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जम्मू बस स्टैंड धमाके में शामिल आतंकी की उम्र में उलझी पुलिस, जांच कराने की तैयारी
Sat, 09 Mar 2019 01:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 09 Mar 2019 01:31 AM IST
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जम्मू बस स्टैंड ब्लास्ट में पकड़ा गया आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू बस स्टैंड पर ग्रेनेड हमला करने वाले आतंकी की उम्र का पेंच फंसता हुआ नजर आ रहा है। आतंकी से पूछताछ करने वाली जांच एजेंसियों को कुछ रिकार्ड मिले हैं, जिससे यह पता चल रहा है कि वह अभी बालिग नहीं हुआ है। हालांकि अधिकारिक तौर पर इसकी कोई पुष्टि नहीं की जा रही है।
जानकारी के अनुसार ग्रेनेड फेंकने वाले यासिर से उसका आधार कार्ड, कुछ पहचान पत्र और स्कूल का रिकार्ड मिला है, जिसमें उसकी आयु 16 साल से कम बताई जा रही है। आरोपी आतंकी की जन्मतिथि 12 मार्च 2003 बताई जा रही है।
इस संबंध में जब एक पुलिस अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी इन दस्तावेजों की जांच होगी। बोलचाल और हावभाव देखकर वह नाबालिग तो नहीं लग रहा है। इसलिए पुलिस आतंकी की उम्र का टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है।
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नाबालिगों को बना रहे ढाल
यदि बस स्टैंड पर हमला करने वाला आतंकी नाबालिग निकलता है तो यह एक बड़ी चुनौती होगी। आतंकी नाबालिगों का इस्तेमाल करने लगे हैं, ताकि वे हमला करने के बाद कानून से बच सकें। नाबालिगों के लिए कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान कम है। आतंकी जानबूझ कर ऐसी रणनीति पर काम कर रहे हैं, ताकि नाबालिगों को ग्रेनेड देकर हमला कराया जाए। वर्ष 2000 में भी आतंकी संगठनों ने इसी तरह की रणनीति अपनाकर सुरक्षाबलों पर हमले किए थे, लेकिन 2009 में जब अभिभावकों की काउंसलिंग की गई तो इस पर रोक लग गई। यदि आरोपी आतंकी की आयु कम निकलती है, तो यह खतरे की घंटी है।
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जानकारी के अनुसार ग्रेनेड फेंकने वाले यासिर से उसका आधार कार्ड, कुछ पहचान पत्र और स्कूल का रिकार्ड मिला है, जिसमें उसकी आयु 16 साल से कम बताई जा रही है। आरोपी आतंकी की जन्मतिथि 12 मार्च 2003 बताई जा रही है।
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इस संबंध में जब एक पुलिस अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी इन दस्तावेजों की जांच होगी। बोलचाल और हावभाव देखकर वह नाबालिग तो नहीं लग रहा है। इसलिए पुलिस आतंकी की उम्र का टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है।
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नाबालिगों को बना रहे ढाल
यदि बस स्टैंड पर हमला करने वाला आतंकी नाबालिग निकलता है तो यह एक बड़ी चुनौती होगी। आतंकी नाबालिगों का इस्तेमाल करने लगे हैं, ताकि वे हमला करने के बाद कानून से बच सकें। नाबालिगों के लिए कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान कम है। आतंकी जानबूझ कर ऐसी रणनीति पर काम कर रहे हैं, ताकि नाबालिगों को ग्रेनेड देकर हमला कराया जाए। वर्ष 2000 में भी आतंकी संगठनों ने इसी तरह की रणनीति अपनाकर सुरक्षाबलों पर हमले किए थे, लेकिन 2009 में जब अभिभावकों की काउंसलिंग की गई तो इस पर रोक लग गई। यदि आरोपी आतंकी की आयु कम निकलती है, तो यह खतरे की घंटी है।