{"_id":"5f1efc398ebc3e9fdd330404","slug":"jammu-and-kashmir-former-cm-omar-abdullah-says-will-not-contest-election-till-jammu-kashmir-gets-back-the-state","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"उमर अब्दुल्ला का एलान, मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, मुझ पर कोई दबाव नहीं डाल सकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उमर अब्दुल्ला का एलान, मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, मुझ पर कोई दबाव नहीं डाल सकता
Mon, 27 Jul 2020 10:07 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 27 Jul 2020 10:07 PM IST
विज्ञापन
उमर अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपने समय में जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सबसे मजबूत थी, वर्तमान में इसका स्वरूप शक्तिहीन सदन का है। मैं इसका सदस्य नहीं बनूंगा। मेरी मर्जी के खिलाफ मुझ पर चुनाव लड़ने के लिए कोई दबाव नहीं डाल सकता। यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला का।
वह जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलने तक विधानसभा चुनाव न लड़ने के अपने एलान के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके उमर अब्दुल्ला ने हालांकि यह स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस और जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए काम करते रहेंगे।
उन्होंने एक एजेंसी के साथ बातचीत में सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का मैं नेता रहा हूं। अपने समय में यह सबसे मजबूत विधानसभा थी। उन्होंने कहा, चुनान न लड़ने की घोषणा कोई धमकी या ब्लैकमेल नहीं है, यह निराशा का इजहार नहीं है।
विज्ञापन
यह एक सामान्य स्वीकारोक्ति है कि मैं इस तरह की कमजोर विधानसभा (केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा) का नेतृत्व करने के लिए चुनाव नहीं लड़ूंगा। संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने के मुखर आलोचक उमर ने कहा कि विशेष दर्जा खत्म करने के लिए कई कारण गिनाए गए और दावा किया कि उनमें से किसी भी तर्क की कोई जांच नहीं की गई।
विज्ञापन
वह जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलने तक विधानसभा चुनाव न लड़ने के अपने एलान के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके उमर अब्दुल्ला ने हालांकि यह स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस और जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए काम करते रहेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने एक एजेंसी के साथ बातचीत में सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का मैं नेता रहा हूं। अपने समय में यह सबसे मजबूत विधानसभा थी। उन्होंने कहा, चुनान न लड़ने की घोषणा कोई धमकी या ब्लैकमेल नहीं है, यह निराशा का इजहार नहीं है।
विज्ञापन
यह एक सामान्य स्वीकारोक्ति है कि मैं इस तरह की कमजोर विधानसभा (केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा) का नेतृत्व करने के लिए चुनाव नहीं लड़ूंगा। संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने के मुखर आलोचक उमर ने कहा कि विशेष दर्जा खत्म करने के लिए कई कारण गिनाए गए और दावा किया कि उनमें से किसी भी तर्क की कोई जांच नहीं की गई।
उमर ने पिछले साल पांच अगस्त को विशेष दर्जा देने वाले प्रावधानों को निरस्त किए जाने की आलोचना की थी और कहा था कि उनकी पार्टी उच्चतम न्यायालय में इसका विरोध करेगी।
यह मेरा निजी फैसला
उमर ने कहा, हम लोकतंत्र में और शांतिपूर्ण विपक्ष में विश्वास रखते हैं । विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के अपने फैसले पर उन्होंने अपनी पार्टी के भीतर चर्चा की है क्या? इस बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा, यह मेरी निजी राय है और यह मेरा फैसला है। मेरी इच्छा के विपरीत कोई भी चुनाव लड़ने के लिए मुझ पर जोर नहीं डाल सकता।
कानूनी विकल्प खंगाल रही नेकां
जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा परिसीमन संबंधी कवायद के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस पिछले साल पांच अगस्त के बाद के घटनाक्रम और फैसलों को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी विकल्पों को खंगाल रही है और आगे भी यही करेगी। परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव हो पाएंगे।
यह मेरा निजी फैसला
उमर ने कहा, हम लोकतंत्र में और शांतिपूर्ण विपक्ष में विश्वास रखते हैं । विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के अपने फैसले पर उन्होंने अपनी पार्टी के भीतर चर्चा की है क्या? इस बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा, यह मेरी निजी राय है और यह मेरा फैसला है। मेरी इच्छा के विपरीत कोई भी चुनाव लड़ने के लिए मुझ पर जोर नहीं डाल सकता।
कानूनी विकल्प खंगाल रही नेकां
जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा परिसीमन संबंधी कवायद के बारे में पूछे जाने पर उमर ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस पिछले साल पांच अगस्त के बाद के घटनाक्रम और फैसलों को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी विकल्पों को खंगाल रही है और आगे भी यही करेगी। परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव हो पाएंगे।