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जम्मू-कश्मीर : खरपतवार बनी सौगात, जंगली गेंदे से रोज तीन हजार कमाई, खेती को बढ़ावा देने की योजना
Mon, 13 Dec 2021 01:39 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Dec 2021 01:39 AM IST
सार
इस सीजन में जंगली गेंदे से 250 लीटर तेल निकाला जा चुका है। अब 300 किसानों को जंगली गेंदे का बीज देकर इसकी खेती को बढ़ावा देने की योजना है।
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- फोटो : Istock
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विस्तार
भद्रवाह में किसान जिस खरपतवार से परेशान थे, आज वही जंगली गेंदा उन्हें अच्छी आमदनी दिला रहा है। वर्तमान में स्थानीय लोग जंगली गेंदे के तुड़ान से रोजाना एक से तीन हजार रुपये कमा रहे हैं। इस सीजन में जंगली गेंदे से 250 लीटर तेल निकाला जा चुका है। अब 300 किसानों को जंगली गेंदे का बीज देकर इसकी खेती को बढ़ावा देने की योजना है। भद्रवाह में इससे पूर्व लैवेंडर और गेंदे की खेती से किसान अच्छी आय ले चुके हैं।
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भद्रवाह में लैवेंडर की खेती से बैंगनी क्रांति लाने वाले पुरस्कार विजेता किसान तौकीर बागबान ने बताया कि नवंबर में कटाई का सीजन खत्म होने के बाद किसानों के पास कोई काम नहीं रहता था। अरोमा मिशन के तहत सीएसआईआर के सहयोग से अब स्थानीय लोग घर के आसपास और बंजर भूमि पर उगे जंगले गेंदे के तुड़ान से रोजाना एक से तीन हजार रुपये कमा रहे हैं। तौकीर ने बताया कि वह दिल्ली गए थे। वहां सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने उन्हें बताया कि भद्रवाह में बड़े पैमाने पर जंगली गेंदा खरपतवार के रूप में उगा हुआ है। इससे तेल निकालकर किसान अपनी आय में सुधार कर सकते हैं। तौकीर ने बताया कि जंगली गेंदे का तेल लैवेंडर की तुलना में दोगुना महंगा है।
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100 क्विंटल फूल किए एकत्रित
तौकीर ने बताया कि जेके अरोमा ने लोगाें की मदद से चिंता, मंथाला, मठोला, डुग्गी, डांडी, थनहाला, बस्ती, भाला, बटला और सेरी गांवों से जंगली गेंदे के 100 क्विंटल फूल एकत्रित किए। शुरुआत में कई शंकाएं थीं, लेकिन इससे 250 लीटर तेल निकला। इसकी कीमत लैवेंडर से दोगुनी मिली। कल तक खरपतवार कहे जाने वाले जंगली गेंदे के अब 300 किसानों को बीज वितरित किए जाएंगे।
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बटला गांव के रहने वाले बचन सिंह ने कहा कि कोरोना ने दो वर्ष की पाबंदियों में आर्थिक नुकसान पहुंचाया, लेकिन अब घर के पास ही उनके परिवार को पिछले एक माह से रोजाना दो से तीन हजार रुपये की आय हो रही है। सभी मिलकर जंगली गेंदे के फूल एकत्रित कर रहे हैं। वहीं मठोला गांस की 19 वर्षीय श्वेता रानी ने कहा कि खरपतवार हमारे लिए सौगात बन गई है। आर्थिक नुकसान के चलते पढ़ाई तक छोड़ने की तैयारी थी। अब किसी तरह की चिंता नहीं है।
कई मर्ज की एक दवा है जंगली गेंदा
दक्षिण अमेरिका का पौधा जंगली गेंदा कई मर्ज की दवा है। इसके तेल से छाती से जुड़े संक्रमण, जुकाम, सांस से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं। इसके अलावा चमड़ी के रोग को ठीक करने और घाव को जल्दी भरने में जंगली गेंदे का तेल सहायक है।