पिछला परिसीमन 1981 की जनगणना के आधार पर हुआ था। इस बार परिसीमन आयोग 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का काम कर रहा है।
परिसीमन में किन चीजों का रखा जाता है ख्याल
विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में जनसंख्या मुख्य आधार रहता ही है। इसके अलावा क्षेत्रफल, भौगोलिक परिस्थिति, संचार की सुविधा आदि पर भी गौर किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में अब तक 1963, 1973 व 1995 में परिसीमन की प्रक्रिया हुई है।