फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu : Infiltration through tunnel by cutting fencing on the border

Jammu News : सरहद पर फेंसिंग काटकर सुरंग के रास्ते घुसपैठ, अब ड्रोन से तस्करी की चुनौती

Sun, 09 Oct 2022 12:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 09 Oct 2022 12:44 AM IST
सार

Jammu News : भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा नब्बे के दशक से ही घुसपैठ को लेकर संवेदनशील रही है। पिछले तीन दशक में पाकिस्तान ने हर बार पैंतरे बदलकर घुसपैठ करवाने की कोशिशें की हैं।

विज्ञापन
Jammu : Infiltration through tunnel by cutting fencing on the border
भारत-पाक सीमा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा नब्बे के दशक से ही घुसपैठ को लेकर संवेदनशील रही है। पिछले तीन दशक में पाकिस्तान ने हर बार पैंतरे बदलकर घुसपैठ करवाने की कोशिशें की हैं। तीन दशक के बीच सीमा पर नदी नालों से फिर तारबंदी को काटकर और उसके बाद सुरंगों के जरिए घुसपैठ की गई। अब आसमान के रास्ते हो रही घुसपैठ सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। 

विज्ञापन


सुरक्षा एजेंसियां छिटपुट आतंकी वारदातों के बीच बड़े मामलों को विफल करने में लगातार जुटी हुई हैं लेकिन ड्रोन खतरे के जून 2020 में पहले बार सामने आने के लगभग सवा दो साल के बाद भी सुरक्षा एजेंसियों के पास इसका तोड़ सामने नहीं आ रहा है। वारदात होने के बाद ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए ही वर्तमान में ड्रोन गतिविधियों की जानकारी मिल पा रही है। जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। 
विज्ञापन


जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने के लिए पाकिस्तान ने हर संभव प्रयास पिछले 32 वर्षों में किया है। शुरूआती दौर में हीरानगर और सांबा सेक्टर के दरियाई नालों का प्रयोग कर खुले रास्तों से घुसपैठ की जाती रही। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद कठुआ और उधमपुर जिले के पहाड़ी इलाकों को पार कर आतंकी तय रूट से घाटी तक पहुंचते रहे। दशक भर बाद सख्ती बढ़ी तो वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव से पहले आतंकियों ने हीरानगर में फिदायीन हमले के साथ अपनी बदली हुई रणनीति साफ कर दी। इसके बाद तारबंदी काटकर तो कभी अज्ञात रास्तों से घुसपैठ कर सुरक्षा संस्थानों को निशाना बनाया जाता रहा। 

हीरानगर पुलिस थाने, राजबाग पुलिस थाने समेत जंगलोट सैन्य क्षेत्र और सांबा सैन्य क्षेत्र को भी आतंकियों ने निशाना बनाया जिन्हें सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया। पाकिस्तान ने वर्ष 2016 में राजबाग पुलिस थाने पर फिदायीन हमले के बाद से अपनी रणनीति फिर बदल ली। अब आतंकियों की घुसपैठ सुरंगों के रास्ते करवाई जाने लगी। फिर आतंकियों ने हीरानगर और सांबा सेक्टर को अपना सेफ रूट बना लिया। अब हाईवे तक पहुंचकर ट्रकों के जरिए कश्मीर पहुंचने का नया तरीका अपनाया गया लेकिन  झज्जर कोटली, बन्न टोल प्लाजा पर हुए इनकाउंटरों में इसका खुलासा हो गया। 

2020 के जून महीने में पाकिस्तान ने चीनी ड्रोन की मदद से घुसपैठ का नया तरीका खोजा। इस बार मानव घुसपैठ की जगह पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में स्लीपर सेल एक बार फिर सक्रिय कर दिए हैं। जिन्हें सोशल मीडिया के जरिए संचालित किया जा रहा है। बिना हथियारों के इनकी मूवमेंट भी संदेह में नहीं आती। स्लीपर सेल को पाकिस्तान ने ड्रोन से गिराए जाने वाले मादक पदार्थों और हथियारों की खेप कश्मीर घाटी तक पहुंचाने का जरिया बना लिया। 


स्टिकी बम के जरिए इन स्लीपर सेल का ब्रेन वॉश कर अब इन्हें कश्मीर में पूर्व में होने वाले ग्रेनेड हमलों की तरह स्टिकी बम हमले करने के लिए तैयार किया जा रहा है। लेकिन इस सब के बीच आसमान के रास्ते लगातार हीरानगर और सांबा सेक्टर से पहुंच रही हथियारों की खेप को नियंत्रित या निष्क्रिय करने की व्यवस्था का अभाव भी सामने आ रहा है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed