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‘डेथ वैली’ बनती जा रही जम्मू कश्मीर की चिनाब वैली

Wed, 30 Sep 2015 09:31 PM IST
Updated Wed, 30 Sep 2015 09:31 PM IST
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jammu and kashmir's Chenab valley remains death valley '

चिनाब वैली नाम से मशहूर जिले को डेथ वैली कहा जाए तो इसमें आश्चर्य नहीं होगा। भूकंपों और हाईवे पर हादसे आए दिन जिले को दहलाते हैं। वर्ष 2013 से भूकंपों का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है।

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लेकिन पिछले एक साल में तो भूकंपों ने लोगों के दिलों में ऐसी दहशत फैलाई कि जो अब जाने का नाम नहीं ले रही है। अब डोडा-बटोत राष्ट्रीय राजमार्ग भी लोगों के बीच मौत का हाईवे बनता जा रहा है।
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इस हाईवे और इससे जुड़ने वाले मार्ग भूकंपों और भारी बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया है। इन मार्गों पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के एक तरफ गहरी खाई है और चिनाब दरिया है।
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जब भी कोई हादसा होता है तो इसमें भारी जानमाल के नुकसान की पूरी आशंका होती है। हादसे के दौरान वाहन अक्सर खाई और चिनाब में गिर जाते हैं।

डोडा, भद्रवाह, किश्तवाड़, ठाठरी, मडवा, दच्छन, पाडर आदि इलाकों के लोग संपर्क मार्गों और हाईवे पर जान हथेली पर रखकर निकलते हैं। हाईवे समेत ये मार्ग जगह-जगह बुरी तरह टूट चुके हैं। भूस्खलन ने हाईवे को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है।

2015 तक अकेले डोडा जिले में ही 271 सड़क हादसे

jammu and kashmir's Chenab valley remains death valley '

वर्तमान में हालात यह हैं कि कई जगह राष्ट्रीय राजमार्ग पगडंडी का रूप ले चुका है। सरकारी आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो सिरहन दौड़ जाती है। जनवरी 2014 से सितंबर 2015 तक अकेले डोडा जिले में ही 271 सड़क हादसे हुए हैं।

इन हादसों में 44 लोग जान गवां चुके हैं। जबकि 424 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। इस सबके बावजूद राज्य सरकार ने इन्हें गंभीरता से नहीं लिया। हाईवे और संपर्क मार्गों की हालत बदस्तूर वैसी की वैसी ही है।

सिर्फ ठाठरी-गंदोह संपर्क मार्ग, जो सिर्फ 35 किलोमीटर का है, पर जनवरी 2014 से अब तक 27 सड़क हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में छह लोग जान खो चुके हैं, जबकि 37 लोग घायल हुए।

विडंबना है कि इस सड़क मार्ग पर वर्ष 2002 से सितंबर 2015 तक 110 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हालत खस्ता ही है। गंभीर बात यह है कि शीर्ष पार्टियों के दिग्गज नेता भी इसी इलाके से किसी न किसी रूप में ताल्लुक रखते हैं।

यहां तक कि जिले ने रियासत को मुख्यमंत्री भी दिया। इसके बावजूद डोडा की संपर्क सड़कें और बटोत-डोडा नेशनल हाईवे को ठीक से मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया गया। अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में यह हाईवे पर पैदल चलने लायक भी नहीं रहेगा।

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