त्रासदी के एक साल बाद भी बेहाल है जम्मू कश्मीर
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कश्मीर घाटी में पिछले वर्ष इन्हीं दिनों आई विनाशकारी बाढ़ से कई लोग बुरी तरह प्रभावित हुए थे, जो आज भी बेहाल हैं। उन्हें अभी भी सरकार की ओर से दी जानेवाली राहत का इंतजार है।
वहीं, सरकार के एक फैसले ने उनका खून खौलने पर मजबूर कर दिया है और वह फैसला है सरकार का अपने विधायकों और मंत्रियों के लिए 11 करोड़ की रकम खर्च कर उनके लिए नई गाडि़यां खरीदना। केवल लोग ही नहीं, विपक्ष द्वारा भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जहां एक तरफ कश्मीर के लोगों का आरोप है कि कश्मीर में आई भीषण बाढ़ के एक साल बाद भी सरकार उनको राहत पहुंचाने में विफल रही है वहीं सरकार अपने इस फैसले को सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए पल्ला झाड़ रही है।
मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार वहीद-उर-रहमान पर्रा का कहना है कि यह भी पुनर्वास का एक हिस्सा है और मंत्रियों और विधायकों को नई गाडि़यां देना जरूरी है। क्योंकि यह उनकी सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
सरकार नई 100 स्कार्पियो गाडि़यां खरीदने में व्यस्त
लोगों का आरोप है कि जब पुनर्वास की बात आती है तो सरकार बहाने बनाती है। एक साल बीतने पर सरकार की नाकामियां गिनवाने के लिए सभी व्यापारिक संगठनों, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन द्वारा 7 सितंबर को काला दिवस के तौर पर मनाने का भी आह्वाहन किया है।
गौरतलब है कि विपक्ष ने भी सरकार के नई गाडि़यां खरीदने के मामले पर मौजूदा सरकार को आड़े हाथों लिया है। नेकां प्रवक्ता जुनैद अजीम मट्टू के अनुसार अगर सरकार पैसा नहीं होने का राग अलापती है तो यह गाडि़यां कहां से खरीदी जा रही हैं ।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का यह फैसला इन बाढ़ पीडि़तों के साथ बहुत बड़ा मजाक है। पीडीपी जो राज्य सरकार में शामिल है। इस सबके लिए केंद्र को कोसती है और यह कहकर पल्ला झाड़ती है कि हमने केंद्र को अर्जी दी है मगर अभी पैसा नहीं मिला और यह केंद्र की मदद के बगैर होना संभव नहीं। हमें सिर्फ पैसों का इंतजार है।