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Jammu Kashmir Border Villages: नहीं सताएगा पाकिस्तान की गोलाबारी का खौफ, सैरगाह बनेंगे 124 सीमावर्ती गांव

Wed, 09 Jul 2025 12:42 PM IST
निकिता गुप्ता राकेश शर्मा अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
राकेश शर्मा अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Wed, 09 Jul 2025 12:42 PM IST
सार

केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत जम्मू-कश्मीर के 124 सीमावर्ती गांवों को पर्यटन और विकास के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत 24 घंटे बिजली, इंटरनेट, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण और सुरक्षा जैसी सुविधाएं होंगी। 

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Jammu Kashmir Border Villages: Fear of Pakistani shelling will not haunt you, 124 border villages will become
सीमावर्ती गांव (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान से सटे भारतीय इलाकों की तकदीर बदलने वाली है। केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में जम्मू-कश्मीर के आठ सीमावर्ती जिलों के 124 गांवों का चयन किया है। इनमें जम्मू, राजोरी, पुंछ, कठुआ, कुपवाड़ा, बारामुला, बांदीपोरा और रियासी शामिल हैं।

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केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पाकिस्तान से होने वाली गोलाबारी से बाहर निकलकर इन गांवों को सैरगाह बनाने की तैयारी में है। सीमावर्ती इलाकों के ये गांव पर्यटन केंद्र के तौर पर उभरेंगे और सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए आंख व कान का काम करेंगे। केंद्र सरकार ने 15 राज्यों व दो केंद्र शासित प्रदेशों में 2029 तक के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को लांच किया है। 

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जम्मू-कश्मीर को पहली बार किया गया शामिल, सीमावर्ती विकास को मिलेगा नया आयाम
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का यह दूसरा चरण है और इसमें जम्मू-कश्मीर को पहली बार शामिल किया गया है। खास बात यह है कि इसमें सौ फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है। सीमावर्ती इलाकों में होने वाले बदलाव को लेकर प्रदेश सरकार को बजट खर्च करने की आवश्यकता नहीं है।

जम्मू संभाग का करीब 192 किलोमीटर क्षेत्र पाकिस्तान से सटा हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने रिहायशी इलाकों को अपना निशाना बनाया था। इससे इन जिलों में भारी नुकसान हुआ है। अब केंद्र सरकार की इस योजना से ग्रामीणों के जख्मों पर मरहम लगाने की तैयारी है। 

24 घंटे मोबाइल सिग्नल और बिजली 
सीमावर्ती इलाकों में भविष्य में न तो मोबाइल सिग्नल बंद होगा और न ही बिजली गुल होगी। केंद्र सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में इन इलाकों को 24 घंटे बिजली व मोबाइल इंटरनेट से जोड़ने की तैयारी की है। बिजली सौर ऊर्जा से तैयार होगी। इसके लिए नोडल अधिकारी ग्रामीण सुझाव प्रदेश सरकार तक पहुंचाएगा। केंद्र ने इस प्रयास के माध्यम से पर्यटकों को सीमावर्ती इलाकों तक आकर्षित करने की तैयारी है। 

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सीमावर्ती गांवों में खुलेंगे बहुद्देशीय केंद्र
बहुद्देशीय केंद्र और स्वास्थ्य सहित वेलनेस सेंटर भीसीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों में बहुद्देशीय केंद्र और स्वास्थ्य सहित वेलनेस सेंटर भी खोले जाएंगे। इससे लोगों की निर्भरता बाहर के अस्पतालों पर कम हो जाएगी। बहुद्देशीय केंद्र की मदद से स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण हासिल होगा। इससे उनके रोजगार की राह आसान होगी।

जिलास्तर पर बनेगा प्लान, राज्य स्तर पर होगा एक्शन
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव एम राजू के अनुसार, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को लेकर केंद्र और प्रदेश के बीच समन्वय के लिए योजना विकास व निगरानी विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। प्रदेश और जिलास्तर पर दो अलग-अलग समितियों का गठन किया गया है।

प्रदेश स्तर की समिति का संचालन मुख्य सचिव की अगुवाई में हो रहा है। जिलास्तर पर गठित समिति की बागडोर सभी आठ जिलों के उपायुक्तों को सौंपी गई है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चयनित होने वाले सभी प्रोजेक्ट के लिए जिलास्तरीय समिति जवाबदेह होगी।

जिलास्तर पर योजना, एक्शन प्लान, सीमा सुरक्षाबलों से तालमेल का काम जिला स्तरीय समिति करेगी। इसकी रिपोर्ट उपायुक्त प्रदेश स्तरीय समिति को प्रस्तुत करेंगे। प्रदेश स्तरीय समिति इस योजना को सिरे चढ़ाएगी।

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