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Jammu News: जम्मू-कश्मीर में बेघर लोगों की पहचान होगी, मार्च तक पूरा होगा सर्वे
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शहरी विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करते मुख्य सचिव फोटो सूचना विभाग
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पीएमएवाई शहरी 2.0 के तहत ऐसे लोगों को घर दिए जाएंगे, मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में बेघर लोगों की पहचान होगी। इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई)-शहरी 2.0 के तहत घर दिए जाएंगे। आवास एवं शहरी विकास विभाग (एचएंडयूडीडी) योजना विकास एवं निगरानी विभाग के साथ सहयोग के साथ ऐसे लोगों की पहचान करेगा।
सोमवार को मुख्य सचिव अटल डुल्लु ने एचएंडयूडीडी के अधिकारियों के साथ बैठक की। सर्वेक्षण से पीएमएवाई (यू) के तहत विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आवास के लिए पात्र लोगों के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभाग को पात्र बेघर लोगों की पहचान के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने पर जोर दिया।
उन्होंने सभी डीसी को दिशा-निर्देश साझा करने को कहा। शिक्षकों को इस कार्य से छूट देने को कहा। सर्वेक्षणकर्ताओं को एक सप्ताह का प्रशिक्षण देने और मार्च महीने में ही सर्वेक्षण पूरा करने को कहा। आयुक्त सचिव मनदीप कौर ने युवा सर्वेक्षण की तर्ज पर डिजिटल रूप सर्वेक्षण के महत्व पर बात की।
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बैठक में बताया की योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ईडब्ल्यूएस परिवारों को तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय रखी है। एलआईजी को तीन से छह लाख रुपये की वार्षिक आय जबकि एमआईजी को छह से नौ लाख रुपये की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके अलावा, विधवाओं, एकल महिलाओं, विकलांग व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडरों, एससी/एसटी, अल्पसंख्यकों और समाज के अन्य कमजोर और असुरक्षित वर्गों के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में बेघर लोगों की पहचान होगी। इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई)-शहरी 2.0 के तहत घर दिए जाएंगे। आवास एवं शहरी विकास विभाग (एचएंडयूडीडी) योजना विकास एवं निगरानी विभाग के साथ सहयोग के साथ ऐसे लोगों की पहचान करेगा।
सोमवार को मुख्य सचिव अटल डुल्लु ने एचएंडयूडीडी के अधिकारियों के साथ बैठक की। सर्वेक्षण से पीएमएवाई (यू) के तहत विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आवास के लिए पात्र लोगों के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभाग को पात्र बेघर लोगों की पहचान के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने पर जोर दिया।
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उन्होंने सभी डीसी को दिशा-निर्देश साझा करने को कहा। शिक्षकों को इस कार्य से छूट देने को कहा। सर्वेक्षणकर्ताओं को एक सप्ताह का प्रशिक्षण देने और मार्च महीने में ही सर्वेक्षण पूरा करने को कहा। आयुक्त सचिव मनदीप कौर ने युवा सर्वेक्षण की तर्ज पर डिजिटल रूप सर्वेक्षण के महत्व पर बात की।
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बैठक में बताया की योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ईडब्ल्यूएस परिवारों को तीन लाख रुपये तक की वार्षिक आय रखी है। एलआईजी को तीन से छह लाख रुपये की वार्षिक आय जबकि एमआईजी को छह से नौ लाख रुपये की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके अलावा, विधवाओं, एकल महिलाओं, विकलांग व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडरों, एससी/एसटी, अल्पसंख्यकों और समाज के अन्य कमजोर और असुरक्षित वर्गों के लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।