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Jammu News: वन्यजीव हत्या मामले में राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज के खिलाफ मामला रद्द करने से इनकार
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20216 में लेह पुलिस ने निशानेबाज अर्जुन बलराज मेहता के खिलाफ दर्ज की थी एफआईआर
जम्मू। न्यायमूर्ति एमए चौधरी ने राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज अर्जुन बलराज मेहता के खिलाफ एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। इसमें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा और शस्त्र अधिनियम की धारा के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए लेह पुलिस स्टेशन द्वारा मामला दर्ज किया गया था।
याचिकाकर्ता ने पुलिस स्टेशन लेह में दर्ज एफआईआर संख्या 15/2016 को चुनौती दी है। इस इस आधार पर रद्द करने की मांग की है कि एफआईआर में लगाए गए आरोप बेतुके और स्वाभाविक रूप से असंभव हैं। कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। याचिकाकर्ता ने कभी किसी जंगली जानवर की हत्या न की है और न ही उसका शिकार करने का प्रयास किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लेह द्वारा 20 अप्रैल 2016 में जमानत दी थी। ऐसे में उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। पुलिस ने कोई भी मृत जानवर या अवशेष बरामद नहीं किया था। यह एफआईआर लगभग चार साल पहले दर्ज की गई थी और तब से यह मामला जांच में है क्योंकि एफआईआर में कोई तथ्य नहीं है। इससे उसे परेशान करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। याचिकाकर्ता के वकील अंकुर शर्मा और केंद्रशासित प्रदेश लेह के वकील डीएसजीआई विशाल शर्मा को सुनने के बाद न्यायमूर्ति एमए चौधरी ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील का यह तर्क कि मारे गए जानवर के शव या अवशेष बरामद या जब्त नहीं किए गए हैं। इसका कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यहां तक कि हत्या का प्रयास भी एक अपराध है और अन्यथा भी यह परीक्षण के दौरान विचार किया जाने वाला एक तथ्यात्मक मामला होगा। जहां तक संज्ञान के लिए उठाई गई याचिका का सवाल है, वह भी इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए समय से पहले प्रतीत होती है कि आरोप पत्र अभी तक सक्षम अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया है और याचिकाकर्ता को उन सभी याचिकाओं को उठाने का पूरा अधिकार होगा। जेएनएफ
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जम्मू। न्यायमूर्ति एमए चौधरी ने राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज अर्जुन बलराज मेहता के खिलाफ एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया है। इसमें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा और शस्त्र अधिनियम की धारा के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए लेह पुलिस स्टेशन द्वारा मामला दर्ज किया गया था।
याचिकाकर्ता ने पुलिस स्टेशन लेह में दर्ज एफआईआर संख्या 15/2016 को चुनौती दी है। इस इस आधार पर रद्द करने की मांग की है कि एफआईआर में लगाए गए आरोप बेतुके और स्वाभाविक रूप से असंभव हैं। कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। याचिकाकर्ता ने कभी किसी जंगली जानवर की हत्या न की है और न ही उसका शिकार करने का प्रयास किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लेह द्वारा 20 अप्रैल 2016 में जमानत दी थी। ऐसे में उनके खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। पुलिस ने कोई भी मृत जानवर या अवशेष बरामद नहीं किया था। यह एफआईआर लगभग चार साल पहले दर्ज की गई थी और तब से यह मामला जांच में है क्योंकि एफआईआर में कोई तथ्य नहीं है। इससे उसे परेशान करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। याचिकाकर्ता के वकील अंकुर शर्मा और केंद्रशासित प्रदेश लेह के वकील डीएसजीआई विशाल शर्मा को सुनने के बाद न्यायमूर्ति एमए चौधरी ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील का यह तर्क कि मारे गए जानवर के शव या अवशेष बरामद या जब्त नहीं किए गए हैं। इसका कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यहां तक कि हत्या का प्रयास भी एक अपराध है और अन्यथा भी यह परीक्षण के दौरान विचार किया जाने वाला एक तथ्यात्मक मामला होगा। जहां तक संज्ञान के लिए उठाई गई याचिका का सवाल है, वह भी इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए समय से पहले प्रतीत होती है कि आरोप पत्र अभी तक सक्षम अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया है और याचिकाकर्ता को उन सभी याचिकाओं को उठाने का पूरा अधिकार होगा। जेएनएफ
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