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जम्मू-कश्मीर : घाटी में टारगेट किलिंग के खिलाफ 90 के दशक की तर्ज पर रैंडम सर्च ऑपरेशन

Fri, 12 Nov 2021 03:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 12 Nov 2021 03:01 AM IST
सार

आतंकियों की मोडस ऑपरेंडी को नाकाम बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने रणनीति बदली। श्रीनगर में कई इलाकों में तलाशी अभियान, लोगों के शिनाख्ती कार्ड चेक किए।

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Jammu and Kashmir: Random search operation on the lines of 90s against target killing in the valley
जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीर में टारगेट किलिंग की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों की मोडस ऑपरेंडी को नाकाम बनाने के लिए घाटी में विशेषकर श्रीनगर में रणनीति में बदलाव किया है। 90 के दशक में जब आतंकवाद चरम पर था तो सर्च ऑपरेशन चलाए जाते थे। अब उसी तर्ज पर श्रीनगर में रैंडम सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।

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 एक अधिकारी ने बताया कि हाइब्रिड आतंकियों ने जबसे पिस्तौल से घटनाओं को अंजाम देना शुरू किया है, तब से सुरक्षा एजेंसियों को और ज़्यादा चौकस रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले वारदात में एके 47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया जाता था, जोकि कैरी करना आसान नहीं होता था लेकिन पिस्तौल  आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं, क्योंकि इसे छुपाना आसान है। इसलिए इस मोडस ऑपरेंडी को काउंटर करने के लिए रैंडम सर्च ऑपरेशन शुरू किए गए हैं। 
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 वहीं इसी तर्ज पर वीरवार को भी श्रीनगर के कई इलाकों को सुरक्षाबलों ने घेरे में ले लिया। इस दौरान राहगीरों को एक कतार में खड़ा कर उनके शिनाख्ती कार्ड चेक किए गए, गाड़ियों की तलाशी ली गई और यहां तक कि कुछ दुकानों को भी खंगाला गया। 
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एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि जिस तरह से एक दम से चारों ओर फोर्स देखने को मिली। इससे लगता था जैसे आतंकियों की मूवमेंट का कोई इनपुट हो। इस दौरान जिन इलाकों में तलाशी अभियान चलाए गए, उनमें श्रीनगर के लाल चौक का घंटा घर, माईसुमा, बडशाह चौक, हरी सिंह हाई स्ट्रीट, जहांगीर चौक, सराए बाला, आदि इलाके शामिल थे।

 गौरतलब है कि इस महीने अभी तक दो स्थानीय नागरिकों को आतंकियों द्वारा मौत के घाट उतारा गया है। एक पुलिसकर्मी को गत सोमवार जबकि एक सेल्समैन को गत मंगलवार को आतंकियों ने निशाना बनाया। इसके अलावा अक्तूबर के महीने में कुल 13 स्थानीय नागरिक मारे गए जिसमें से 8 को श्रीनगर में मारा गया है। 


इनमें छत्ताबल के अब्दुल रहमान गुरु, एसडी कॉलोनी बटमालू के पीडीडी कर्मचारी मुहम्मद शफी डार, बिंदरू मेडिकेट के मालिक माखन लाल बिंदरू, भागलपुर बिहार का गोलगप्पे वाला वीरेंद्र पासवान, आलूचीबाग की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर, जम्मू के दीपक चंद आदि शामिल हैं। बता दें कि पिछले एक महीने से अधिक समय के दौरान करीब 15 सिविलियन को मारा गया है, जोकि एक चिंता का विषय है। इसे ध्यान में रखते हुए आने वाले दिनों में श्रीनगर में कई अतिरिक्त सीआरपीएफ  की कंपनियां भी तैनात की जाएंगी।    

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