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जम्मू-कश्मीर : वनों के विस्तार के लिए 233 करोड़ की मंजूरी, आईटी आधारित तकनीक से बढ़ेगा वृक्षारोपण

Sat, 27 Feb 2021 10:26 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sat, 27 Feb 2021 10:26 AM IST
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Jammu-Kashmir: 233 crore has been approved for the expansion of forests
प्रतीकात्मक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर में वनों के विस्तार के लिए आईटी आधारित तकनीक को उपयोग में लाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग आधुनिक जीआईस, जीपीएस, आईसीटी, ड्रोन और मोबाइल एप को इस्तेमाल में लाएगा। वनों के डिजिटल मानचित्र तैयार करने के साथ वास्तविक निगरानी को सुनिश्चित बनाया जाएगा। मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने शुक्रवार को कंपनसेटरी एफारेस्ट्रेशन फंड मैनेजमेंट व प्लानिंग अथॉरिटी (कैं पा) की स्टीरिंग कमेटी की बैठक में वन क्षेत्र के विस्तार के लिए कई दिशा निर्देश दिए। इसमें वार्षिक योजना ऑपरेशन (एओपीएस) वर्ष 2021-22 के लिए कई फैसले लिए गए।

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इसमें प्रमुख रूप से जम्मू और कश्मीर वन व संबद्ध विभागों के लिए 233 करोड़ रुपये के परिव्यय की वार्षिक योजना संचालन (एपीओ) को मंजूरी दी गई। अनुमोदित एपीओ ने 74.47 लाख पौधों के रोपण के साथ 13926 हेक्टेयर क्षेत्र के वनीकरण की परिकल्पना की है। इसमें पौधों का उत्पादन, क्षति की संख्या, जंगल की आग की रोकथाम और नियंत्रण आदि गतिविधियां शामिल हैं। बैठक में बताया गया कि वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सीमाओं का डिजिटाइजेशन, अग्नि सुरक्षा तंत्र, वन क्षति रिपोर्टिंग में आईटी तकनीक का उपयोग आदि पहल की गई है।
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विशेष परियोजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने विशेष रूप से रामबन बनिहाल खंड में एनएच-44 पर वुलर झील के कैचमेंट क्षेत्र के विस्तार, तोसामिदान के पुनर्वास और स्लिप क्षेत्रों के स्थिरीकरण पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। दोनों डिवीजनों में शहर के जंगलों को विकसित करने के साथ औद्योगिक एस्टेट, सड़कों और स्कूलों सहित सार्वजनिक भवनों के आसपास वृक्षारोपण करने को कहा गया।
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बताया गया कि विभाग ने कैंपा के कार्यों के निष्पादन की बारीकी से निगरानी करने के लिए एक प्रभावी निगरानी तंत्र बनाया है। इसमें क्षेत्र स्तरीय निरीक्षण, विभागीय निगरानी समितियां, विभागीय वेबसाइट पर जीपीएस निर्देशांक, कैंपा कार्यों का तृतीय पक्ष मूल्यांकन और ग्राम पंचायत समितियों की भागीदारी शामिल है। वास्तविक समय के आधार पर प्रगति की निगरानी के लिए एक समर्पित कैंपा पोर्टल बनाया जा रहा है। वन विभाग सीड बाल के उपयोग के माध्यम से वनों में कम लागत से विस्तार के नवाचारों पर काम कर रहा है।

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