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जम्मू-कश्मीर: डोडा के पर्यटन क्षेत्र पधरी जोत पर हिमाचल ने जताया दावा, चंबा जिला प्रशासन ने दिखाए दस्तावेज

Thu, 30 Dec 2021 03:39 PM IST
करिश्मा चिब मंगेश कुमार, जम्मू।
मंगेश कुमार, जम्मू। Published by: करिश्मा चिब Updated Thu, 30 Dec 2021 03:39 PM IST
सार

डोडा प्रशासन से भी मांगा एक माह में रिकॉर्ड। जल्द हो सकती है एक और बैठक, केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा मामला।
 

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Jammu and Kashmir: Himachal claims on Doda's tourist area, Chamba district administration shows documents
डोडा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के डोडा और हिमाचल के चंबा जिला प्रशासन के बीच प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र पधरी जोत सीमा क्षेत्र को लेकर विवाद गहरा गया है। हाल ही में इस मुद्दे को लेकर चंबा और डोडा जिला प्रशासन के बीच कुंडी मराल में बैठक हुई है। हिमाचल ने सीमावर्ती क्षेत्र पधरी जोत को चबा के सलूनी उपमंडल का भाग होने का दावा किया है। डोडा प्रशासन के समक्ष 1854 से पहले के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं। बैठक में निर्णय लिया गया है कि डोडा प्रशासन अपने दस्तावेज एक माह के भीतर चंबा प्रशासन को देगा। उसके बाद मामला केंद्र सरकार के पास जाएगा।

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फैसला होने तक पधरी जोत पहले की तरह जम्मू-कश्मीर का ही हिस्सा रहेगा। बैठक में डोडा के जिला आयुक्त विकास शर्मा, एसएसपी अब्दुल कयूम, एडीसी रवि भारती, भद्रवाह के एडीसी राकेश कुमार, डीएफओ चंद्रशेखर, अधीक्षण अभियंता लोनिवि नासिर हुसैन और चंबा के डीसी दूनी चंदराणा, एसपी अरुल कुमार, एडीएम अमित मेहरा, एसडीएस सलूणी डॉ. स्वाति गुप्ता, डीएसपी सलूणी मयंक चौधरी, तहसीलदार सलूणी पवन ठाकुर समेत अन्य उपस्थित रहे। 
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हिमाचल सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे ग्रामीण
पधरी जोत पर दावा जताने पर भद्रवाह के लोगों ने हिमाचल सरकार के खिलाफ पधरी-चंबा रोड पर जोरदार प्रदर्शन भी किया। सामाजिक कार्यकर्ता माजिद मलिक ने कहा कि दशकों से पधरी जोत से भद्रवाही गोठ तक भद्रवाह का हिस्सा है। भद्रवाह के लोग गर्मियों में मवेशी लेकर उस इलाके में जाते हैं। पधरी जोत सलूनी उपमंडल के कुंडी मराल से नजदीक है, लेकिन यह हिमाचल का हिस्सा नहीं है। माजिद ने कहा कि अमृतसर संधि के मुताबिक चंबा जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश सरकार जबरन पधरी जोत को कब्जे में लेना चाहती है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भद्रवाह सिविल सोसायटी के सदस्य अभिमन्यु कोतवाल ने बताया कि 1854 से भद्रवाह के जनरल शगतु कोतवाल ने राजा के साथ युद्ध कर पधरी इलाके को हिमाचल से मुक्त करवाया गया था। लोगों ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मांग की है कि जल्द इस समस्या का हल निकाला जाए। इसे लेकर जंतर-मंतर पर धरने की चेतावनी भी है।  
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दस्तावेज उपलब्ध, कानूनी कार्रवाई करेंगे : पूर्व सांसद

डोडा के पूर्व सांसद नरेश गुप्ता ने बताया कि पधरी जोत प्रदेश का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से पधरी जोत में हट बनाए गए हैं। हर साल हिमाचल और जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों से सैकड़ों की संख्या में पर्यटक पधरी जोत आते हैं। भद्रवाह के गुज्जर और गद्दी-सिप्पी लोग मवेशी लेकर जाते हैं। दस्तावेज भी प्रशासन के पास उपलब्ध हैं। कानूनी तौर पर कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि वन विभाग के पास पूरे दस्तावेज हैं। कुछ दिनों में जिला प्रशासन राजस्व और वन विभाग के दस्तावेज हिमाचल सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगा। उसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा। (संवाद)

यह मामला विचाराधीन है। अभी इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। - विकास शर्मा, उपायुक्त, डोडा

पधरी जोत क्षेत्र में हिमाचल की सीमा में आने वाले इलाके को लेकर जिला प्रशासन ने अपना दावा पेश किया है। अब जम्मू-कश्मीर की ओर से दावा व दस्तावेज मांगे गए हैं। इस संबंध में प्रक्रिया जारी है। - दुनी चंद राणा, उपायुक्त चंबा, हिमाचल

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