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जम्मू-कश्मीर: परिसीमन ड्राफ्ट में ज्यादा आपत्तियों की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता आयोग

Fri, 09 Jul 2021 02:58 PM IST
करिश्मा चिब बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Fri, 09 Jul 2021 02:58 PM IST
सार

कुछ प्रतिनिधिमंडलों ने शंका जताई-विधानसभा हलकों की एक्सरसाइज पूरी हो चुकी, यह दिखावा भर। टीम ने जनप्रतिनिधियों को साफ संकेत दिया, कहा-विधानसभा हलकों को लेकर कोई एक्सरसाइज नहीं।

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Jammu and Kashmir: Commission does not want to leave room for more objections in delimitation draft
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के परिसीमन के पहले ड्राफ्ट को फूलप्रूफ बनाने में जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई के नेतृत्व में आयोग जुटा है। पहले दौरे में उसने लोगों की विधानसभा हलकों को लेकर एक्सरसाइज पूरी कर लेने की शंकाओं का समाधान करने की कोशिश की है। जनप्रतिनिधियों को साफ संकेत दिया है कि ऐसी कोई एक्सरसाइज नहीं हुई है। यह प्रारंभिक परामर्श का दौर है। आयोग जमीनी हकीकत जानने के साथ ही लोगों की भावनाओं को समझना चाहता है ताकि जब परिसीमन का ड्राफ्ट आए तो उसमें आपत्तियों की बाढ़ न आ जाए।

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कश्मीर तथा जम्मू संभाग में आयोग की टीम से मिलने वाले ज्यादातर प्रतिनिधियों ने शंका जाहिर की कि विधानसभा हलकों को लेकर परिसीमन की एक्सरसाइज पूरी कर ली गई है। यह मिलने-जुलने का सिलसिला केवल दिखावा भर है ताकि संदेश दिया जा सके कि लोगों की भावनाओं तथा सुझाव को भी इसमें शामिल किया गया है।
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कई प्रतिनिधिमंडलों खासकर विपक्षी दलों के नुमाइंदों ने यह बात रखी कि भाजपा के इशारे पर सारे काम किए जा रहे हैं। कश्मीर का सियासी वर्चस्व खत्म करने की कोशिश हो रही है। जो सात सीटें बढ़ाई जानी हैं उनमें जम्मू को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा। साथ ही सीटों के भौगोलिक ढांचे में भी कश्मीर संभाग में व्यापक फेरबदल किया जाएगा।
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परिसीमन आयोग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि आयोग ने यह साफ कर दिया है कि परिसीमन अधिनियम के तहत ही सभी काम होंगे। इसमें किसी भी राजनीतिक दल का दबाव काम नहीं आएगा। जो जमीनी हकीकत होगी और जो अधिनियम की परिधि में होगा उसी के अनुरूप विधानसभा हलकों का खाका तैयार होगा। दरअसल इस प्रारंभिक परामर्श के दौर व सभी डीसी से मांगी गई विसंगतियों की रिपोर्ट के बाद ही परिसीमन का ड्राफ्ट जारी होगा। आयोग की कोशिश होगी कि कम से कम आपत्तियां आएं ताकि उसका निस्तारण करने में परेशानी सामने न आए।

सत्ताधारी दल के दबाव में परिसीमन न करने की वकालत
परिसीमन आयोग के समक्ष सभी ने पारदर्शी तथा निष्पक्ष तरीके से परिसीमन किए जाने की मांग रखी है। सभी प्रतिनिधिमंडलों का कहना है कि 2011 की जनगणना के अनुरूप ही परिसीमन हो। इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि सत्ताधारी दल के दबाव में नए नियम के तहत ड्राफ्ट तैयार किया जाए। प्रतिनिधिमंडलों ने सोशल मीडिया तथा अन्य प्लेटफार्म पर परिसीमन को लेकर चल रही सूचनाओं को भी आयोग से साझा किया।

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