Jammu Kashmir: लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत, नहाय-खाय के साथ व्रती महिलाओं ने शुरू किया व्रत
लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत हुई, नहाय-खाय के साथ व्रती महिलाओं ने व्रत का संकल्प लिया और खरना पूजन की तैयारी शुरू की।
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नहाय-खाय के साथ लोक आस्था के महापर्व छठ की मंगलवार से शुरुआत हो गई है। चार दिवसीय इस पर्व के पहले दिन व्रती महिलाओं ने स्नान के बाद छठ व्रत का संकल्प लिया। इसके बाद अरवा चावल का भात, चने की दाल और कद्दू (लौकी) की सब्जी का भोग लगाया और खुद भी ग्रहण किया। इसमें परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल रहे।
नहाय-खाय के बाद व्रती महिलाएं खरना की तैयारी में जुट गईं। इस दौरान व्रतियों ने खरना के लिए गेहूं धोकर सुखाया और मिट्टी के चूल्हे को अंतिम रूप दिया। इस दौरान घरों में छठ के गीत भी बजते रहे। व्रतियों ने बताया कि नहाय-खाय के साथ ही उनकी कठिन परीक्षा शुरू हो गई है। उन्हें पूरा भरोसा है कि छठी मईया के आशीर्वाद से उनका व्रत सहज तरीके से संपन्न हो जाएगा।महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को खरना पूजन किया जाएगा। वहीं, रात को भोजन करने के बाद महिलाओं का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा, जोकि 36 घंटे तक चलेगा।
मनोकामना पूरी करने के लिए भरी जाती है कोसी
छठ महापर्व पर अपनी मन्नत पूरी करने के लिए कोसी भरने की भी परंपरा है। मान्यताओं के अनुसार किसी मनोकामना की पूर्ति लिए कोसी भरने का संकल्प लिया जाता है। साथ ही छठ पूजा के दौरान मइया का आभार जताया जाता है। कोसी बनाने के लिए सबसे पहले छठ पूजा की टोकरी को एक स्थान पर रखकर इसे चारों ओर चार या सात गन्ने की मदद से एक छत्र बनाया जाता है।
गन्ने को खड़ा करने से पहले उसके ऊपरी हिस्से पर एक लाल कपड़े में ठेकुआ और फल आदि रखे जाते हैं। अब इसके अंदर मिट्टी का हाथी रखा जाता है और उसके ऊपर एक घड़ा रखा जाता है। फिर इस घड़े में फल और ठेकुआ, सुथनी, मूली और अदरक आदि सामग्री रखी जाती है। इस दौरान कुछ लोग कोसी के अंदर 12 या फिर 24 दीपक भी जलाते हैं। इसके बाद महिलाएं पारंपरिक छठ के गीत गाती हैं। अंत में कोसी में धूप आदि रखकर हवन किया जाता है और में छठी मइया से मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कामना की जाती है।
हर मन्नत पूरी करती हैं मइया, कइयों को दिया आशीर्वादबलिया (उत्तर प्रदेश) निवासी ब्रजेश निवासी बीस सालों से बाड़ी ब्राह्मणा के वीरपुर कॉम्प्लेक्स में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद पत्नी ने मृत बच्चों को जन्म दिया। इससे पूरा परिवार परेशान रहता था। पड़ोसियों के कहने उन्होंने छठी मइया से संतान की मन्नत मांगी। मइया ने पहली बार में ही उनकी सुन ली और बेटे के रूप में अपना आशीर्वाद दिया। तभी से वह हर साल छठी मइया की कोसी भर रहे हैं। मइया दिल से मानने वालों की हर इच्छा पूरी करती हैं।
शहर के प्रीत नगर में रहने वाले मुकेश कुमार ने बताया कि 2011 में शादी हुई थी। इसके बाद उनकी दो बेटियां हुईं। परिवार की इच्छा थी कि एक बेटा भी हो। इसी मन्नत के साथ पत्नी ने छठ पूजा की। सबकी तरह मइया ने उनकी भी सुन ली और 2019 में घर में बेटा हुआ। जन्म के बाद उन्होंने पहली कोसी बेंड-बाजों के साथ धूमधाम से भरी थी। उसके बाद भी हर साल पूरी श्रद्धा से छठी मइया का व्रत रखते हैं और कोसी भी भरते हैं।