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J&K: जमीनी स्तर पर विकास के लिए निकाय चुनाव जरूरी, ऐसा नहीं होने पर 4335 करोड़ रुपये का नुक्सान

Tue, 25 Sep 2018 05:29 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Updated Tue, 25 Sep 2018 05:29 PM IST
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Jammu And Kashmir Chief Secretary BVR Subrahmanyam statement on upcoming Panchayat elections
Chief Secretary BVR Subrahmanyam
जम्मू-कश्मीर में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर राज्य के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यन का बयान आया है। उन्होंने कहा है कि राज्य में 4,490 पंचायत और सरपंच हैं। पंचों की संख्या 35,000 है। उन्होंने कहा कि 79 शहरी निकाय और 1200 वॉर्ड्स हैं। इनमें से 600 घाटी में और 600 जम्मू के इलाके में है। इन चुनावों में 39,500 प्रतिनिधि चुने जाएंगे।
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जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव बीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि पंचायती और निकाय चुनाव जमीनी स्तर पर विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि अगले दो वर्षों तक यह चुनाव नहीं हुए तो जम्मू कश्मीर को केंद्र की ओर से आने वाला 4335 करोड़ रुपये का अनुदान नहीं मिल पाएगा।
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नेकां, पीडीपी और सीपीआई (एम) द्वारा अनुच्छेद 35 ए के मुद्दे पर चुनाव बहिष्कार को लेकर उन्होंने कहा कि दो अन्य दल भाजपा और कांग्रेस चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने ऑन रिकॉर्ड कहा है कि यह निर्वाचित सरकार नहीं है और यह सही होगा अगर निर्वाचित सरकार सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35ए का बचाव करेगी।
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श्रीनगर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर यह चुनाव नहीं करवाए गए तो राज्य को पंचायत को मिलने वाले 3029 करोड़ और निकायों को मिलने वाले 1306 करोड़ समेत कुल 4335 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह फंड राज्य सरकार के पास आने के बजाए सीधा इन्हें ही मिलते हैं। इसलिए इनका चुना जाना आवश्यक है। मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार कुछ दूरगामी बदलाव कर रही है जो पंचायत को बहुत शक्तिशाली निर्णय लेने के काबिल बनाएगी।  

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत को सालाना स्थानीय विकास के लिए 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि वित्त आयोग से करीब 20.22 लाख रुपये आते हैं और 30 से 60 लाख रुपये राज्य सरकार से विभिन्न कार्यक्रमों में आ रहे हैं जोकि एक महत्वपूर्ण राशि है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक 3500 पंचायत में रिकॉर्ड रखने के लिए अकाउंटेंट होगा जबकि एक लोकपाल को पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के लिए नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों के पास देश के कुछ अन्य हिस्सों की तरह स्थानीय स्तर पर कर लगाने की शक्ति भी होगी। उन्होंने कहा कि वे पंचायत, बस स्टैंड, बिल बोर्ड, टावरों आदि पर कर लगा सकते हैं। चराई भूमि का नियंत्रण पंचायतों को दिया जाएगा। साथ ही पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद ब्लॉक विकास पंचायतों को अवरुद्ध करने के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव होंगे।  

यह पूछे जाने पर कि राज्यपाल ने नेकां और पीडीपी को चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी, के जवाब में उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने कई राजनीतिक दलों के साथ कई बार विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने कहा कि जुलाई में चुनाव शुरू करने की प्रक्रिया के बाद दोनों राज्यपालों (पिछले और वर्तमान) और राजनीतिक दलों के बीच बातचीत हुई है।

 


 
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