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Jammu News: प्रदेश में 6839 राजस्व गांवों की जमाबंदियों का डिजिटलीकरण
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भूमि अभिलेखों के सत्यापन के लिए वेब-आधारित एप्लीकेशन विकसित
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने बताया कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत भूमि अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण के तहत जम्मू-कश्मीर में 6839 राजस्व गांवों की जमाबंदियों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।
यह जानकारी उन्होंने विधायक रणबीर सिंह पठानिया के सवाल का जवाब में दी। उन्होंने सदन को बताया कि भूमि अभिलेखों के संबंध में लागू नियमों और मानदंडों के अनुसार जमाबंदियों को त्रुटि मुक्त बनाने के लिए डिजिटलीकरण के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा नवीनतम जमाबंदियों को अपडेट करना, तहसील टीमों द्वारा जमाबंदियों की डाटा प्रविष्टि की गुणवत्ता जांच, संबंधित तहसीलदार द्वारा डाटा की जांच और प्रमाणीकरण, संबंधित पटवारी व डाटा प्रविष्टि आपरेटर व अन्य राजस्व अधिकारियों द्वारा राजस्व रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, संबंधित गिरदावर व नायब तहसीलदार द्वारा डिजिटलीकृत डेटा की गुणवत्ता जांच रिकॉर्ड को त्रुटि-रहित बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
डिजिटाइज्ड भूमि अभिलेखों के सत्यापन के लिए वेब-आधारित एप्लीकेशन विकसित की गई है, जिसमें स्कैन किए गए दस्तावेजों का सत्यापन, डिजिटाइज्ड जमाबंदियों का सत्यापन और मानचित्रों का सत्यापन सहित चार मॉड्यूल हैं। सभी क्षेत्रीय अधिकारियों (पटवारी से लेकर जिला उपायुक्तों तक) को अभिलेखों के सत्यापन की अनुमति दी गई है। सभी जिला उपायुक्तों को डिजिटाइज्ड जमाबंदियों में टाइपोग्राफिकल त्रुटियों और अधूरे डेटा एंट्री जैसी त्रुटियों को दूर करने के लिए अधिकृत किया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने बताया कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत भूमि अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण के तहत जम्मू-कश्मीर में 6839 राजस्व गांवों की जमाबंदियों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।
यह जानकारी उन्होंने विधायक रणबीर सिंह पठानिया के सवाल का जवाब में दी। उन्होंने सदन को बताया कि भूमि अभिलेखों के संबंध में लागू नियमों और मानदंडों के अनुसार जमाबंदियों को त्रुटि मुक्त बनाने के लिए डिजिटलीकरण के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा नवीनतम जमाबंदियों को अपडेट करना, तहसील टीमों द्वारा जमाबंदियों की डाटा प्रविष्टि की गुणवत्ता जांच, संबंधित तहसीलदार द्वारा डाटा की जांच और प्रमाणीकरण, संबंधित पटवारी व डाटा प्रविष्टि आपरेटर व अन्य राजस्व अधिकारियों द्वारा राजस्व रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, संबंधित गिरदावर व नायब तहसीलदार द्वारा डिजिटलीकृत डेटा की गुणवत्ता जांच रिकॉर्ड को त्रुटि-रहित बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
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डिजिटाइज्ड भूमि अभिलेखों के सत्यापन के लिए वेब-आधारित एप्लीकेशन विकसित की गई है, जिसमें स्कैन किए गए दस्तावेजों का सत्यापन, डिजिटाइज्ड जमाबंदियों का सत्यापन और मानचित्रों का सत्यापन सहित चार मॉड्यूल हैं। सभी क्षेत्रीय अधिकारियों (पटवारी से लेकर जिला उपायुक्तों तक) को अभिलेखों के सत्यापन की अनुमति दी गई है। सभी जिला उपायुक्तों को डिजिटाइज्ड जमाबंदियों में टाइपोग्राफिकल त्रुटियों और अधूरे डेटा एंट्री जैसी त्रुटियों को दूर करने के लिए अधिकृत किया गया है।
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