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Jammu News: भगवान करते हैं भक्तों के विश्वास की रक्षा
Mon, 08 Apr 2024 02:25 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 08 Apr 2024 02:25 AM IST
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मढ़ विधानसभा क्षेत्र के गंगवा परवाह में श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन
कथावाचक ने सुनाई भक्त ध्रुव की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। जब भक्तों के अंदर विश्वास, अनुराग और समर्पण का भाव होता है, तब ईश्वर क्षण भर भी प्रतीक्षा नहीं करवाते हैं और दर्शन देते हैं। भक्तों के विश्वास की रक्षा परमात्मा स्वयं करते हैं। यह ज्ञान कथावाचक संजीव भारद्वाज ने मढ़ विधानसभा के गंगवा परवाह गांव में जारी श्रीमद्भावत कथा के तीसरे दिन संगत को दिया।
इस दौरान उन्होंने भक्त ध्रुव की कथा सुनाई। बताया कि ध्रुव ने बाल्यावस्था में जंगल में जाकर ईश्वर का ध्यान लगाया तो भगवान ने उन्हें दर्शन दिए। संजीव भारद्वाज ने कहा कि जब भगवान भक्त के वश में होते हैं तो बहुत सारी लीलाएं कराते हैं। भक्त जब-जब ईश्वर को अनुराग व समर्पण के साथ पुकारता है तो भगवान क्षण मात्र भी देर नहीं करते बल्कि नंगे पैर ही दौड़े चले आते हैं। कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कथाव्यास ने कहा कि भगवान के चरित्र के श्रवण से व्यक्ति का लोक और परलोक दोनों संवर जाते हैं। श्रीमद्भागवत के श्रवण मात्र से जीव के सभी पापों का नाश हो जाता है और उसकी संसार में बार-बार के आवागमन कुचक्र से मुक्ति मिलती है।
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कथावाचक ने सुनाई भक्त ध्रुव की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। जब भक्तों के अंदर विश्वास, अनुराग और समर्पण का भाव होता है, तब ईश्वर क्षण भर भी प्रतीक्षा नहीं करवाते हैं और दर्शन देते हैं। भक्तों के विश्वास की रक्षा परमात्मा स्वयं करते हैं। यह ज्ञान कथावाचक संजीव भारद्वाज ने मढ़ विधानसभा के गंगवा परवाह गांव में जारी श्रीमद्भावत कथा के तीसरे दिन संगत को दिया।
इस दौरान उन्होंने भक्त ध्रुव की कथा सुनाई। बताया कि ध्रुव ने बाल्यावस्था में जंगल में जाकर ईश्वर का ध्यान लगाया तो भगवान ने उन्हें दर्शन दिए। संजीव भारद्वाज ने कहा कि जब भगवान भक्त के वश में होते हैं तो बहुत सारी लीलाएं कराते हैं। भक्त जब-जब ईश्वर को अनुराग व समर्पण के साथ पुकारता है तो भगवान क्षण मात्र भी देर नहीं करते बल्कि नंगे पैर ही दौड़े चले आते हैं। कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कथाव्यास ने कहा कि भगवान के चरित्र के श्रवण से व्यक्ति का लोक और परलोक दोनों संवर जाते हैं। श्रीमद्भागवत के श्रवण मात्र से जीव के सभी पापों का नाश हो जाता है और उसकी संसार में बार-बार के आवागमन कुचक्र से मुक्ति मिलती है।
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