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जम्मू-कश्मीर: जीएमसी में जल्द शुरू होगी बीएसएल-3 लैब, स्टाफ में नहीं बढ़ेगा संक्रमण

Sun, 01 Aug 2021 08:05 PM IST
करिश्मा चिब अमित कुमार, जम्मू
अमित कुमार, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Sun, 01 Aug 2021 08:05 PM IST
सार

कोरोना, स्वाइनफ्लू जैसे वायरस की टेस्टिंग का दायरा बढ़ेगा। जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में ऐसी दो ही लैब काम कर रहीं।

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Jammu and Kashmir: BSL-3 lab will start soon in GMC, infection will not increase in staff
जीएमसी जम्मू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू संभाग के दस जिलों के लिए जीएमसी जम्मू में जल्द बायो सेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल) लैब को शुरू किया जा रहा है। इस अत्याधुनिक लैब में कोरोना, स्वाइन फ्लू जैसे खतरनाक वायरस की जांच के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पालिमरेस चेन रिएक्शन) किए जाएंगे। इससे संभाग में आरटीपीसीआर टेस्टिंग का दायरा बढ़ेगा। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए इस लैब को एक माह के भीतर शुरू करने की योजना है। 

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जीएमसी में ग्राउंड फ्लोर पर कोविड आईसीयू के साथ बीएसएल लैब का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में अस्पताल के माइक्रोबायोलाजी विभाग में बीएसएल-2 श्रेणी की लैब काम कर रही है, यहां संभाग भर के कोविड टेस्ट किए जा रहे हैं। बीएसएल की चार श्रेणी वाली लैब हैं। जिसमें पहली श्रेणी सामान्य, दूसरी अस्पताल में लगी लैब, तीसरी आधुनिक लैब और चौथी दुर्लभ श्रेणी वाली लैब होती है। कोविड की दो लहरों के दौरान जीएमसी में बड़ी संख्या में डॉक्टर और अन्य स्टाफ संक्रमित हुए।
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इसका बड़ा कारण बीएसएल-2 लैब से अंदर बाहर सारी गतिविधियां का होना है। इसमें भीतर टेस्टिंग में लगे स्टाफ से बाहर भी संक्रमण फैलता है, जिससे आगे चेन बन जाती है। लेकिन बीएसएल-3 लैब भीतर से बाहर संक्रमण फैलने का खतरा नहीं रहता, जिससे यह लैब सार्वजनिक स्थान पर भी चलने से संक्रमण के लिहाज से सुरक्षित रहती है।
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बीएसएल-3 लैब के ढांचे का निर्माण पूरा
जीएमसी की सामान्य बीएसएल-2 लैब में प्रतिदिन 2000 आरटीपीसीआर टेस्ट करने की क्षमता है। वर्तमान में चेस्ट डिजीज अस्पताल श्रीनगर और आईआईआईएम जम्मू में बीएसएल-3 लैब काम कर रही है। कोविड के दौरान श्रीनगर में अधिकांश आरटीपीसीआर टेस्ट बीएसएल-3 लैब में ही किए गए हैं। जीएमसी जम्मू में 3.3 करोड़ रुपये की लागत से बीएसएल-3 लैब को तैयार किया जा रहा है, जिसमें ढांचे का निर्माण कर लिया गया है। यह प्रोजेक्ट 2014-15 में शुरू किया गया था।  

यह भी पढ़ें- ये नया जम्मू-कश्मीर है: देशद्रोहियों और पत्थरबाजों को ना पासपोर्ट मिलेगा ना सरकारी नौकरी, आदेश जारी

बीएसएल-3 लैब के बारे में जानिए
जीएमसी जम्मू में लगने वाली बायो सेफ्टी लेवल-3 लैब पूरी तरह से एडवांस है। लैब में संक्रमण का खतरा नहीं होता है, क्योंकि इसमें हवा फिल्टर होकर अंदर जाएगी और बाहर निकलेगी। इससे संक्रमण फैलने का खतरा नहीं रहता। हर जांच के लिए पूरी तरह से एयरप्रूफ अलग अलग क्यूब बने होते हैं। विशेष पीपीटी किट, ग्लब्स, फेस मास्क पहनकर ही लैब में जांच की जाती है। लैब के भीतर बाहर से पानी तक ले जाने की अनुमति नहीं होती है, ताकि संक्रमण को बाहर आने में किसी तरह से मदद न मिले।


इसी तरह बीएसएल-4 अति संवेदनशील और दुर्लभ श्रेणी की लैब होती है। दुनिया में यह गिनी चुनी लैब हैं। चीन के वुहान में यही लैब संक्रमण की जांच पर काम कर रही थी। इस लैब में दुनिया के सबसे खतरनाक पैथोजन पर लगातार प्रयोग चलता रहता है। आमतौर पर यहां वही वायरस या बैक्टीरिया होते हैं जो लाइलाज या जानलेवा हों। ये लैब आबादी से काफी दूर होती है।

लैब से टेस्टिंग का दायरा बढ़ेगा
जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन का कहना है कि अस्पताल में बीएसएल-3 लैब के शुरू होने से आरटीपीसीआर टेस्टिंग का दायरा बढ़ेगा, जिससे संक्रमित लोगों को जल्द उपचार मिल सकेगा।

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